Friday, July 01, 2022
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लेख

संधिशोथ (जोड़ों का दर्द) : डॉ. राजीव कपिला

August 01, 2021 07:16 PM

गति ही जीवन है। शरीर की संधियां, उनकी मांसपेशियां, कंडरा, स्नायु आदि मुख्य रूप से हमें चलने फिरने में सहायता करते हैं। इन अंगों में किसी भी प्रकार की चोट दर्द का कारण बन सकती है। करोड़ों व्यक्ति संधिशोथ के अत्यधिक दर्द व उससे संबंधित रोगों के लक्षणों जिसमें प्रदाह, सूजन, लालिमा, दर्द एवं जकड़न से पीड़ित हैं। यद्यपि संधिशोथ के सौ से भी अधिक प्रकार माने गये हैं पर उनमें से अस्थिसंधिशोथ, आमवात एवं गठिया मुख्य हैं।
अस्थि संधिशोथ के कारण
भाग दौड़ वाली जिंदगी शीघ्र बुढ़ापे की ओर ले जाती है, मोटापा, आनुवंशिक प्रवृत्ति, 70 वर्ष से अधिक आयु के 75 प्रतिशत लोग अस्थि संधिशोथ से पीड़ित हैं, व्यायाम का अभाव, गुम चोट और रजोनिवृत्ति इसके मुख्य कारण हैं।
योग
भारत के 6 दर्शनों में से योग एक महत्वपूर्ण दर्शन है। आध्यात्मिक दृष्टि से योग चित्त की उच्च अवस्था प्राप्त करने का मार्ग है। ऋषि वशिष्ठ के अनुसार योग मन को शांति प्रदान करने का मार्ग है। महर्षि पतंजलि के अनुसार योग समाधि अवस्था की प्राप्ति हेतु यम (नैतिक सिद्धान्त), नियम (अनुशासन) आसन (मुद्राएं), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार (आत्मनिरीक्षण-चित्त को बाह्य मोहमाया में लिप्त रखने वाले क्रिया-कलापों से दूर रखना) धारणा, ध्यान-चित्त की चंचलताओं को शांत करने की एक प्रक्रिया है।
प्राकृतिक चिकित्सा
प्राकृतिक चिकित्सा व्यक्ति को उसके शारीरिक, मानसिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक तलों पर प्रकृत्ति के रचनात्मक सिद्धांतों के अनुकूल निर्मित करने की एक पद्धति है। प्राकृतिक चिकित्सा में स्वास्थ्य संवर्धन, रोगों की रोकथाम एवं रोग निवारण के साथ साथ पुर्नस्थापना कराने की अपूर्व क्षमता विद्यमान है। प्राकृतिक चिकित्सा एक ऐसी विधि है जिसमें उपचार हेतु प्राकृतिक रूप से उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग किया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा उपचारों का एक समूह मात्र नहीं है अपितु एक जीवन शैली है तथा स्वास्थ्य संवर्धन एवं रोगों के उपचार हेतु कार्य करती है। इस लिए इसे सक्रिय जीवन शैली का एक रूप कहा जाता है।
सुझाव
इसके रोगियों को ठंड से बचना चाहिए क्योंकि इससे एंठन और दर्द बढ़ सकते हैं। इसके अलावा सूजन की अवस्था में गर्म सेंक व अन्य गर्म उपचारों से बचना चाहिए। वायु उत्पन्न करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे मीठा आलू, अरबी (रतालू), दालों का सेवन न करें। प्रात: उठते ही गर्म पानी से स्नान, जोड़ों की सिकाई करें ताकि अकड़न खुल जाना जाये।

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