Friday, June 25, 2021
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चंडीगढ़

Latest Update-June 10, 2021

June 10, 2021 06:07 AM

-कोविशील्ड और कोवैक्सीन की डोज के बाद भी संक्रमित कर सकता है कोरोना का डेल्टा वैरिएंट: AIIMS की स्टडी में खुलासा

एम्स (दिल्ली) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के अलग-अलग अध्ययनों के अनुसार, COVID-19 का 'डेल्टा' संस्करण (पिछले साल अक्टूबर में पहली बार भारत में पाया गया संस्करण) कोवैक्सिन या कोविशील्ड टीकों की दोनों खुराक प्राप्त करने के बाद भी लोगों को संक्रमित करने में सक्षम है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अभी तक किसी भी अध्ययन की सहकर्मी-समीक्षा नहीं की गई है। एम्स के अध्ययन में यह कहा गया है कि 'डेल्टा' संस्करण 'अल्फा' संस्करण की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत अधिक संक्रामक है।

एम्स-आईजीआईबी (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) का अध्ययन 63 रोगसूचक रोगियों के विश्लेषण पर आधारित था, जिन्होंने अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में पांच से सात दिनों तक तेज बुखार की शिकायत की थी। इन 63 लोगों में से 53 को कोवैक्सिन की कम से कम एक खुराक और बाकी को कोविशील्ड की कम से कम एक खुराक दी गई थी। 36 को इनमें से एक टीके की दोनों खुराकें मिली थीं।

'डेल्टा' संस्करण द्वारा 76.9 प्रतिशत संक्रमण उन लोगों में दर्ज किए गए जिन्हें एक खुराक मिली थी। वहीं, 60 प्रतिशत उन लोगों में दर्ज किए गए थे जिन्होंने दोनों खुराक प्राप्त की थी। एनसीडीसी-आईजीआईबी अध्ययन के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 'डेल्टा' संस्करण का संक्रमण कोविशील्ड लेने वाले लोगों को प्रभावित करता है।

दोनों अध्ययनों के डेटा से संकेत मिलता है कि 'अल्फा' संस्करण भी कोविशील्ड और कोवैक्सिन के लिए प्रतिरोधी साबित हो रहा है, लेकिन उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि भारत से पहली बार रिपोर्ट किया गया संस्करण। दोनों अध्ययनों ने यह भी संकेत दिया कि टीके की 'डेल्टा' और यहां तक कि 'अल्फा' से सुरक्षा को कम किया जा सकता है, इसके परिणामस्वरूप प्रत्येक मामले में संक्रमण की गंभीरता अप्रभावित दिखाई देती है।

यह वैज्ञानिकों के विचारों के अनुरूप है कि अभी तक कोई सबूत नहीं है कि 'डेल्टा' संस्करण कोविड से जुड़ी मौतों या अधिक गंभीर संक्रमणों की अधिक संख्या का कारण बन रहा है। हालांकि, एम्स-आईजीआईबी और एनसीडीसी-आईजीआईबी के अध्ययन पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, आईसीएमआर और कोवैक्सिन निर्माताओं भारत बायोटेक द्वारा संयुक्त जांच का खंडन करते हैं। वह अध्ययन संकेत देता है कि कोवैक्सिन 'डेल्टा' और 'बीटा' दोनों प्रकारों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। 'बीटा' संस्करण सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में खोजा गया था।

पिछले हफ्ते वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक सरकारी अध्ययन ने संकेत दिया कि भारत में दूसरी कोविड लहर के पीछे 'डेल्टा' संस्करण था। लहर के चरम पर हर दिन चार लाख से अधिक नए मामले सामने आए। विशेषज्ञों ने सरकार से संक्रमण की तीसरी लहर की प्रत्याशा में देश भर में टीकाकरण की गति बढ़ाने का आग्रह किया है। अब तक करीब 24 करोड़ डोज दी जा चुकी है।

- भाजपा के हुए जितिन: सीएम योगी और सिंधिया ने किया स्वागत, कांग्रेस का तंज- पार्टी छोड़ने के लिए 'धन्यवाद'

कांग्रेस आलाकमान से लंबे समय से नाराज चल रहे जितिन प्रसाद ने आज भाजपा का दामन थाम लिया। जितिन प्रसाद के पार्टी में शामिल होने के बाद सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर बधाई दी। योगी ने ट्वीट किया 'जितिन प्रसाद के आने से उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूती मिलेगी'। वहीं कांग्रेस से भाजपा में आए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, जितिन प्रसाद हमारे भाई और मित्र हैं। भाजपा में उनका स्वागत है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने 'धन्यवाद' कहकर जितिन प्रसाद पर तंज कसा है। वहीं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर कांग्रेस के लिए बड़ा झटका करार दिया है। बिश्नोई ने कहा कि उनकी पार्टी को राज्यों में जीत हासिल करने के लिए जन नेताओं की पहचान कर उन्हें मजबूती प्रदान करनी चाहिए।  बिश्नोई ने ट्वीट किया, ‘‘पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ... और अब जितिन प्रसाद ...। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है, क्योंकि हम उन नेताओं को खो रहे हैं जिन्होंने पार्टी को दिया और आगे भी दे सकते थे।’’

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी कसा तंज, कहा- पार्टी छोड़ने के लिए धन्यवाद

कांग्रेस पार्टी की छत्तीसगढ़ इकाई ने भी पार्टी छोड़ने को लेकर जितिन प्रसाद पर तंज कसा है। इसके लिए पार्टी की छत्तीसगढ़ इकाई ने बुधवार को अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि जितिन प्रसाद जी का कांग्रेस पार्टी छोड़ने के लिए धन्यवाद।

जाने वाले जाते रहते हैं: खड़गे

उधर, कांग्रेस सासंद मल्लिकार्जुन खड़ने ने जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा, 'जाने वाले जाते रहे हैं, हम उन्हें रोक नहीं सकते। यह उनका फैसला था। उनका यहां (कांग्रेस में) भी भविष्य था। हालांकि, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।' इसके साथ ही पंजाब कांग्रेस में मतभेदों के समाधान के लिए गठित किए गए कांग्रेस के पैनल को लेकर खड़गे ने कहा कि हम तीन-चार दिन में अपनी रिपोर्ट जमा कर देंगे।

 कांग्रेस में ऐसे नेता हैं जो सही इस्तेमाल किए जाने पर नतीजे दे सकते हैं: देवड़ा

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा ने जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद कहा कि कांग्रेस को अपनी पुरानी स्थिति पाने के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मेरा मानना है कि कांग्रेस एक पार्टी के तौर पर यह कर सकती है और करना ही चाहिए कि वह एक विशाल पार्टी वाली अपनी पुरानी स्थिति फिर से हासिल करे। हमारे पास अब भी ऐसे नेता हैं जिन्हें अगर सशक्त किया जाए और बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो वे नतीजे दे सकते हैं।’

 प्रसाद को यह नहीं भूलना चाहिए : डीके शिवकुमार

जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और नेहरू परिवार ने ही उन्हें पहचान दिलाई। उन्हें और मुझे यह नहीं भूलना चाहिए।

 भाजपा में उनका भविष्य उज्ज्वल होगा : अदिति सिंह

कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह ने बुधवार को कहा कि यह कांग्रेस के लिए एक बड़ी क्षति है और पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद जैसे वरिष्ठ नेता क्यों जा रहे हैं। कांग्रेस एक परिवार की पार्टी बनती जा रही है। भाजपा में उनका (जतिन) भविष्य उज्ज्वल होगा।

 जितिन का जाना हमारे चेहरे पर एक बड़ा तमाचा : रावत

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि जितिन प्रसाद का भाजपा में शामिल होना हमारे चेहरे पर एक बड़े तमाचे की तरह है। यह दुखद और निराशाजनक है। मुझे आश्चर्य है कि उन्होंने कांग्रेस को एक क्षेत्रीय पार्टी कहा और उस पार्टी में शामिल हो गए, जिसके खिलाफ उनके परिवार ने लड़ाई लड़ी।

- पटरी पर लौटेंगी राजधानी-शताब्दी समेत निरस्त की गईं 32 जोड़ी ट्रेनें

दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई प्रदेशों में धीरे-धीरे लॉकडाउन खत्म होने और कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आने के चलते लंबी दूरी की 32 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन शुरू करने का फैसला लिया है। इससे बिहार, उत्तर प्रदेश समेत देशभर के लाखों लोगों को राहत मिलेगी। पटरी पर लौटने वाली ट्रेनों में शताब्दी, राजधानी, दुरंतो और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी शामिल हैं। उत्तर रेलवे ने बुधवार को एक बयान में यह जानकारी दी है। निरस्त की गई ट्रेनों में 8 जोड़ी शताब्दी, दो जोड़ी दुरंतो, दो जोड़ी राजधानी और एक जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल थीं। अब सभी ट्रेनें बहाल कर दी गई हैं।

बता दें कि अप्रैल-मई महीने के दौरान कोरोना संक्रमण और लाॅकडाउन का असर रेल परिचालन पर भी पड़ रहा था। यात्रियों की कमी के चलते शताब्दी एक्सप्रेस व राजधानी एक्सप्रेस सहित लंबी दूरी की कई दर्जन ट्रेनों का परिचालन निरस्त कर दिया था।। इसके साथ ही लोकल ट्रेनों की आवाजाही बंद कर गई थी, जिसका परिचालन हाल ही में शुरू हुआ है।। इससे इन ट्रेनों से सफर करने वाले कर्मचारियों और अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था, हालांकि रेलवे का कहना था कि ऐसा पैसेंजर नहीं मिलने के चलते फैसला लिया था।

कोरोना लॉकडाउन के चलते रद की गई थीं निम्न ट्रेनें

पुरानी दिल्ली-टूंडला एमईएमयू विशेष (04184/04183)

पुरानी दिल्ली-हाथरस किला एमईएमयू विशेष (04418/04417)

नई दिल्ली-अलीगढ एमईएमयू विशेष (04414/04413)

गाजियाबाद-मथुरा ईएमयू विशेष (04420/04419)

रेलवे अधिकारियों का कहना था कि उत्तर प्रदेश में लाॅकडाउन के कारण ट्रेनों को रद करने का फैसला किया था। इन ट्रेनों से सफर करने वाले सरकारी कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई थी। इसके साथ ही इलाज व अन्य जरूरी काम के लिए सफर करने वालों को भी दिक्क्त हुई थी। दरअसल, लाॅकडाउन और कोरोना का असर अप्रैल और मई महीने में रेलवे पर भी दिखने लगा था। महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, यूपी एवं बिहार जैसे राज्यों में लाॅकडाउन के कारण कई ट्रेनें कैंसिल हो रही थीं। लॉकडाउन के कारण राजधानी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में सीटें खाली रह जा रही थीं। इस कारण दिल्ली से भुवनेश्वर के बीच चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस के फेरे कम किए गए थे। अधिकारियों का कहना था कि अधिकांश राज्यों में लॉकडाउन की वजह से यात्रियों की संख्या में कमी आ रही थी, इसलिए ट्रेनों को निरस्त किया था।

- गुड न्यूज: अब 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी आएगी कोरोना वैक्सीन, फाइजर शुरू कर रहा ट्रायल

कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी फाइजर 12 साल के कम उम्र के बच्चों पर बड़े स्तर पर वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने को पूरी तरह से तैयार है। फाइजर इंक कंपनी ने मंगलवार को कहा कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने जा रही है। वह परीक्षण के पहले चरण में शॉट की कम खुराक का चयन करने के बाद 12 साल से कम उम्र के बच्चों के एक बड़े समूह में अपने कोरोना वैक्सीन का परीक्षण शुरू करेगी। बताया जा रहा है कि इस ट्रायल के लिए फाइजर ने 4500 से अधिक बच्चों का चुनाव किया है। ये बच्चे अमेरिका, फिनलैंड, पोलैंड और स्पेन के होंगे।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनी की मानें तो सेफ्टी, सहनशीलता और पहले चरण में 144 बच्चों में उत्पन्न प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के आधार पर फाइजर ने कहा कि यह 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों में 10 माइक्रोग्राम की खुराक का परीक्षण करेगा। वहीं, 6 माह से 5 वर्ष की आयु समूह में और 3 माइक्रोग्राम की खुराक का परीक्षण करेगा। बता दें कि वयस्कों के लिए बनी वैक्सीन में खुराक की मात्रा 30 माइक्रोग्राम होती है।

फाइजर के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि सितंबर तक 5 से 11 साल के बच्चों के परीक्षण के डेटा हासिल हो जाएंगे। इतना ही नहीं, संभवत: उस महीने के अंत में इसके आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए भी नियामकों के समक्ष आवेदन भी कर दिए जाएंगे। वहीं, उन्होंने कहा कि 2 से 5 साल के बच्चों के लिए डेटा भी उसके बाद जल्द ही आ सकता है। फाइजर को उम्मीद है कि अक्टूबर या नवंबर में कभी भी 6 महीने से 2 साल के आयु वर्ग के डेटा उपलब्ध हो जाएंगे।

फाइजर की कोविड वैक्सीन को पहले ही अमेरिका और यूरोपीय संघ में 12 साल के अधिक उम्र की बच्चों को लगाने के लिए मंजूरी दी जा चुकी है। हालांकि, यह मंजूरी आपातकालीन उपयोग के लिए ही दी गई है। फाइजर ने कोरोना की यह वैक्सीन अपने जर्मन पार्टनर बायोएनटेक के साथ मिलकर बनाई है। इसी कंपनी की वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सबसे पहले अपनी मंजूरी दी थी। अमेरिका में करीब 7 मिलियन किशोरों को कम से कम वैक्सीन की एक खुराक मिली है।

- वैक्सीन सर्टिफिकेट में है कोई गलती तो घर बैठे सुधारें, यह है तरीका

सरकार ने कोविन पोर्टरल (Cowin) के लिए नया अपडेट जारी किया है। इस अपडेट के बाद Cowin पर ही आप अपने वैक्सीन के सर्टिफिकेट में मौजूद किसी गलती को सुधार सकेंगे। यदि रजिस्ट्रेशन के दौरान नाम या जन्म तारीख में कोई गलती हो गई है तो आप Cowin पोर्टल पर लॉगिन करके उसमें सुधार कर सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव विकास शील ने बुधवार को बताया कि उपयोगकर्ता कोविन वेबसाइट के जरिए यह सुधार कर सकते हैं।

कैसे करें वैक्सीन सर्टिफिकेट में सुधार

यदि आपने वैक्सीन का दोनों डोज लगवा लिया है और आपके वैक्सीन सर्टिफिकेट में किसी तरह की कोई गलती है जैसे लिंग, जन्म तारीख, नाम आदि की गलती तो अब सरकार ने इसमें ऑनलाइन सुधार की सुविधा दे दी है। वैक्सीन सर्टिफिकेट की किसी भी गलती को आप घर बैठे सुधार सकते हैं। आइए इसकी पूरी प्रोसेस जानते हैं।

     सबसे पहले http://cowin.gov.in पर जाएं।

    अब अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉगिन करें।

    अब उस आईडी को सेलेक्ट (मल्टीपल रजिस्ट्रेशन की स्थिति में) करें जिसमें सुधार करना है।

    अब आपको आईडी के नीचे Raise an Issue का विकल्प दिखेगा।

    Raise an Issue पर क्लिक करके आप लिंग, जन्म तारीख, नाम आदि में सुधार कर  सकते हैं।

आरोग्य सेतु एप पर ब्लू टिक

गौरतलब है कि पिछले महीने ही भारत सरकार ने लोगों को आरोग्य सेतु एप पर ब्लू टिक देने का एलान किया है। Aarogya Setu एप पर उनलोगों के अकाउंट के साथ ब्लू टिक मिलेगा जिन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली है। आरोग्य सेतु एप पर वैक्सीन लगवाने वालों को ब्लू टिक और ब्लू शील्ड मिलेगा। इसका फायदा यह होगा कि बिना सर्टिफिकेट देखे उनलोगों को पहचान आरोग्य सेतु एप से ही हो जाएगी जिन्होंने वैक्सीन लगवा ली है।

 सोशल मीडिया पर शेयर ना करें वैक्सीन सर्टिफिकेट

गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था साइबर दोस्त ने ट्वीट करके लोगों को इसके बारे में चेताया है। साइबर दोस्त ने ट्वीट करके कहा है कि कोरोना वैक्सीन सर्टिफिकेट में नाम, उम्र और लिंग और अगले डोज की तारीख समेत कई जानकारियां शामिल होती हैं। इन जानकारियों को सोशल मीडिया पर शेयर करना आपको महंगा पड़ सकता है। आपकी इन जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग आपके साथ धोखाधड़ी कर सकते हैं। इसलिए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को सोशल मीडिया पर शेयर ना करें।

- दुनिया के टॉप 200 शैक्षिक संस्थानों में तीन भारतीय विश्वविद्यालय भी, IISc को मिला पहला स्थान, पीएम मोदी ने दी बधाई

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे और IIT दिल्ली नवीनतम QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2022 के शीर्ष -200 में भारत के तीन विश्वविद्यालय बन गए हैं। बता दें कि अग्रणी वैश्विक उच्च शिक्षा विश्लेषक क्यूएस (क्वाक्वेरेली साइमंड्स) द्वारा सर्वाधिक सम्मानित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग में से एक का 18वां संस्करण जारी किया गया। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन संस्थानों को बधाई दी है।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'IISc बैंगलोर, IIT बॉम्बे और IIT दिल्ली को बधाई। भारत के अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों को वैश्विक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने और युवाओं के बीच बौद्धिक कौशल का समर्थन करने के प्रयास जारी हैं।'

आईआईएससी को मिला पहला स्थान

लंदन स्थित शिक्षा विश्लेषक विश्लेषण में आईआईएससी को उद्धरण प्रति संकाय (सीपीएफ) मीट्रिक के लिए 100 में से 100 का पूरा स्कोर प्राप्त हुआ है। रैंकिंग के अनुसार, IIT बॉम्बे ने 177 वां स्थान हासिल किया, IIT दिल्ली ने 185 वां रैंक हासिल किया और IISc बेंगलुरु ने विश्व स्तर पर समग्र विश्वविद्यालय रैंकिंग में 186 वां स्थान हासिल किया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने विश्वविद्यालयों को उनकी रैंकिंग के लिए बधाई दी और कहा, 'भारत शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में छलांग लगा रहा है और एक विश्वगुरु के रूप में उभर रहा है। हमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जैसे गुरु पर भी उतना ही गर्व है। मोदी जो लगातार छात्रों, फैकल्टी स्टाफ और भारतीय शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य सभी हितधारकों के कल्याण के बारे में सोचते रहे हैं।'

- बाबा रामदेव को झटका: भूटान के बाद अब नेपाल ने भी रोका पतंजलि की कोरोनिल किट का वितरण

भूटान के बाद अब नेपाल ने भी पतंजलि को झटका दिया है। नेपाल के डिपार्टमेंट ऑफ आयुर्वेद एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन ने कोरोनिल किट के वितरण पर रोक लगा दी है। यह किट योगगुरु रामदेव ने नेपाल को तोहफे में दिया था। नेपाल की तरफ से कहा गया है कि पतंजलि ने जिस कोरोनिल को Covid-19 से लड़ने में उपयोगी बताया है उसका वितरण नियमों के मुताबिक नहीं किया गया था।

नेपाल सरकार ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि कोरोनिल किट में शामिल टैबलेट और नजर ऑयल Covid-19 को हराने वाली अन्य दवाइयों के बराबर नहीं हैं। नेपाली अधिकारियों ने हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिशन द्वारा कही गई उस बात का भी जिक्र किया है जिसमें एसोसिएशन ने रामदेव को चुनौती दी थी कि वो साबित कर के दिखाएं कि उनका प्रोडक्ट कोरोना से लड़ने में सक्षम है।

हालांकि, नेपाल में अभी पतंजलि ग्रुप का बड़ा कारोबार है। नेपाली सरकार का यह आदेश राजनीतिक विवादों में भी घिरता नजर आ रहा है। दरअसल नेपाल को कोरोनिल के यह किट पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हृदयेश त्रिपाठी और महिला और बाल विकास की इंचार्ज जूली महतो के कार्यकाल के दौरान मिले थे। जूली महतो के भाई उपेंद्र महतो बड़े उद्योगपति हैं और नेपाल में पतंजलि ग्रुप के पार्टनर भी हैं। नेपाल सरकार का कहना है कि यह किट उपहार के तौर पर दिये गये थे, इनके व्यवसायिक वितरण पर कोई फैसला नहीं किया गया है। जूली महतो और उनके पति रघुवीर महासेठ कोरोना पॉजीटिव भी हुए थे।

नवीनतम आदेश की व्याख्या ओली सरकार द्वारा पतंजलि समूह से दूरी बनाने के प्रयास के रूप में की जा रही। पिछले हफ्ते कैबिनेट फेरबदल के बाद, रघुवीर महासेठ को तीन उप प्रधानमंत्रियों में से एक नियुक्त किया गया है और वह विदेश मंत्रालय के प्रभारी भी हैं। शेर बहादुर तमांग ने नए स्वास्थ्य मंत्री के रूप में पदभार संभाला है। महतो और महासेठ नेपाल के प्रमुख मधेसी परिवार हैं और नेपाल में रामदेव की व्यावसायिक सुविधाएं भी ज्यादातर मधेस क्षेत्र में स्थित हैं जिन्हें तराई मैदान भी कहा जाता है।

यहां आपको बता दें कि इससे पहले भूटान ने भी अपने यहां कोरोनिल किट के वितरण पर रोक लगाई है। हाल ही में भूटान ड्रग रेग्यूलेटरी ऑथोरिटी ने इस दवा को वितरित किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। हाल ही में बाबा रामदेव ने एलोपैथी दवाई को बकबास करार दिया था जिसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उनका विरोध किया था। बाद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के उत्तराखंड ब्रांच ने बाबा रामदेव पर 10 हजार करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया था। हालांकि, बाद में माफी मांग लेने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बाबा रामदेव के खिलाफ दायर याचिका को वापस लेने की बात कही थी।

- 'मिलावट बंद कर दी, इसलिए महंगा है सरसों का तेल', बढ़ती कीमतों पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिया जवाब

खाने के तेल (Edible Oil) के दाम भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों की तरह बेलगाम हो चुके हैं. पेट्रोल-डीजल के दाम कम करना तो सरकार के हाथ में नहीं है, क्योंकि ये ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करते हैं, लेकिन खाने के तेल के दाम का ग्लोबल मार्केट से कोई लेना देना नहीं है, फिर इसके दाम क्यों बढ़ रहे हैं इस सवाल का जवाब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिया है.  मिलावट बंद कर दी इसलिए महंगा है सरसों का तेल: तोमर

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरसों का तेल थोड़ा महंगा जरूर हुआ है, क्योंकि उसमें सरकार ने मिलावट को बंद किया है. उन्होंने कहा कि सरकार बढ़ती महंगाई पर नजर बनाए हुए है, दालों और तेल की कीमतों पर हमारा ध्यान है. दालों के दाम कम हुए हैं क्योंकि सरकार ने स्टॉक रिलीज किया है, लेकिन सरसों तेल के दाम बढ़े हैं क्योंकि हमारी सरकार ने तय किया है कि हम इसमें और कोई खाने का तेल मिक्स नहीं करेंगे ताकि इसकी शुद्धता बरकरार रहे. उन्होंने कहा कि ये ये फैसला बेहद जरूरी है इसका फायदा देशभर के तिलहन और सरसों में काम करने वाले किसानों को होने वाला है. यानी अब कई स्रोतों वाले तेलों से तैयार किए जाने वाले खाद्य वनस्पति तेल के उत्पादन और पैकिंग में सरसों तेल को मिलाने पर रोक लागू हो गई है. सरकार की ओर से सोमवार को इसे लेकर एक आदेश जारी किया गया था.

1 साल में 60 परसेंट बढ़े तेल के दाम

बीते एक साल में सरसों के तेल का दाम बेतहाशा बढ़े हैं. उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक एक साल में खाने के तेल के दाम 60 परसेंट तक बढ़े हैं. आजकल सरसों तेल का भाव 170 से 180 रुपये प्रति लीटर चल रहा है, जो पिछले साल मई के दौरान 120-130 रुपये प्रति लीटर था. सरसों तेल के अलावा मूंगफली, सूरजमुखी, डालडा और रिफाइंड जैसे दूसरे खाद्य तेलों के दाम में भी तेजी से बढ़े हैं.

रिफाइंड ऑयल भी महंगे हुए

इसी प्रकार सोयाबीन रिफाइंड ऑयल फिलहाल 160 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिक रहा है. पिछले साल यह 120 रुपये प्रति लीटर था. मई 2020 में 132 रुपये प्रति लीटर बिकने वाले सूरजमुखी तेल का भाव अब 200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है. इसी तरह वनस्प्ति तेल का दाम पिछले साल 100 रुपये प्रति लीटर था. अब यह 140 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है. पिछले एक हफ्ते में ही खाद्य तेलों की कीमतों में 7-8 फीसदी का इजाफा देखा गया है. व्यापारियों का कहना है कि सरसों की नई फसल भी कट गई है, इसके बावजूद तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

- एमपी के पूर्व सीएम कमलनाथ की तबीयत बिगड़ी, मेदांता अस्पताल में कराया गया भर्ती

एमपी के पूर्व सीएम कमलनाथ की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके करीबी सूत्रों ने बताया है कि उनका बीपी सुबह में अचानक बढ़ गया था। साथ ही कोरोना वायरस के कुछ लक्षण दिखे हैं, उसके बाद गुरुग्राम स्थित मेदांता में उन्हें भर्ती कराया गया है। पूर्व सीएम कई दिनों से दिल्ली में रह रहे थे।

 कमलनाथ को बुखार की भी शिकायत थी। सुबह 10 बजे आवास से मेदांता में ले जाया गया है। यहां डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। कमलनाथ को अस्पताल में 15वें फ्लोर स्थित कमरा नंबर 4412 में रखा गया है। मेदांता के डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। दरअसल, कमलनाथ को हनीट्रैप मामले में एसआईटी ने नोटिस भी जारी किया है। उनसे दो जून को भोपाल में एसआईटी पूछताछ करने वाली थी लेकिन भोपाल में न होने के कारण पूछताछ नहीं हो सकी है। कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने बयान जारी कर कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को दो दिन से बुखार होने के कारण रूटीन चेकअप और जांच के लिए गुरूग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में पहुंचे हैं। डॉक्टर्स की तरफ परीक्षण के उपरांत जो भी आवश्यक निर्णय होगा , लिया जाएगा।

वहीं, एमपी कांग्रेस के अन्य नेताओं ने जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। पिछले दिनों कमलनाथ इंदौर में एक लिफ्ट हादसे के भी शिकार हुए थे। हालांकि उसमें उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ था। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

- कोरोना: Monoclonal Antibody Therapy हो सकती है कारगर, 12 घंटे में ही ठीक हुए मरीज

कोरोना वायरस (Coronavirus) को मात देने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं. कोरोना वायरस के इलाज के लिए हर रोज नई स्टडी सामने आ रही है. कोरोना के इलाज में कारगर बताई जाने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी (Monoclonal Antibody Therapy) का इस्तेमाल अब भारत में भी शुरू हो गया है. इसके शुरुआती नतीजे राहत देने वाले हैं. 

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल के सकारात्मक नतीजे

गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने कोरोना के मरीजों को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी दी. डॉक्टरों के मुताबिक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी (Monoclonal antibody therapy for covid 19) से 12 घंटे के भीतर Covid-19 के दो मरीजों के स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ. सर गंगाराम अस्पताल (SGRH) की मेडिकल डिपार्टमेंट की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर पूजा खोसला ने बताया कि 36 वर्षीय एक स्वास्थ्यकर्मी तेज बुखार, खांसी, मांसपेशी दर्द, बेहद कमजोरी और White Blood Cells की कमी से पीड़ित थे. उन्हें मंगलवार को बीमारी के छठे दिन  मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल दिया गया.

पहले मरीज की तबियत 8 घंटे में सुधरी

डॉक्टर पूजा खोसला ने बताया कि इस तरह के लक्षण वाले मरीज Moderate से सीरियस स्थिति में तेजी से पहुंच जाते हैं. इस मामले में 5 दिन तक मरीज को तेज बुखार रहा और White Blood Cells स्तर 2,600 तक गिर गया था. इसके बाद उन्हें मोनोक्लोनल एंडीबॉडी थेरेपी दी गई, जिसके 8 घंटे बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ. मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल गई.

दूसरा मरीज 12 घंटे के भीतर ठीक हुआ

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, एंटीबॉडी की एक 'कॉपी' है, जो एक विशिष्ट एंटीजन को टारगेट करती है. इस इलाज का इस्तेमाल पहले इबोला और एचआईवी में किया जा चुका है. वहीं, दूसरा मामला 80 वर्षीय मरीज आर के राजदान का है. वह Diabetes और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे और वह तेज बुखार और खांसी के शिकार थे. अस्पताल ने एक बयान में बताया, ‘सीटी स्कैन में हल्की बीमारी की पुष्टि हुई. उन्हें पांचवें दिन REGN-COV2 दिया गया. मरीज के स्वास्थ्य में 12 घंटे के भीतर सुधार हुआ.’

अन्य संक्रमणों का खतरा भी कम होता है

डॉक्टर खोसला ने कहा कि अगर उचित समय पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी का इस्तेमाल होता है, तो यह इलाज में बड़ा बदलाव ला सकता है. इससे ज्यादा खतरे का सामना कर रहे लोगों को अस्पताल में भर्ती करने या उनकी स्थिति को और खराब होने से बचाया जा सकता है. वहीं इससे स्टेरॉयड या इम्यूनोमॉड्यूलेशन के इस्तेमाल को कम किया जा सकता है और इससे बचा जा सकता है. इससे म्यूकरमाइकोसिस या कई तरह के अन्य संक्रमणों का खतरा कम हो जाता है. वहीं डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट संबंधी बीमारियों से ग्रस्त दो Covid-19 के मरीजों पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी का इस्तेमाल किया गया, जिसके एक सप्ताह बाद उनकी रिपोर्ट ‘निगेटिव’ आई.

- अमेरिकी सीनेट ने पास किया चीनी टेक्नॉलजी से निपटने के लिए बिल, तिलमिलाया ड्रैगन

अमेरिका के सीनेट ने चीन और दूसरे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के मद्देनजर अमेरिकी टेक्नॉलजी को मजबूत करने पर केंद्रित विधेयक पारित कर दिया। इस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने कहा कि विधेयक चीन की घरेलू राजनीति पर परोक्ष हमला और इसके विकास को रोकने पर केंद्रित है। चीन की विदेश मामलों की समिति ने एक बयान जारी कर अमेरिकी नवोन्मेष और प्रतिस्पर्धा विधेयक पर 'कड़ी आपत्ति और कड़ा विरोध व्यक्त किया।' अमेरिका के इस विधेयक को मंगलवार को सीनेट ने पारित कर दिया था। चीन ने बयान में कहा, 'अमेरिका के आधिपत्य को बनाए रखने के उद्देश्य से इस विधेयक में मानवाधिकार के बहाने चीन से तथाकथित खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है जिससे कि चीन की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप किया जा सके और चीन को विकास के वैध अधिकार से वंचित किया जा सके।' इसमें कहा गया कि किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि चीन ऐसी किसी चीज को स्वीकार करेगा जो उसकी संप्रभुता, सुरक्षा या विकास हितों को नुकसान पहुंचाती हो। चीन ने विधेयक में ताइवान का समर्थन किए जाने और हांगकांग का जिक्र किए जाने की भी निन्दा की। ताइवान को चीन जहां अपना हिस्सा बताता है, वहीं हांगकांग में उस पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।

 बयान में कहा गया कि ये सभी मुद्दे 'पूरी तरह चीन के आंतरिक मामले हैं और इसमें किसी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।' चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विधेयक में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है जो चीन के विकास पथ को बाधित करने और उसकी घरेलू तथा विदेश नीति में हस्तक्षेप का प्रयास है।

- क्या है वो लसलसी चीज, जिसने Turkey के समुद्र को बुरी तरह से जकड़ लिया है?

तुर्की के मारमरा सागर (Marmara sea) में ऊपर से लेकर नीचे 80 से 100 फीट की गहराई तक सी-स्नॉट (sea snot outbreak in Turkey) जम चुका है. इससे मछलियां मरने लगी हैं, साथ ही हैजा फैलने का डर भी जताया जा रहा है.

अक्सर चीन में उइगर मुस्लिमों पर हो रही हिंसा के खिलाफ चुप्पी को लेकर घेरे में खड़ा तुर्की अब पर्यावरण से जुड़ी समस्या झेल रहा है. वहां के मारमरा सागर को जेली जैसी चीज ने जकड़ लिया है, जिसे सी-स्नॉट भी कहते हैं. पर्यावरण के जानकार अंदेशा जता रहे हैं कि इससे समुद्र के भीतर वनस्पतियों से लेकर मछलियां भारी संख्या में मर जाएंगी. तुर्की के राष्ट्रुपति तैयप रेसेप एर्दोगान (Turkey President Recep Tayyip Erdogan) पर इसे लेकर भारी दबाव है.

कितना अहम है ये समुद्र

तुर्की का मारमरा समुद्र ( Sea of Marmara), काला सागर को एजियन सागर से जोड़ता है. ये वहां के लोगों के लिए लाइफलाइन भी कहलाता है. इसकी सीमा पर तुर्की के पांच राज्यी हैं, साथ ही देश की व्यापारिक राजधानी इस्तांबुल भी यहीं है. ऐसे में जाहिर है कि मारमरा समुद्र से काफी सारी व्यापारिक गतिविधियां होती रहीं. लेकिन अब समुद्र में जेली जैसी चिपचिपा सी-स्नॉट जमा हो गया है, जिससे जहाज या नावों का गुजरना असंभव हो गया है और देश के भीतर व्यापार को काफी नुकसान हो रहा है.

इसे लेकर एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि जल्द से जल्द इसपर काबू न हुआ तो हालात काफी बिगड़ सकते हैं. इधर राष्ट्रपति एर्दोगान ने सी-स्नॉट के लिए शहरों से आए सीवेज को जिम्मेदार ठहरा डाला.

क्या है समुद्र में फैलती ये जेली?

सी-स्नॉट समुद्र में बनने वाला एक लसलसा पदार्थ है. ये तब बनता है जब शैवाल बहुत ज्यादा पोषण पाकर तेजी से बढ़ने लगते हैं. ये कोई बढ़िया स्थिति नहीं, बल्कि शैवालों का बढ़ना समुद्र के लिए काफी खतरनाक है. यहां ये भी जान लें कि समुद्र या कहीं पर भी शैवाल का बढ़ना जल-प्रदूषण का नतीजा है. खुद पर्यावरण के जानकार भी ये मान रहे हैं कि शैवालों का बढ़ना और समुद्र में आई लसलसाहट क्लाइमेंट चेंज और फैक्ट्रियों-घरों की गंदगी पानी में मिलने का नतीजा है.

प्रदूषण हो सकता है वजह

सी-स्नॉट से समुद्र की ऊपरी परत पर भूरी-मटमैली, चिपचिपी परत जम जाती है, जिससे पानी में नावें जहाज या इंसान भी नहीं तैर सकते. ये मोटी झागदार परत अब इस्तांबुल के तटीय इलाकों में फैल चुकी है. इसपर राष्ट्रपति लगातार शहर की आबादी और लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. बता दें कि तुर्की के इस व्यापारिक शहर में लगभग 1.55 करोड़ लोग रहते हैं और आबादी के लिहाज से ये देश का सबसे बड़ा हिस्सा है.

पहले भी आ चुकी है समस्या

साल 2007 में भी सी-स्नॉट दिखा था लेकिन इस बार ये ज्यादा बुरी तरह से फैला हुआ है. देश के इतिहास में ये अब तक की सबसे बड़ी पर्यावरण आपदा मानी जा रही है. समुद्र के ऊपर मोटी परत जम जाने से नीचे मछलियों और वनस्पतियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा, जिसके कारण भारी संख्या में मछलियों समेत कोरल और स्पंज जैसी वनस्पतियां खत्म हो चुकी हैं.

सागर में इतने नीचे तक है परत

ये लसलसा पदार्थ केवल समुद्र के ऊपर लेयर की तरह नहीं रहा, बल्कि नीचे भी जा चुका है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये समुद्र में 80 से 100 फीट नीचे तक फैल गया है. चेतावनी दी जा रही है कि अगर जल्द ही एक्शन न लिया जाए तो ये समुद्र में गहराई तक चला जाएगा, जिससे बाद समुद्री इकोसिस्टम में भारी तबाही मचेगी. अंदेशा तो यहां तक कि इससे प्रभावित जगह के आसपास के सारे सी-एनिमल मारे जाएंगे.

असर समुद्र के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर भी

मछलियां बेचकर गुजारा करने वाले मछुआरे समुद्र में मछलियां पकड़ने जाते तो हैं लेकिन चिपचिपे पदार्थ की मोटी परत में उनके जाल फंसकर फट जाते हैं. इससे मछलियां तो हाथ नहीं आ रहीं, साथ ही महंगे जाल फटने पर नुकसान अलग हो रहा है. मछुआरे शिकायत कर रहे हैं कि सी-स्नॉट की परेशानी लंबे समय से चली आ रही थी, जिसपर गंभीर होने पर ही सरकार का ध्यान गया.

हैजा फैलने का डर जताया जा रहा

इन तमाम परेशानियों के बीच एक जो सबसे गंभीर बात निकलकर आ रही है, वो है गंदे पानी के कारण होने वाली बीमारियां. पर्यावरणविदों को डर है कि पानी का बहाव रुकने के कारण इससे हैजा जैसी खतरनाक बीमारी पूरे इस्तांबुल को चपेट में ले सकती है.

ये उठाए जाएंगे कदम

तुर्की में लगातार उठती मांग के बीच वहां के राष्ट्रपति ने इसे लेकर हाल ही में गंभीरता दिखाई. इंडियन एक्सप्रेस ने बीबीसी के हवाले से बताया कि एर्दोगान ने तुरंत एक्शन की बात की है. मारमरा समुद्र को प्रोटेक्टेड एरिया में बदला जाने वाला है. इसके साथ पानी को साफ करने के लिए वॉटर ट्रीटमेंट होगा ताकि लसलसी परत हट जाए. साथ ही कारखानों और लोगों को प्रदूषण न करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

 

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