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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर सामाजिक न्याय के बेहतर कार्यान्वयन के लिए चंडीगढ़ में तीन-दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर 'अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब' का शुभारंभ किया

April 28, 2026 09:02 AM

पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने चंडीगढ़ में राष्ट्रीय चिंतन शिविर का उद्घाटन किया

सामाजिक न्याय भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार का केंद्र है और इसमें सबसे गरीब और सबसे वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए: राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया

विकसित भारत 2047 का निर्माण समाज के अंतिम छोर के लाभार्थी के लिए गरिमा, सुलभता और निरंतरता की नींव पर होना चाहिए:डॉ. वीरेंद्र कुमार

यह चिंतन शिविर केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि कार्यान्वयन योग्य परिणामों और ठोस सिफारिशों के लिए है: श्री बी. एल. वर्मा

चिंतन शिविर में समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0, सेतु और स्माइल बेगरी ऐप का शुभारंभ

चिंतन शिविर में मादक द्रव्यों के सेवन से निपटने में जमीनी स्तर पर प्रयासों के लिए नशा मुक्ति मित्रों को सम्मानित किया गया

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर भारत में सामाजिक न्याय के बेहतर कार्यान्वयन के उद्देश्य से आज चंडीगढ़ में तीन-दिवसीय 'राष्ट्रीय चिंतन शिविर' का शुभारंभ किया। पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक, श्री गुलाब चंद कटारिया तथा केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा संयुक्त रूप से इस शिविर का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा भी उपस्थित रहे। "अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत @ 2047" थीम पर आयोजित इस शिविर में अंतिम छोर के कार्यान्वयन, तकनीक-आधारित गवर्नेंस और वंचित समुदायों के समावेशी सशक्तीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इस गरिमामयी अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा; हरियाणा सरकार के सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण और अंत्योदय मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी; दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण और सहकारिता मंत्री श्री रविंदर इंद्रराज सिंह; मिजोरम सरकार की समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री पी. लालरिनपुई; और उत्तर प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन अधिकारिता मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर, पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने मंत्रालय की प्रमुख पहलों, प्रमुख योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस दौरान केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए, पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि राष्ट्रीय चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सामाजिक न्याय और अधिकारिता के प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और समावेशी विकास की दिशा में सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि सामाजिक न्याय भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार के मूल में है और "अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत @ 2047" का संकल्प तभी साकार हो सकता है, जब नीतियों और गवर्नेंस के केंद्र में सबसे गरीब और सबसे वंचित वर्गों की चिंताओं को रखा जाए।

श्री कटारिया ने कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन, केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच घनिष्ठ समन्वय, और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ बिना किसी भेदभाव या देरी के प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुँचे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह चिंतन शिविर सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने, समाज की मुख्यधारा से उपेक्षा और अभाव जैसी चुनौतियों से निपटने और जमीनी स्तर पर गरिमा, समावेश और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक एवं समयबद्ध सिफारिशों का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण तब तक साकार नहीं हो सकता जब तक समाज के हर  वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा में न लाया जाए। उन्होंने समावेशी नीतियों, अवसरों तक समान पहुँच और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राष्ट्र की विकास यात्रा में कोई भी पीछे न छूटे।

अपने उद्घाटन भाषण में, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि यह चिंतन शिविर नीति-निर्माताओं और प्रशासकों की कोई सामान्य बैठक नहीं है, बल्कि यह विचारों, प्रतिबद्धता और साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों का एक सामूहिक मंच है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण न्याय, समानता, गरिमा और अवसर की नींव पर टिका है। उन्होंने आगे कहा कि समावेशी विकास को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रगति का लाभ उन लोगों तक पहुँचे जो ऐतिहासिक रूप से समाज के अंतिम छोर पर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शिविर के दौरान नीतिगत विचार-विमर्श तीन मुख्य स्तंभों — सम्मानजनक जीवन, बाधा-मुक्त पहुँच और निरंतरता द्वारा निर्देशित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे वह शिक्षा की आकांक्षा रखने वाला कोई छात्र हो, देखभाल की अपेक्षा रखने वाला कोई वरिष्ठ नागरिक हो या आत्मनिर्भरता के लिए प्रयासरत कोई दिव्यांग व्यक्ति हो, सार्वजनिक नीति को केवल कल्याण से आगे बढ़कर सशक्तीकरण की ओर बढ़ना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी व्यवस्थाएं मानवीय, संवेदनशील और समावेशी हों।

बाधा-मुक्त सुगमता और निरंतरता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि जनता के लिए बनाई गई योजनाओं के लाभ केवल नीतिगत दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि बिना किसी प्रक्रियात्मक बाधा के अंतिम छोर के लाभार्थी तक पहुँचने चाहिए। उन्होंने तकनीक-आधारित और एकीकृत दृष्टिकोणों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरल छात्रवृत्ति प्रणाली, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेवाओं की सुलभता और वंचित युवाओं के लिए सहायक संरचनाएं, दीर्घकालिक और परिवर्तनकारी सशक्तीकरण के आवश्यक तत्व हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा ने कहा कि यह चिंतन शिविर माननीय प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जिसके तहत केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कल्याणकारी योजनाओं के वितरण को मजबूत करने के लिए एक टीम के रूप में एक साथ आते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय को केंद्र में रखकर "विकसित भारत @ 2047" के सरकार के संकल्प को साकार करता है और प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों के लिए समानता, गरिमा और समावेश सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। श्री वर्मा ने रेखांकित किया कि मंत्रालय बेहतर ढंग से तैयार की गई नीतियों, लक्षित कार्यक्रमों और प्रभावी सेवा वितरण तंत्र के माध्यम से इस विजन को ठोस परिणामों में बदलने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

श्री वर्मा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सामाजिक न्याय के क्षेत्र में मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकताएं वंचितों तक पहुँचना, सेवाओं की सुगमता में सुधार करना, प्रक्रियाओं का सरलीकरण और लाभार्थी-केंद्रित शासन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर का खाका केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि विषयगत सामूहिक कार्यों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने और कार्यान्वयन योग्य परिणामों तथा ठोस सिफारिशों तक पहुँचने के लिए तैयार किया गया है।

विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि शासन का मूल मंत्र अंतिम व्यक्ति का उदय है। उन्होंने जोर दिया कि यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विकास को समावेशी और धरातल पर परिवर्तनकारी बनाने का एक संकल्प है।

दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग की सचिव सुश्री वी. विद्यावती ने कहा, "विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण 'समावेशी भारत' के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता है। एक ऐसा भारत, जहाँ दिव्यांगजनों सहित समाज के सभी वर्गों को पूर्ण रूप से सम्मिलित किया जाए और विकास के सभी पहलुओं में भागीदारी के लिए उन्हें सशक्त बनाया जाए।

उद्घाटन सत्र का एक मुख्य आकर्षण कई डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ज्ञान संसाधनों का शुभारंभ था, जिनका उद्देश्य सुगमता, पारदर्शिता और सेवा वितरण को मज़बूत करना है। इनमें सशक्तिकरण और सामाजिक सद्भाव के विभिन्न क्षेत्रों के लिए एकल पहुँच तंत्र के रूप में 'समावेश' पोर्टल; 'नशा मुक्त भारत अभियान' को सुदृढ़ करने के लिए एनएमबीए 2.0 ऐप; छात्रवृत्ति-संबंधी सेवाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए 'सेतु' ऐप और कमजोर वर्गों तक पहुँच बनाने तथा उनके पुनर्वास के लिए 'स्माइल' ऐप शामिल थे।

इस अवसर पर, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संस्थागत देखभाल, पुनर्वास ढांचे और सेवा की गुणवत्ता को मजबूत करने में सहायता प्रदान करने के लिए 'डिमेंशिया केयर होम्स के लिए न्यूनतम मानक' और 'भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के लिए आश्रय गृह' पर एक प्रकाशन भी जारी किया गया। इसके अतिरिक्त, सामाजिक क्षेत्र में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और अनुसंधान पहलों के विस्तार के लिए राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (एनआईएसडी) और भागीदार संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 'नशा मुक्ति मित्रों' को गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान, नशाखोरी के विरुद्ध जागरूकता फैलाने और उससे निपटने की दिशा में उनके सराहनीय प्रयासों तथा ज़मीनी स्तर पर दिए गए योगदान की पहचान के रूप में दिया गया। उनके समर्पण और सक्रिय भागीदारी को एक नशामुक्त समाज के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।

यह चिंतन शिविर अगले दो दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता कार्यक्रमों के वितरण को सुदृढ़ करने हेतु व्यावहारिक सिफारिशों पर केंद्रित विषयगत चर्चाएं, ब्रेकआउट सत्र और समूह प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएंगी।

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