भारत की आर्थिक वृद्धि ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया है। नवीनतम तिमाही आंकड़ों में GDP ने उम्मीद से कहीं अधिक छलांग लगाई, जिससे देश के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को नई गति मिली है। लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत का यह प्रदर्शन विशेषज्ञों के लिए भी सुखद आश्चर्य रहा। विश्लेषकों का कहना है कि तीन प्रमुख कारकों ने इस उछाल को मजबूती दी है—घरेलू खपत में वृद्धि, औद्योगिक उत्पादन का तेज़ होना और सरकारी निवेश में बड़ा विस्तार।
पहला बड़ा कारण घरेलू मांग की मजबूत वापसी है। त्योहारों के सीजन और शहरी-ग्रामीण दोनों इलाकों में उपभोक्ता खर्च में उल्लेखनीय बढ़त देखी गई। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, FMCG और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में बिक्री में तेजी आई है। बढ़ती खपत ने न केवल उत्पादन को गति दी, बल्कि रोजगार और सेवा क्षेत्र को भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाया।
दूसरा कारक है मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के प्रभाव से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल, मोबाइल निर्माण और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रिकॉर्ड स्तर का विस्तार दर्ज हुआ। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में तेजी ने साफ संकेत दिया है कि भारतीय उद्योग महामारी के बाद अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुका है। निर्यात में सुधार और आपूर्ति श्रृंखला के स्थिरीकरण ने भी इस वृद्धि को बल दिया।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण है सरकारी पूंजीगत निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि। बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर खर्च—सड़कों, रेल, बंदरगाहों, एयरपोर्ट और डिजिटल कनेक्टिविटी—ने आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा दी है। राज्यों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने और निजी निवेश को आकर्षित करने वाली नीतियों ने विकास के कई नए अवसर खोले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निवेश आने वाले वर्षों में और भी बड़े आर्थिक लाभ देगा।
भारत की GDP वृद्धि ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का ध्यान भी आकर्षित किया है। कई वैश्विक रिपोर्टों में भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताया जा रहा है। युवाओं की बढ़ती भागीदारी, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार और डिजिटल अर्थव्यवस्था की तीव्र प्रगति ने आर्थिक आधार को और मजबूत किया है।
वर्तमान गति को देखते हुए, भारत का 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य अब पहले से अधिक वास्तविक और प्राप्त करने योग्य माना जा रहा है। देश की आर्थिक रफ़्तार स्पष्ट संदेश दे रही है—भारत विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है।