केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में रिक्तियों का उत्पन्न होना और उनका भरा जाना एक सतत प्रक्रिया है। रिक्तियां पदोन्नति, सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र, मृत्यु, नए संस्थानों, योजनाओं या परियोजनाओं की शुरुआत तथा मौजूदा संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि और क्षमता विस्तार के कारण अतिरिक्त आवश्यकताओं के चलते उत्पन्न होती हैं।
शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय होने के कारण, देश के अधिकांश विद्यालय संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैं।
अगस्त 2021 में शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों (सीएचईआई) से अनुरोध किया गया था कि वे मिशन मोड में अपने संस्थानों में लंबित रिक्तियों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाएं। सीएचईआई ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सहित रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए।
सितंबर 2022 में शिक्षा मंत्रालय ने सभी सीएचईआई से मिशन मोड में रिक्तियों को भरने का आग्रह किया था। अक्टूबर 2025 में सभी सीएचईआई को एक बार फिर मिशन मोड में सभी लंबित रिक्तियों को भरने के लिए अनुरोध किया गया।
सितंबर 2022 से सभी सीएचईआई ने रिक्तियों को भरने के लिए मिशन मोड भर्ती अभियान चलाए हैं। 23.05.2026 तक (अर्थात अंतिम रोजगार मेले की तिथि तक) सभी सीएचईआई द्वारा मिशन मोड में कुल 32,114 पद भरे गए हैं, जिनमें 18,757 संकाय पद शामिल हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 का कार्यान्वयन एक सतत और निरंतर प्रक्रिया है। शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न स्वायत्त संगठन नीति के प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रहे हैं और प्राप्त प्रगति का नियमित मूल्यांकन कर रहे हैं।
एनईपी 2020 ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष रूप से भौतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को प्राथमिकता देती है। इसके अंतर्गत नए भवनों का निर्माण, अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था, सुविधाओं का उन्नयन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बाधा रहित पहुंच तथा बेहतर स्वच्छता और साफ-सफाई की व्यवस्था शामिल है।
समग्र शिक्षा, पीएम-श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) और पीएम-ऊषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) सहित कई पहलें सुरक्षित और समावेशी बुनियादी ढांचे तथा सीखने के वातावरण के निर्माण में योगदान दे रही हैं। इसी प्रकार, पीएम-पोषण और पीएम-विद्यालक्ष्मी जैसी पहलें विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए पोषण और वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं तथा विद्यार्थियों के नामांकन और बने रहने को सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती हैं।
सभी 36 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों और स्वायत्त निकायों द्वारा दीक्षा (डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग) को अपनाने, 200 पीएम ई-विद्या डीटीएच टीवी चैनलों और रेडियो सेवाओं के संचालन, निष्ठा (नेशनल इनिशिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स होलिस्टिक एडवांसमेंट) के अंतर्गत शिक्षकों के बड़े स्तर पर क्षमता निर्माण, भारतीय सांकेतिक भाषा सामग्री, प्रशस्त 2.0 और सुलभ शिक्षण संसाधनों के माध्यम से समावेशी डिजिटल शिक्षा के विस्तार तथा समग्र शिक्षा के अंतर्गत आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) घटक के तहत डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीक आधारित शिक्षण को मजबूत करने के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है।
इन पहलों की नियमित समीक्षा की जाती है, ताकि एनईपी 2020 के उद्देश्यों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
समग्र शिक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। इस योजना के अंतर्गत विद्यालयों के भौतिक और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
पिछले पांच वर्षों के दौरान समग्र शिक्षा के अंतर्गत आवंटित और उपयोग की गई निधियों का विवरण निम्नानुसार है:
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वित्तीय वर्ष
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केंद्रांश आवंटित (लाख रुपये में)
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प्रबंधन (PRABANDH) के अनुसार राज्यांश सहित व्यय (लाख रुपये में)
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2021-22
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34,67,173.25
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43,56,183.43
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2022-23
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44,49,394.26
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51,95,854.48
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2023-24
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45,64,755.29
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57,13,287.32
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2024-25
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47,46,073.05
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56,69,470.92
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2025-26
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47,67,633.57
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58,54,423.27
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कुल
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2,19,95,029.42
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2,67,89,219.41
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ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष रूप से डिजिटल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने कई पहलें शुरू की हैं।
लगभग सभी जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी), जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, को स्मार्ट कक्षाओं, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, कंप्यूटर, लैपटॉप और टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरणों तथा विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी से सुसज्जित किया गया है, ताकि डिजिटल शिक्षण को सुगम बनाया जा सके।
दीक्षा (डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग), पीएम ई-विद्या, ई-पाठशाला, साथी (सेल्फ-असेसमेंट, टेस्ट एंड हेल्प फॉर एंट्रेंस एग्जाम्स), स्वयम् प्लस (स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव-लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स), स्वयम् एमओओसी (मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज), एनआईओएस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) पोर्टल, यूट्यूब चैनल, पीएम ई-विद्या डीटीएच चैनल, मुक्ता विद्या वाणी रेडियो, तारा (टीचर्स असिस्टेंट फॉर रीडिंग असेसमेंट) ऐप, समागम पोर्टल और प्रशस्त (प्री-असेसमेंट होलिस्टिक स्क्रीनिंग टूल) ऐप जैसे प्लेटफॉर्मों के व्यापक उपयोग के माध्यम से भी डिजिटल शिक्षण को मजबूत किया गया है।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।