Sunday, May 09, 2021

इंटरव्यू

किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए खूब मेहनत करें, अपने आप को इतना तैयार कर लें कि जैसे ही कोई अवसर आप तक आये तो वह आप से कहीं और जा ही न सके: गौरव वाधवा

April 24, 2021 08:18 AM

किसी भी लक्ष्य को पाने के  लिए खूब मेहनत करें, अपने आप को इतना तैयार कर लें कि जैसे ही कोई अवसर आप तक आये तो वह आप से कहीं और जा ही न सके: गौरव वाधवा

सिटी दर्पण ब्युरो, मुंबई, मई 2021: गौरव वाधवा, नाम है भारतीय टेलीविजन के उस लोकप्रिय अभिनेता का जिसे आज उनके करोड़ों फैन्स देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में न केवल फौलो करते हैं बल्कि उनके जैसा बनने का सपना भी देखते हैं। गौरव को आम जनता विभिन्न टी.वी.सीरियल्स-थपकी प्यार की,  ये है मोहब्बतें , ये रिश्ता क्या कहलाता है, सुपर सिस्टर्स - चलेगा प्यार का जादु और 'तेरी लाडली मैं' के अहम किरदारों के रूप में जानती है मगर वे वास्तव में कैसे हैं इसका पता मुंबई में सिटी दर्पण के संवाददाता विनीत मुदगिल ने गौरव के साथ खास बातचीत के दौरान पता करने का प्रयास किया और उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को आप तक पहुंचाने का प्रयास किया है, प्रस्तुत है इस खास भेंटवार्ता के कुछ अंश:-

विनीत: आप राजस्थान से हैं, आप इस इंडस्ट्री में कैसे आये, ऐसा क्या खास था जो आपको इस लाइन में खींच ले आया?

गौरव: जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मैं जयपुर से ताल्लुक रखता हूं। मेरे बड़े भाई साहिब निर्भय वाधवा जी पहले से ही इसी इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं उन्हीं को देख कर मेरा मन भी इसी लाइन में आने को हुआ। वही मेरे आईडल भी हैं वे मेरे आने से पहले से ही टी वी में काम कर रहे थे। जैसे ही मेरी पढ़ाई पूरी हुई, मैने घर वालों को बताया कि मुझे भी मौका दें मैं भी इसी लाइन में जाना चाहता हूं तो इस प्रकार पेरेंट्स की अनुमति लेकर मैं मुंबई चला आया और इस लाइन को करियर के तौर पर अपनाया।

विनीत: क्या यह सच है कि इस इंडस्ट्री में सफलता के लिए आपका कोई गॉडफादर या फिर अच्छे कांटेक्ट्स होने चाहिएं ?

गौरव: नहीं मेरा तजुर्बा कहता है कि ऐसा बिलकुल नहीं होता। जैसे कि  मेरे बड़े भाई साहिब इस इंडस्ट्री में पहले से ही मौजूद थे हालांकि उनका उतना बड़ा नाम नहीं था कि मुझे काम मिल सके मगर बावजूद उनकी मौजूदगी और कांटेक्ट्स के, मुझे खुद से मेहनत करनी पड़ी। जैसे ही मैं मुंबई पहुंचा मैने स्वयं एक हजार से 1200 आॅडीशन दिये, अपने बड़े भाई साहिब से गाइडेंस जरूर ली कि कहां जाऊं कैसे करूं मगर यह भी सच है कि मैं कई बार रिजेक्ट भी हुआ मगर मैनें कभी हार नहीं मानी। मैने अपनी कोशिशें लगातार जारी रखीं और आज मेरा काम आपके सामने है।

विनीत: सुना है एक समय ऐसा भी आया कि आप वापिस जाने की सोचने लगे थे क्या यह सच है?

गौरव: जी हां यह भी सच है।जैसे एक प्वाइंट आता है कि हर कोई हार मान लेता है जब उसे लगातार निराशा हाथ लगती है। हर किसी को अपने आप से कुछ उम्मीदें होती हैं जब वह उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता तो मायूसी हाथ लगती है, दूसरी ओर उम्र भी बढ़ती जाती है,मुझे ही ले लो, मुझे यहां मुंबई में आये हुए 7 साल हो गये हैं। शुरुआत के दिनों के तीन साल मुझे कहीं कोई काम नहीं मिला। तीन साल कहने को हैं मगर जब आप इन्हें जीते हैं तो तीन साल मोर दैन थाउजैंड डेज़ लगते हैं जब मुझे काम नहीं मिला तो सोचा कि क्यूं न मैं वापिस चला जाउं मगर ऊपर वाले की कुछ और ही मर्जी थी मैंने अपना संघर्ष जारी रखा और आज मैं आपके सामने हूं, कहते ही मुस्कुरा दिये गौरव।

विनीत: क्या आप इस जर्नी के दौरान अपना अच्छा बुरा शेयर करना चाहेंगे?

गौरव: बिलकुल जो भी जो मुंबई आते हैं काम ढूंढने के लिए पहला संघर्ष रहने का होता है कई बार हम ज्यादा लोग एक ही कमरा शेयर करते हैं। फाइनेंशियल प्रॉबल्मस तो होती ही हैं। वो हर किसी के साथ होती हैं। मुंबई में सरवाइव करना बहुत मुशिकल होता है। यहां किराये काफी ज्यादा हैं जब भी आपआॅडीशन देने के लिए जाते हैं तो ट्रैवलिंग पर काफी खर्चा हो जाता है तो ये कुछ बेसिक प्रॉबल्मस हुईं। फिर पता लगा कि जब मैं आॅडीशन देने जाता था तो मेरा वजन काफी ज्यादा था मैने अपने वजन पर काफी काम किया, वजन काफी कम किया अपना पहला रोल पाने के लिए क्योंकि जो भी कास्टिंग डायरेक्टर मिलता था तो वह कहता था कि आपका वजन ज्यादा है कैमरे पर काफी ज्यादा दिखते हो मैने मेहनत करना शुरू किया अपने ऊपर काफी काम करना शुरू किया। वजन भी काफी कम किया। मैं तैयार रहा कि जब भी मुझे वो पहला रोल मिले उसे मैं अच्छे से निभा सकूं। मैने काफी मेहनत की है काफी संघर्ष देखे हैं और अब मुझे काफी अच्छा लगता है यह देख कर कि जहां मैं हूं काफी सही से जा रहा हूं।

विनीत: सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' के को-स्टार मोइना सिंह , ऋषि देव और गौरव वाधवा की तीकड़ी इंटरनेट पर काफी हिट रही है और यह तीनों मिलकर रीमोरव नाम का एक यूट्यूब चैनल भी चलाते रहे हैं। आज भी आपका एक अपना यू ट्यूब चैनल है। इसे आप कैसे देखते हैं?

गौरव: यू ट्यूब चैनल मैनें मजे के लिए बना दिया था टाइम पास के लिए, ऐसा नहीं है कि यह मुझे काफी जरूरी था। मैं इसे करियर के तौर पर लेना चाहता हूं। जब यह बन गया तो लोगों को अच्छा लगने लगा। फिर मैने भी महसूस किया और मेरी यह जिम्मेवारी बनती है कि लोग मेरा इंतजार यू ट्यूब पर भी करने लगे हैं मैं उनकी कसौटी पर खरा उतरूं। लोग मुझसे कमेडी की उम्मीद करते हैं उन्हें हंसा पाउं। यह कोई प्लानिंग नहीं थी ऐसे ही बन गया था यह अच्छा चला।

विनीत: आज आपके काफी फैन्स हैं जो यंगस्टर्स हैं और आपके जैसा बनना चाहते हैं आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे?

गौरव: मैं उन्हें केवल यही कहना चाहूंगा कि सिर्फ एक्टिंग फील्ड की बात नहीं कर रहा हूं किसी भी फील्ड में आप जाना चाहते हैं आपको उस फील्ड की अच्छी नॉलेज ले लेनी चाहिए। उस की जगह के बारे में पता कर लेना चाहिए। आपको लक्ष्य पाने के  लिए मेहनत बहुत जरूरी है वह आपके अपने हाथ में है जबकि किसमत और समय आपके हाथ में नहीं है आप अपने आप को इतना तैयार कर लें कि जैसे ही कोई अवसर आप तक आये तो आप से कहीं और जा ही न पाये, जो मैने किया, यह मेरा निजी अनुभव है मैं चाहता हूं आप सब भी यही करें। आप सदैव मोटिवेटिड रहे, अच्छी आदतें रखें और डट कर मेहनत करें।

विनीत: आप का गोल क्या है, आपकी कौन सी ऐसी चीज़ है जो आज भी पाना चाहते हैं?

गौरव: मैं खुश हूं जो कुछ कर रहा हूं, मैं टेलिवीजन में अच्छा कर रहा हूं मैं अब तक 15 रोल कर चुका हूं मेरा गोल है कि मैं बॉलीवुड में जाऊं, मैं अपने आप को थियेटर में देखना चाहता हूं जिसके लिए मुंबई में आया था। मैं सच में खुश हूं कि टेलिवीजन कर रहा हूं आर्टिस्ट का काम होता है आर्ट करना, काम करना, चाहे वह छोटी स्क्रीन हो या फिर बड़ी स्क्रीन। मैं कर रहा हूं अपने काम से खासा खुश हूं। मैं निजी तौर पर चाहता हूं कि मैं अपने आप को एक बार बड़े पर्दे पर देखूं इसके लिए मेहनत जारी है और उम्मीद करता हूं कि आप लोग बड़ी जल्दी मुझे बड़े पर्दे पर भी देखेंगे।

विनीत: आप अपने परिवार के बारे में बतायें, मम्मी पापा के बारे में और जो आपके अजीज्हैं?

गौरव: मेरा परिवार काफी स्पोर्टिव रहा है मम्मी हैं पापा है बड़ा भाई है, कुछ पैट्स हैं पैट्स तो हम मुंबई में भी रखते हैं। मेरा उनके बिना मन नहीं लगता कभी कभी आप लो फील करते हैं तो केवल वही होते हैं जो आपको चियर-अप करते हैं। घर पर नानी नाना जी सभी हमें काफी स्पोर्ट करते हैं तभी तो  मैं और मेरा भाई दोनों यहां तक पहुंच पाये हैं। घर वाले आपको काफी स्पोर्ट करते हैं गर वे आपको स्पोर्ट नहीं भी करते हैं तो आप उन्हें इतना कन्विन्स कर लें, उनसे एक समय मांग लें कि जिसमें वे आपको डट कर स्पोर्ट करें। सुनता हूं बहुत लोगों से कि सर मेरे घर वाले मुझे स्पोर्ट नहीं करते हैं मैं तो एक्टिंग करना चाहता हूं। आप जो आपके घर वाले चाहते हैं पहले वही काम करें फिर उनसे एक्टिंग के लिए खास समय मांग लें और मुंबई एक्टिंग के लिए आ जायें।

विनीत: आपकी लाइक्स-डिस्लाइक्स क्या हैं शेयर करें?

गौरव: गर आप खाने की बात कर रहे हैं तो मैं सब कुछ खाता हूं। हां एक बात जरूर है कि मैं ज्यादातर समय डाइट पर होता हूं और खाने को खासा मिस करता हूं। मुझे जो भी दे दोगे मैं हंस कर खा लूंगा। अलबत्ता खाना अच्छा लगता है मगर डाइट की वजह से सदैव लिमिटेशन में रहता हूं। हां डिस्लाइक के बारे में मुझे लगता है मुंबई में जो कभी कभी बारिश के बाद चिपचिपापन हो जाता है वह मुझे कतई अच्छा नहीं लगता। वैसे आई लाइक एवरी थिंग और मैं किसी भी बात को लेक र कोई पर्टिकुल्लर नहीं हूं मुझे सब कुछ अच्छा लगता है।

गौरव: सिटी दर्पण के बारे में मैं कहना चाहूंगा कि मैं धन्यवाद करता हूं सिटी दर्पण का। आपके साथ वीडियो करके आपको मेरी बात अच्छी लगी होगी आपके श्रोताओं को कुछ तो अच्छा लगा होगा, कुछ जानने को अच्छा लगा, मोटिवेटिड हुए होंगे होप आप सब अच्छा करेंगे।

Have something to say? Post your comment

और इंटरव्यू समाचार