भारतीय फिल्म सेक्टर में अवसरों और चुनौतियों की पड़ताल के लिए एक उच्च-स्तरीय अध्ययन समूह भी बनाया गया
डेवलपमेंट, कम्युनिकेशन एंड डिसेमिनेशन ऑफ फिल्मिक कंटेंट (डीसीडीएफसी) स्कीम के तहत, सरकार रीजनल फिल्मों के प्रोडक्शन के लिए वित्तीय सहायता देती है। इन प्रयासों से महाराष्ट्र समेत पूरे देश के फिल्म निर्माताओं को लाभ होता है और ये भारत के फिल्म इकोसिस्टम को मजबूत करने और इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में मदद करते हैं।
सरकार ने भारतीय फिल्म इकोसिस्टम को मजबूत करने और भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए कई पहलें भी की हैं। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) के जरिए ऐसे फिल्म निर्माताओं को वित्तीय सहायता दी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रचार और मार्केट तक पहुंच को आसान बनाने के लिए, सरकार बड़े अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव और फिल्म मार्केट में भारतीय फिल्म निर्माताओं की भागीदारी का समर्थन करती है। मंत्रालय की ओर से भारतीय सिनेमा का प्रचार करने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के अवसर तैयार करने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) जैसे इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जाता है।
इसके अलावा, विदेश में भारतीय मिशन को भारतीय सिनेमा को बढ़ावा देने तथा भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म इंडस्ट्री के बीच जुड़ाव को आसान बनाने के मकसद से कार्यक्रम आयोजित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। ऐसी कोशिशों में वेव्स बाज़ार, वर्क-इन-प्रोग्रेस लैब्स, व्यूइंग रूम, फिल्म मार्केट और अंतरराष्ट्रीय सह-उत्पादन को आसान बनाने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म भारतीय फिल्म निर्माताओं को परियोजना विकास समर्थन, नेटवर्किंग के मौके और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच प्रदान करते हैं।
महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े फिल्म प्रोडक्शन हब में से एक बना हुआ है, जहां विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं मौजूद हैं। दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी (फिल्म सिटी), गोरेगांव मुंबई में है। भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई), पुणे, और भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी), मुंबई जैसे संस्थान इस सेक्टर के क्षमता निर्माण में मदद करते हैं। इनके अलावा, निजी क्षेत्र की प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाओं का एक बड़ा नेटवर्क भी मुंबई, पुणे और नासिक में काम कर रहा है।
फिल्म सेक्टर से जुड़े मामलों की जांच करने के लिए, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय अध्ययन समूह बनाया है। इस समूह की रिपोर्ट के आधार पर, आगे की नीति बनाई जाएगी।
सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में डॉ. अमोल रामसिंह कोल्हे द्वारा उठाए गए एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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