मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है, क्योंकि 5 मई के आसपास स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ क्षेत्र में ईरान द्वारा हमलों के दोबारा शुरू होने की खबरें सामने आई हैं। यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। ऐसे में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में ईरान ने ड्रोन, मिसाइल और छोटे नौसैनिक जहाजों के जरिए कई हमले किए हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने आरोप लगाया है कि उसके तेल टैंकर और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया, हालांकि कई हमलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने विफल कर दिया।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब संयुक्त राज्य अमेरिका इस जलमार्ग को फिर से खोलने और फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई छोटी नौकाओं को नष्ट किया, जो व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रही थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताजा टकराव पहले से जारी संघर्ष और अस्थायी युद्धविराम के कमजोर होने का संकेत है। फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद से ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और उसने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति कोई भी विदेशी सैन्य जहाज यहां प्रवेश करता है तो उसे निशाना बनाया जाएगा।
इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में तेजी आई है, क्योंकि निवेशकों को सप्लाई बाधित होने का डर सताने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 5-6 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है।
वहीं, कई शिपिंग कंपनियां अभी भी इस मार्ग का उपयोग करने से हिचकिचा रही हैं, जिससे सैकड़ों जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि जहाजों पर मौजूद कर्मचारियों के लिए भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर जहां अमेरिका समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान अपने नियंत्रण को बनाए रखने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।