Wednesday, September 02, 2026
BREAKING
Horoscope Today: दैनिक राशिफल 02 सितंबर, 2026 आतंकवाद पर मोदी की दो-टूक: शहबाज़ शरीफ की मौजूदगी में एससीओ मंच से कड़ा संदेश Horoscope Today: दैनिक राशिफल 01 सितंबर, 2026 प्रधानमंत्री श्री मोदी को उज़्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं को दिया जाना वाला सर्वोच्च सम्मान ‘‘ओली दाराजली दोस्तलिक’’ दिया गया उपराष्ट्रपति सजावटी मछली पालन के विस्‍तार के लिए रणनीतिक कार्ययोजना “मिशन रंगीन मछली 2031” जारी करेंगे श्री राजनाथ सिंह और श्री योगी आदित्‍यनाथ ने लखनऊ छावनी में 100 करोड़ रुपये से अधिक की 14 विकास परियोजनाओं के लिए भूमि पूजन किया नीट-पीजी 2026 का देश भर में मजबूत सुरक्षा और तत्क्षण निगरानी के साथ सफलतापूर्वक आयोजन किया गया 3000 लापता, सुरंग में सिर्फ एक पाइप की सांस — नेपाल-तिब्बत में मौत का तांडव Horoscope Today: दैनिक राशिफल 31 अगस्त, 2026 प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान के युवा मित्रों के उत्साह पर खुशी व्यक्त की

चंडीगढ़

France: पेरिस ओलंपिक से पहले फ्रांस के चुनाव नतीजों ने पैदा किया गतिरोध, असल चुनौतियां अब

July 10, 2024 07:23 AM

सिटी दर्पण

फ्रांस, 09 जुलाईः सोमवार की सुबह फ्रांस दक्षिणपंथियों के प्रभुत्व वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि इटली की तरह एक ऐसे देश के रूप में जगा, जहां मुश्किल जोड़-तोड़ के जरिये ही सही, आखिरकार एक व्यावहारिक गठबंधन सरकार बन सकती है। फ्रांस ने संसदीय चुनाव में मरीन ली पेन की प्रवासन-विरोधी पार्टी नेशनल रैली को नकार दिया है, जो राष्ट्रवादी कारनामों के प्रति उनके गहरे प्रतिरोध का एक और प्रदर्शन था।

फ्रांस की जनता ने अपनी पहली पसंद के रूप में फिर से उठ खड़े हुए वामपंथ को चुना जरूर है, लेकिन वह भी सरकार बनाने से काफी दूर है। इन स्थितियों ने मैक्रों को मजबूर कर दिया है कि वे सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति के बजाय संसद की भी सुनें। पेरिस ओलंपिक का बिगुल बजने में अब तीन हफ्ते से भी कम समय बचा है। अगस्त में समुद्र तटों या पहाड़ों पर जाना फ्रेंच जीवन-शैली की पहचान है। ऐसे में, यही लगता है कि सरकार के गठन की बातचीत शरद ऋतु तक खिंच सकती है, जब फ्रांस को बजट पारित करने के लिए सरकार की जरूरत होगी।

फिलहाल फ्रांस में चुनाव के नतीजों ने एक गतिरोध तो पैदा कर ही दिया है। एक उभरता हुआ और विवादास्पद वामपंथी गठबंधन न्यू पॉपुलर फ्रंट नेशनल असेंबली में 180 सीटें जीतकर पहले स्थान पर है। उसने तुरंत ही मांग की कि राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों को उसे सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए। साथ ही उसने यह भी कहा है कि वह अगले हफ्ते अपने पसंदीदा प्रधानमंत्री का नाम सामने रखेगा।

संविधान के अनुसार, मैक्रों ही प्रधानमंत्री का चुनाव करेंगे। 577 सदस्यीय नेशनल असेंबली में न्यू पॉपुलर फ्रंट को बहुमत से करीब 100 सीटें कम हैं। उसकी जीत के पीछे सिर्फ वामपंथी गठबंधन नहीं था, बल्कि दूसरे चरण के मतदान में मध्यमार्गियों और वामपंथियों द्वारा नेशनल रैली के खिलाफ 'रिपब्लिकन मोर्चा' बनाने के निर्णय का असर भी दिखा था। इसके बावजूद, जुझारू वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेनचॉन ने कहा है कि वह संभावित गठबंधन सहयोगियों से बातचीत नहीं करेंगे, न ही वामपंथी कार्यक्रम में जरा भी बदलाव करेंगे। फ्रांस में राष्ट्रपति शासन प्रणाली के कारण गठबंधन बनाने संबंधी समझौते की कोई संस्कृति नहीं है। मैक्रों को अब राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर भिन्न विचारों वाले दलों के बीच व्यापक रूप से सहमत एजेंडे पर श्रमसाध्य बातचीत की बारीकियों को समझना होगा। उदाहरण के लिए, न्यू पॉपुलर फ्रंट सेवानिवृत्ति की उम्र को 64 से घटाकर 60 करना चाहता है, जबकि एक साल पहले ही मैक्रों ने काफी संघर्ष के बाद इसे 62 से बढ़ाकर 64 कर दिया था।

मैक्रों बजट घाटे को कम करने को प्राथमिकता देना चाहते हैं, जबकि न्यू पॉपुलर फ्रंट न्यूनतम वेतन बढ़ाना चाहता है और ऊर्जा व गैस की कीमतों को स्थिर रखना चाहता है। मैक्रों की सरकार ने इस साल की शुरुआत में एक आव्रजन विधेयक पारित किया था, जिसके तहत विदेशियों को फ्रांस में काम करने, रहने और पढ़ने की अनुमति देने वाले नियमों को सख्त बनाया गया था। जबकि, वामपंथियों ने शरण प्रक्रिया को और अधिक उदार बनाने का संकल्प लिया है।
नेशनल असेंबली का तीन बड़े गुटों-वामपंथी, मध्यमार्गी और दक्षिणपंथी-में विभाजन, किसी व्यावहारिक गठबंधन के लिए तत्काल कोई आधार प्रदान नहीं करता। मैक्रों के मध्यमार्गी गुट के पास लगभग 160 सांसद हैं, जो पहले 250 थे, तथा नेशनल रैली और उसके सहयोगियों के पास लगभग 140 सांसद हैं, जो पहले 89 थे। फ्रांस ने एक बार फिर अति दक्षिणपंथियों को सत्ता से दूर रखा, लेकिन आप्रवासन और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के प्रति गुस्से के कारण दक्षिणपंथियों को सिरे से खारिज भी नहीं किया है। प्रधानमंत्री गैब्रियल अट्टल के साथ सोमवार को बातचीत के बाद मैक्रों ने उनसे देश की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए फिलहाल पद पर बने रहने के लिए कहा है।

मैक्रों का कार्यकाल सीमित है और उन्हें 2027 में पद छोड़ना होगा। वह पिछले कुछ दिनों से ज्यादातर चुप हैं, जो असामान्य बात है। हालांकि उनकी पार्टी एक-तिहाई सीटें गंवा चुकी है, लेकिन उनकी वैसी हार नहीं हुई, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। अपमानित होने से वह बच गए। यह कोई छोटी बात नहीं है। अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह किसी गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने के लिए विभिन्न दलों से आराम से परामर्श करेंगे। राष्ट्रपति के समक्ष दो चुनौतीपूर्ण विकल्प हैं। एक तो नेशनल रैली के साथ शासन करना, जिसके युवा पार्टी नेता जॉर्डन बार्डेला प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और दूसरे मेलेनचॉन की पार्टी के साथ सरकार बनाना, जिस पर मैक्रों ने यहूदी विरोधी होने का आरोप लगाया है। वह समाजवादियों और ग्रीन्स के साथ-साथ मुख्यधारा के रूढ़िवादियों सहित उदारवादी वामपंथियों को गठबंधन में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश करेंगे।

पिछले महीने यूरोपीय संसद के चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के सफल अभियान का नेतृत्व करने वाले ग्लक्समैन ने कहा, 'हम एक विभाजित असेंबली में हैं, और इसलिए हमें बचकाने व्यवहार से बचना होगा। इसका मतलब है कि हमें बात करनी होगी, संवाद में शामिल होना होगा और यह मानना होगा कि नेशनल असेंबली सत्ता का केंद्र है।' उन्होंने इसे 'राजनीतिक संस्कृति में एक मौलिक परिवर्तन' बताया। न्यू पॉपुलर फ्रंट की 180 सीटों में से अनुमानतः 75 सीटें फ्रांस अनबोड को मिलेंगी, जबकि लगभग 65 सीटें सोशलिस्टों को, लगभग 33 ग्रीन्स को तथा 10 से भी कम सीटें कम्युनिस्टों को मिलेंगी। जैसा कि ग्लक्समैन की टिप्पणियों से साफ है, गठबंधन को एक साथ बनाए रखना कठिन होगा।

 सिद्धांत रूप में, यूरोपीय संसद में गठबंधन बनाने वाले उदारवादी ग्लक्समैन समाजवादियों, ग्रीन्स, कम्युनिस्टों, मैक्रों के मध्यमार्गी गुट और रिपब्लिकन के लगभग 60 मुख्यधारा के रूढ़िवादी सांसदों के गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। लेकिन ग्लक्समैन का दृष्टिकोण मेलेनचॉन से टकराता है, जो संभावित साझेदारों के साथ बातचीत से इन्कार करते हैं, और वे मैक्रों के भी विरोधी हैं। इसलिए फिलहाल समझौते की कोई संभावना नहीं है। चुनाव के बाद फ्रांस में छाए धुंध से बाहर निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं है, जबकि ओलंपिक मशाल 14 जुलाई को बास्तील दिवस पर फ्रांस की राजधानी पहुंचने वाली है।   

Have something to say? Post your comment

और चंडीगढ़ समाचार

जब बाढ़ तीन देशों को पार करती है, तो दक्षिण एशिया की आपदा योजनाएं क्यों नहीं?

जब बाढ़ तीन देशों को पार करती है, तो दक्षिण एशिया की आपदा योजनाएं क्यों नहीं?

प्रधानमंत्री श्री मोदी को उज़्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं को दिया जाना वाला सर्वोच्च सम्मान ‘‘ओली दाराजली दोस्तलिक’’ दिया गया

प्रधानमंत्री श्री मोदी को उज़्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं को दिया जाना वाला सर्वोच्च सम्मान ‘‘ओली दाराजली दोस्तलिक’’ दिया गया

उपराष्ट्रपति सजावटी मछली पालन के विस्‍तार के लिए रणनीतिक कार्ययोजना “मिशन रंगीन मछली 2031” जारी करेंगे

उपराष्ट्रपति सजावटी मछली पालन के विस्‍तार के लिए रणनीतिक कार्ययोजना “मिशन रंगीन मछली 2031” जारी करेंगे

श्री राजनाथ सिंह और श्री योगी आदित्‍यनाथ ने लखनऊ छावनी में 100 करोड़ रुपये से अधिक की 14 विकास परियोजनाओं के लिए भूमि पूजन किया

श्री राजनाथ सिंह और श्री योगी आदित्‍यनाथ ने लखनऊ छावनी में 100 करोड़ रुपये से अधिक की 14 विकास परियोजनाओं के लिए भूमि पूजन किया

प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान के युवा मित्रों के उत्साह पर खुशी व्यक्त की

प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान के युवा मित्रों के उत्साह पर खुशी व्यक्त की

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने बेंगलुरु में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री श्री रामकृष्ण हेगड़े जी के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लिया

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने बेंगलुरु में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री श्री रामकृष्ण हेगड़े जी के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लिया

ज्ञान अर्जित करो, संवैधानिक माध्यमों से अन्याय पर सवाल उठाओ और लोकतांत्रिक तरीकों से बदलाव लाओ: रक्षा मंत्री का युवाओं से आह्वान

ज्ञान अर्जित करो, संवैधानिक माध्यमों से अन्याय पर सवाल उठाओ और लोकतांत्रिक तरीकों से बदलाव लाओ: रक्षा मंत्री का युवाओं से आह्वान

संशोधित सीबीजी मूल्य निर्धारण से उत्पादकों को समर्थन मिलता है, जबकि उपभोक्ताओं पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता

संशोधित सीबीजी मूल्य निर्धारण से उत्पादकों को समर्थन मिलता है, जबकि उपभोक्ताओं पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता

प्रधानमंत्री ने 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित रक्षा बंधन समारोह की झलकियां साझा कीं

प्रधानमंत्री ने 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित रक्षा बंधन समारोह की झलकियां साझा कीं

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद में अपने संसदीय क्षेत्र की टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बेटियों के साथ रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद में अपने संसदीय क्षेत्र की टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बेटियों के साथ रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss