यूक्रेन में भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रपति कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ, जिन्हें देश का दूसरा सबसे ताकतवर व्यक्ति माना जाता है, के घर और उनके करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की गई। जांचकर्ताओं ने उन पर लगभग 800 करोड़ रुपये के गबन, फर्जी अनुबंध तैयार करने और सरकारी परियोजनाओं में धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। लगातार बढ़ते दबाव और शुरुआती जांच में उभरे तथ्यों के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी यूक्रेन की नेशनल एंटी-करप्शन एजेंसी (NABU) और अभियोजन विभाग की संयुक्त टीम ने की। टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि कई वर्षों से सरकारी विकास कार्यक्रमों के फंड को निजी ठिकानों पर स्थानांतरित करने की सुनियोजित साजिश चल रही थी। इस ऑपरेशन में वित्तीय दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, विदेशी मुद्रा और कई संदिग्ध अनुबंध जब्त किए गए। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सरकारी निर्माण परियोजनाओं और रक्षा सामग्रियों की खरीद में भारी अनियमितताएं हुईं, जिनका सीधा फायदा कुछ चुनिंदा लोगों को मिला।
चीफ ऑफ स्टाफ पर आरोप है कि उनके प्रभाव और हस्तक्षेप से संबंधित ठेकों को मंजूरी दी गई और भुगतान के बदले रकम को कई शेल कंपनियों के माध्यम से बाहर भेजा गया। हालांकि उन्होंने आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव बढ़ने के कारण इस्तीफा देना पड़ा। उनके पद छोड़ने के बाद यह मामला देश की संसद और राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस का विषय बन गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब यूक्रेन युद्ध की मार झेल रहा है और देश को अंतरराष्ट्रीय सहायता की बेहद जरूरत है। वैश्विक सहयोगी देश, खासकर यूरोपीय संघ और अमेरिका, पहले ही यूक्रेन से पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की मांग कर चुके हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि इतने उच्च पद पर बैठे व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के आरोप लगना यूक्रेनी सरकार की छवि के लिए बड़ा झटका है। इससे विदेशी सहायता और निवेश पर भी असर पड़ सकता है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि किसी भी भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच एजेंसियों को निष्पक्ष व स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि युद्धकाल के बावजूद, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस प्रकरण के बाद अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी निगाहें टिक गई हैं, और आशंका है कि आने वाले दिनों में और भी छापेमारियां हो सकती हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला आने वाले समय में यूक्रेन की आंतरिक राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। देश पहले ही संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों और सरकारी ढांचे पर दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार का उजागर होना न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दिखाता है, बल्कि सुधारों की जरूरत को भी तीखा कर देता है।
चीफ ऑफ स्टाफ के इस्तीफे के साथ यह प्रकरण एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है, लेकिन जांच के आगे बढ़ने से और बड़े खुलासे संभव हैं।