प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा अल नीनो (El Niño) वर्ष 2026 के अंत तक असाधारण रूप ले सकता है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के ताजा अनुमान के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान बहुत शक्तिशाली अल नीनो बनने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक है, जबकि इसके ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत होने की संभावना 69 प्रतिशत बताई गई है।
अल नीनो की स्थिति तब बनती है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों का समुद्री जल सामान्य से काफी अधिक गर्म हो जाता है। इसका प्रभाव केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों के मौसम और वर्षा चक्र को प्रभावित करता है।
भारत के लिए क्यों चिंता की बात?
भारत में अल नीनो का सबसे बड़ा संभावित प्रभाव दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ सकता है। आमतौर पर मजबूत अल नीनो भारतीय मानसून को कमजोर करने और वर्षा में कमी लाने की प्रवृत्ति रखता है। इस वर्ष 7 अगस्त तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम रही है और मौसम विशेषज्ञों ने पश्चिमी, मध्य तथा दक्षिणी हिस्सों में अगले कुछ सप्ताह मानसून कमजोर पड़ने की आशंका जताई है।
कम बारिश का सीधा असर कृषि, जल संसाधन, खाद्य उत्पादन और महंगाई पर पड़ सकता है। खासकर वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए लंबे शुष्क दौर की चुनौती बढ़ सकती है। कपास, सोयाबीन, मक्का और दलहन जैसी फसलों पर मौसम की अनिश्चितता का असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, अल नीनो का मतलब यह नहीं है कि पूरे भारत में निश्चित रूप से सूखा पड़ेगा। इंडियन ओशन डाइपोल (IOD), क्षेत्रीय मौसम प्रणालियां और जलवायु परिस्थितियां इसके प्रभाव को कम या बढ़ा सकती हैं। इसलिए आने वाले महीनों में मौसम विभाग के अपडेट भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।