Friday, November 06, 2026
BREAKING
• सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गिरफ्तारी से पहले हिरासत का समय भी 24 घंटे में शामिल, पुलिस नहीं कर सकती औपचारिक कार्रवाई का इंतजार • केरलम के राज्यपाल प्रधानमंत्री से मिले • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 'हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026' में कहा- सुरक्षा के तनावपूर्ण वातावरण के बीच, समुद्री क्षेत्र में आपसी निर्भरता मजबूत करने के लिए आपूर्ति शृंखला में विविधता लाना और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण है • भारतीय रेल ने अक्टूबर 2026 में 145.07 मिलियन टन माल ढुलाई की • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ग्रेड-ए क्षेत्रों में सूक्ष्मजीव निगरानी संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करने के लिए अनुसूची-एम में संशोधन का प्रस्ताव रखा • Horoscope Today: दैनिक राशिफल 05 नवंबर, 2026 • दिवाली से पहले दिल्ली की हवा ने बजाई खतरे की घंटी • Latest News from Punjab November 2026 • Latest News from Haryana November 2026 • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग 21,800 करोड़ रुपये की लागत वाली पुणे मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी

चंडीगढ़

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी की सब-कैटेगरी में आरक्षण को दी मंज़ूरी

August 02, 2024 08:22 AM

सिटी दर्पण

नई दिल्ली, 01 अगस्तः

सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की पीठ ने गुरुवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया है.

पीठ के छह जजों के कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में सब-कैटेगरी को भी आरक्षण दिया जा सकता है.

सिर्फ़ जज जस्टिस बेला त्रिवेदी इस राय से असहमत थीं.

इस फ़ैसले के बाद राज्य अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण में आंकड़ों के आधार पर सब-क्लासिफिकेशन यानी वर्गीकरण कर सकते हैं.

इसका मतलब ये है कि अगर किसी राज्य में 15% आरक्षण अनुसूचित जातियों के लिए है तो उस 15% के अंतर्गत वो कुछ अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण तय कर सकते हैं.

कोर्ट ने कहा कि सारी अनुसूचित जातियां और जनजातियां एक समान वर्ग नहीं हैं. कुछ दूसरों से ज़्यादा पिछड़ी हो सकती हैं. इसलिए उनके उत्थान के लिए राज्य सरकार सब-क्लासिफिकेशन कर के अलग से आरक्षण रख सकती है.

सात जजों ने छह अलग-अलग राय लिखी. विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण के हिस्से में ये एक बहुत बड़ा फ़ैसला है जिसके कई राजनीतिक प्रभाव दिखेंगे.

1975 में पंजाब सरकार ने अनुसूचित जाति की नौकरी और कॉलेज के आरक्षण में 25% वाल्मीकि और मज़हबी सिख जातियों के लिए निर्धारित किया था. इसे हाई कोर्ट ने 2006 में ख़ारिज कर दिया.

ख़ारिज करने का आधार 2004 का एक सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला था, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जाति की सब-कैटेगरी नहीं बनाई जी सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्यों के पास ये करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि अनुसूचित जाति की सूची राष्ट्रपति की ओर से बनाई जाती है.

पढ़ाई और नौकरी दोनों पर लागू

 

आंध्र प्रदेश ने भी पंजाब जैसा एक कानून बनाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया.

इस कारण, पंजाब सरकार ने एक नया क़ानून बनाया, जिसमें यह कहा गया कि अनुसूचित जाति के आरक्षण के आधे हिस्से में इन दो जातियों को प्राथमिकता दी जाएगी. ये क़ानून भी हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.

यह मामला सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ के पास पहुंचा.

एक अगस्त के फ़ैसले ने 2004 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट दिया.

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने और जस्टिस मनोज मिश्रा के फ़ैसले में कहा कि अनुसूचित जाति एक समान वर्ग नहीं है.

उन्होंने लिखा कि कुछ जातियां, जैसे जो सीवर की सफ़ाई करते हैं, वो बाक़ियों से ज़्यादा पिछड़ी रहती हैं, जैसे जो बुनकर का काम करते हैं जबकि दोनों ही अनुसूचित जाति में आते हैं और छुआ-छूत से जूझती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि सब-क्लासिफिकेशन का निर्णय आंकड़ों के आधार पर होगा ना कि राजनीतिक लाभ के लिए. सरकारों को ये दिखाना होगा कि क्या पिछड़ेपन के कारण किसी जाति का सरकार के कार्य में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है. सब-क्लासिफिकेशन पर जुडिशियल रिव्यू भी लगाया जा सकता है.

कोर्ट का फ़ैसला नौकरी और पढ़ाई पर लागू होगी.

क्या होगा असर?

चार और जजों ने चीफ जस्टिस की राय से सहमति जतायी. पर अपने-अपने फ़ैसले लिखे.

जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि सरकार ये नहीं कर सकती कि किसी एक जनजाति को पूरा आरक्षण दे दे.

पंजाब सरकार ने कोर्ट के सामने ये तर्क रखा कि अनुसूचित जाति में सभी जातियां समान नहीं है. केंद्र सरकार ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सब-क्लासिफिकेशन की अनुमति मिलनी चाहिए.

फ़िलहाल, अन्य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण में सब-क्लासिफिकेशन होता है. अब ऐसा ही सब-क्लासिफिकेशन अनुसूचित जाति और जनजाति में भी देखा जा सकता है.

हालांकि, इसके लिए राज्यों को पर्याप्त आंकड़ा पेश करना होगा.

ऐसा कई बार हुआ है कि कोर्ट ने सरकार के ठीक से आंकड़ा इकट्ठा नहीं करने की बात कहते हुए आरक्षण को ख़ारिज कर दिया है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इससे दलित वोट पर भी असर पड़ेगा.

जादवपुर यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और पॉलिटिकल साइंटिस्ट सुभाजीत नस्कर का कहना है, “सब-क्लासीफिकेशन मतलब एससी-एसटी वोट बँट जाएं. ऐसे एक समुदाय के अंदर राजनीतिक बँटवारा पैदा होगा. बीजेपी ने भी कोर्ट में सब-क्लासिफिकेशन का समर्थन किया है. हो सकता है कि इनसे उनको सियासी फ़ायदा मिले. राज्य स्तर की राजनीतिक पार्टियां भी अपने फ़ायदे के मुताबिक़ सब-क्लासिफिकेशन लाएंगी.”

हालांकि, उन्होंने इस फ़ैसले से असहमति जताई और कहा, “अनुसूचित जाति का आरक्षण छुआछूत के आधार पर दिया जाता है. इसका सब-क्लासिफिकेशन नहीं कर सकते. इस फ़ैसले का आने वाले दिनों में ज़ोर-शोर से विरोध होगा.”

क्रीमी लेयर

वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने भी एक्स पर इस फ़ैसले का विरोध किया. उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला समानता के मौलिक अधिकार के ख़िलाफ़ जाता है. उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पिछड़ापन का निर्णय किस आधार पर किया जाएगा.

कोर्ट के चार जजों ने अनुसूचित जाति और जनजाति में क्रीमी लेयर पर भी अपने विचार रखे.

क्रीमी लेयर का मतलब ये है कि वो वर्ग वित्त और सामाजिक रूप से विकसित हैं और वो आरक्षण का उपयोग नहीं कर सकते.

जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि अन्य पिछड़े वर्ग आरक्षण जैसे अनुसूचित जाति और जनजाति में भी क्रीमी लेयर आना चाहिए. पर उन्होंने ये नहीं कहा कि क्रीमी लेयर कैसे निर्धारित किया जाएगा.

इस पर दो और जजों ने सहमति जताई. वहीं जस्टिस पंकज मिथल ने कहा कि अगर एक पीढ़ी आरक्षण लेकर समाज में आगे बढ़ गई है, तो आगे वाली पीढ़ियों को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए.

हालांकि, ये बस जजों की टिप्पणी थी और भविष्य के मुक़दमों पर बाध्य नहीं होगा.

क्रीमी लेयर का सवाल कोर्ट के सामने नहीं था.

फ़िलहाल अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर क्रीमी लेयर लागू है और अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए नौकरी में वृद्धि में भी क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू है.

Have something to say? Post your comment

और चंडीगढ़ समाचार

केरलम के राज्यपाल प्रधानमंत्री से मिले

केरलम के राज्यपाल प्रधानमंत्री से मिले

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 'हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026' में कहा- सुरक्षा के तनावपूर्ण वातावरण के बीच, समुद्री क्षेत्र में आपसी निर्भरता मजबूत करने के लिए आपूर्ति शृंखला में विविधता लाना और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण है

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 'हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026' में कहा- सुरक्षा के तनावपूर्ण वातावरण के बीच, समुद्री क्षेत्र में आपसी निर्भरता मजबूत करने के लिए आपूर्ति शृंखला में विविधता लाना और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण है

भारतीय रेल ने अक्टूबर 2026 में 145.07 मिलियन टन माल ढुलाई की

भारतीय रेल ने अक्टूबर 2026 में 145.07 मिलियन टन माल ढुलाई की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग 21,800 करोड़ रुपये की लागत वाली पुणे मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग 21,800 करोड़ रुपये की लागत वाली पुणे मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह को संबोधित किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह को संबोधित किया

रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में ‘भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण’ पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की

रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में ‘भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण’ पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा की खेप जारी करने के लिए योग्य कर्मियों को अधिकृत करने को अनिवार्य बनाने के लिए औषधि नियमावली, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा की खेप जारी करने के लिए योग्य कर्मियों को अधिकृत करने को अनिवार्य बनाने के लिए औषधि नियमावली, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार विदेशी नागरिकों के प्रबंधन के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों (FRROs) के विस्तार से संस्थागत ढांचे को मजबूत कर रही है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार विदेशी नागरिकों के प्रबंधन के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों (FRROs) के विस्तार से संस्थागत ढांचे को मजबूत कर रही है

मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ और सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज की साइबर-इनेबल्ड कॉग्निटिव वॉरफेयर पर संगोष्ठी का नई दिल्ली में शुभारंभ

मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ और सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज की साइबर-इनेबल्ड कॉग्निटिव वॉरफेयर पर संगोष्ठी का नई दिल्ली में शुभारंभ

By using our site, you agree to our Terms & Conditions and Disclaimer     Dismiss