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चंडीगढ़

एकनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, फडणवीस बने डिप्टी सीएम, पवार ने की शिंदे से बात

July 01, 2022 01:03 AM

दर्पण न्यूज़ सर्विस

मुंबई, 30 जूनःमहाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना के बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे ने गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पद एवं गोनीयता की शपथ दिलायी।

राजभवन के दरबार हाल में आयोजित शपथ ग्रहण कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भागवत कराड, रावसाहेब दानवे सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। शपथ ग्रहण के दौरान एकनाथ शिंदे के पिता, पत्नी तथा परिवार के सभी सदस्य भी मौजूद रहे।

एकनाथ शिंदे ने दिवंगत बालासाहेब ठाकरे तथा दिवंगत धर्मवीर आनंद दिघे के नाम की शपथ ली। इसके बाद फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

उल्लेखनीय है कि 10 दिन तक राज्य से बाहर रहने के बाद आज दोपहर में ही एकनाथ शिंदे तथा फडणवीस ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया था। इसके बाद आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में एकनाथ शिंदे के नाम की घोषणा की। फडणवीस ने कहा था कि वे सरकार में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने फडणवीस को राज्य सरकार में शामिल होने के लिए कहा। इसी वजह से उन्होंने आज उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

क्या बीजेपी ने देवेंद्र फडणवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाकर उनके पर कतर दिए?

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी सियासी संग्राम में गुरुवार शाम जो कुछ हुआ है, उसके बाद तमाम राजनीतिक विश्लेषक अचरज में पड़ गए हैं.

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने पहले एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का नया मुख्यमंत्री बनाने का एलान किया.

इसके साथ ही उन्होंने ये भी बता दिया कि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे.

फडणवीस के इस फ़ैसले ने भी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था. लेकिन इसके कुछ देर बाद जो कुछ हुआ, वो और ज़्यादा चौंकाने वाला था.शाम लगभग साढ़े सात बजे एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के साथ-साथ फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली. 

अपने यूटर्न पर क्या बोले फडणवीस

फडणवीस ने इस बारे में एक ट्वीट करके अपना पक्ष रखने की कोशिश की है.

उन्होंने लिखा है, "एक ईमानदार कार्यकर्ता होने के नाते मैं पार्टी के आदेशों का पालन करता हूं. मैं उस पार्टी के आदेशों से ऊपर नहीं हूं जिसने मुझे सर्वोच्च स्थान दिया."

बता दें कि उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने से महज तीन घंटे पहले उन्होंने राजभवन से घोषणा की थी कि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे. लेकिन इसके बाद बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे अलग फ़ैसला लिया.

फडणवीस के सरकार में शामिल नहीं होने की घोषणा के तुरंत बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर लिखा कि, "भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने फ़ैसला किया है कि भाजपा को सरकार का हिस्सा होना चाहिए. इसलिए हमने उनसे देवेंद्र फडणवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाने का अनुरोध किया है."इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा कि, 'देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की सलाह पर सरकार में शामिल होने का फ़ैसला किया है. यह महाराष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा और सेवा भाव को दर्शाता है.'दिलचस्प यह है कि शपथ ग्रहण समारोह से महज आधे घंटे पहले बीजेपी अध्यक्ष ने ट्वीट कर देवेंद्र फडणवीस को कैबिनेट में शामिल होने का आदेश दिया.बीबीसी मराठी ने जब इसकी वजहों के बारे में न्यूज-18 के मुंबई ब्यूरो प्रमुख विनय देशपांडे से पूछा तो उन्होंने कहा, "बीजेपी जैसी पार्टी इस तरह काम नहीं करती. बीजेपी में सारे फ़ैसले बंद दरवाजे़ में होते हैं और फिर नेता आगे आकर उनकी घोषणा करते हैं."

फडणवीस के पर कतरने की कोशिश?

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ड्रामा क्वीन

समाप्त

वहीं, नागपुर से प्रकाशित मराठी दैनिक लोकमत के कार्यकारी संपादक श्रीमंत माने का कहना है कि यह देवेंद्र फडणवीस के क़द को कमतर करने जैसा है.

वे कहते हैं, ''यह फडणवीस के पंख कतरने की कोशिश है. फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की दौड़ से हटने के बारे में कह कर अपनी छवि को बेहतर किया लेकिन शायद केंद्रीय नेतृत्व को यह पसंद नहीं आया."

बीबीसी मराठी ने वरिष्ठ पत्रकार दीपक भातूसे से पूछा कि नड्डा के मीडिया में आने और इसकी घोषणा करने का क्या मतलब है.

उन्होंने कहा, "फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे. उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस की ख़बर पूरे देश में फैल गई. हर जगह यही संदेश गया कि फडणवीस कैबिनेट में नहीं होंगे. इसलिए केंद्रीय नेतृत्व को मीडिया में आना पड़ा. केंद्रीय नेतृत्व ने फडणवीस से फोन पर बात की होगी, उन्हें सरकार में शामिल होने के लिए कहा होगा."

लेकिन दीपक भातूसे उस सवाल की ओर इशारा करते हैं जो अभी देश में हर नागरिक के जे़हन में है.

वे कहते हैं, "लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और फडणवीस के बीच कोई तालमेल नहीं है? फडणवीस सरकार में शामिल नहीं होने का इतना बड़ा फ़ैसला ले रहे हैं और उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को इसके बारे में सूचित क्यों नहीं किया, यह भी एक बड़ा सवाल है."

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