झारखंड में बारबेंडा-दमरुघुतु दोहरीकरण और दमरुघुतु-बोकारो स्टील सिटी तीसरी और चौथी लाइनों से ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती
उत्तरी रेलवे के 34 रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा और ट्रेन आवृत्ति बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग शुरू की गई
अंबाला-जालंधर खंड पर माल ढुलाई को सुगम बनाने और भीड़ कम करने के लिए राजपुरा बाईपास लाइन को मंजूरी दी गई
अलाप्पुझा-अंबालापुझा दोहरीकरण से केरल के प्रमुख मार्ग पर यात्री और माल ढुलाई दक्षता में होगा सुधार, राज्य में पलक्कड़ बाईपास परियोजना से व्यस्त जंक्शन पर यात्री और माल की देरी को कम करने में मिलेगी मदद
तमिलनाडु में चेन्नई-कोयंबटूर-पोतनूर कॉरिडोर को उच्च क्षमता वाले चार-लाइन मार्ग में बदलने के लिए इरुगुर-पोतनूर दोहरीकरण तैयार
भारतीय रेलवे ने रेल अवसंरचना परियोजनाओं के एक व्यापक सेट को मंजूरी दी है, जिनका मकसद भीड़भाड़ को कम करना, लाइनों की क्षमता बढ़ाना, सुरक्षा प्रणालियों में सुधार करना और देश भर में यात्रियों और माल ढुलाई को तेज और अधिक विश्वसनीय बनाना है। ये स्वीकृतियाँ दक्षिणी, उत्तरी और दक्षिण पूर्वी रेलवे में लागू की गई हैं, जिनमें लाइन दोहरीकरण, तीसरी और चौथी लाइन, बाईपास कॉरिडोर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम शामिल हैं।
बारबेंडा-दमरुघुतु दोहरीकरण और दमरुघुतु-बोकारो स्टील सिटी तीसरी और चौथी लाइन: 815.32 करोड़ रुपए
झारखंड में बारबेंडा-दमरुघुतु दोहरीकरण और दमरुघुतु-बोकारो स्टील सिटी तीसरी और चौथी लाइन दक्षिण पूर्वी रेलवे के अंतर्गत प्रमुख क्षमता विस्तार परियोजनाएँ हैं और भारत के ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर की आधारशिला हैं। वर्तमान में, यह लाइन 108% उपयोग पर चल रही है, जिसमें ट्रेनों का ठहराव 90-150 मिनट के बीच रहता है और प्रतिदिन 78 ट्रेनों (38 यात्री और 40 मालगाड़ी) का संचालन करती है, जिससे 35.22 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की माल ढुलाई क्षमता प्राप्त होती है। हस्तक्षेप के बगैर वर्ष 2028-29 तक उपयोग 132% तक पहुंचने का अनुमान है।
यह परियोजना सेंट्रल कोलफील्ड्स, सीमेंट और स्टील संयंत्रों, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड डिपो, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड डिपो और बोकारो स्टील सिटी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र सहित प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा केंद्रों से संपर्क को मजबूत करती है। क्षमता में वृद्धि करके, यह विस्तार ऊर्जा लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक उत्पादन और राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं की दक्षता में सीधे सुधार करेगा।
उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) और अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले नेटवर्क (एचयूएन) मार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग: 421.41 करोड़ रुपए
सुरक्षा और परिचालन दक्षता को और बढ़ाने के लिए, भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के उन मार्गों पर 34 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है, जहां कवच प्रणाली लागू की जा रही है। इसमें 292.24 करोड़ रुपए की लागत से दिल्ली डिवीजन के 21 स्टेशन और 129.17 करोड़ रुपए की लागत से अंबाला डिवीजन के 13 स्टेशन शामिल हैं।
इस आधुनिक सुविधाओं से ट्रेनों का संचालन तेज और सुरक्षित हो सकेगा, सिग्नलिंग प्रणालियों की विश्वसनीयता में सुधार होगा, उच्च घनत्व वाले मार्गों पर ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ेगी और आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणालियों को पूरक बनाया जा सकेगा।
राजपुरा बाईपास लाइन (13.46 किमी), उत्तरी रेलवे: 411.96 करोड़ रुपए
राजपुरा बाईपास लाइन की मंजूरी से उत्तरी रेलवे के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक, अंबाला-जालंधर खंड पर क्षमता और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह परियोजना राजपुरा-बठिंडा लाइन पर स्थित न्यू शंभू डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) स्टेशन और कौली स्टेशन के बीच सीधा रेल संपर्क प्रदान करेगी, जिससे मालगाड़ियों को भीड़भाड़ वाले राजपुरा यार्ड को बाईपास करने की सुविधा मिलेगी। इससे माल ढुलाई सुचारू होगी, मौजूदा लाइनों पर दबाव कम होगा और यातायात की अनुमानित वृद्धि को पूरा करने में मदद मिलेगी, साथ ही डीएफसी के साथ बेहतर तालमेल और पूरे क्षेत्र में अधिक विश्वसनीय यात्री और माल ढुलाई संचालन भी सुनिश्चित होगा।
अलाप्पुझा-अंबालापुझा दोहरीकरण (12.66 किमी): 324.16 करोड़ रुपए
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह परियोजना एर्नाकुलम-तुरावुर-कयनकुलम मार्ग पर एक अहम एकल-लाइन बाधा को दूर करती है। एक बार पूरा होने पर, इससे प्रत्येक दिशा में प्रतिदिन नौ अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चल सकेंगी, माल ढुलाई क्षमता में 2.88 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) की वृद्धि होगी और 3.23 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वार्षिक आय प्राप्त होगी। यह परियोजना यात्री और मालगाड़ियों दोनों के लिए देरी की अवधि को कम करके परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार करेगी।
इस कॉरिडोर पर बची हुई आखिरी सिंगल-लाइन लाइन को पूरा करके, यह सुचारू और निर्बाध ट्रेन आवागमन सुनिश्चित करता है, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों के लिए सफर की विश्वसनीयता बढ़ती है और केरल के भीतर अंतर-राज्यीय माल ढुलाई प्रवाह मजबूत होता है, साथ ही प्रमुख जंक्शनों पर भीड़ कम होती है, जिससे तेज और निर्बाध यात्रा मुमकिन होती है।
पलक्कड़ टाउन-पारली बाईपास लाइन (1.80 किमी): 163.57 करोड़ रुपए
पलक्कड़ बाईपास परियोजना केरल के पलक्कड़ जंक्शन पर कई ट्रेन सेवाओं के लिए इंजन रिवर्सल को समाप्त करके तत्काल परिचालन और यात्री लाभ प्रदान करती है। यह यात्री ट्रेनों के औसत विलंब को 40-44 मिनट तक कम करता है और मालगाड़ियों के विलंब को प्रति ट्रेन 120 मिनट तक कम करता है, साथ ही पलक्कड़ जंक्शन से होने वाली अतिरिक्त यात्री सेवाओं को मदद करता है।
ट्रेन आवागमन को सुव्यवस्थित करके, बाईपास शोरानूर, तिरुवनंतपुरम और पोलाची को जोड़ने वाले मार्गों पर समयबद्धता में खासा सुधार करेगा, साथ ही दक्षिणी रेलवे के सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक पर भीड़ को कम करेगा।
इरुगुर-पोतनूर दोहरीकरण (10.77 किमी): 277.42 करोड़ रुपए
तमिलनाडु के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम में से एक है, चेन्नई-तिरुवनंतपुरम कॉरिडोर की अहम कड़ी, इरुगुर-पोतनूर खंड के दोहरीकरण की मंजूरी। इस परियोजना से प्रतिदिन 15 अतिरिक्त यात्री ट्रेनों का संचालन संभव होगा और माल ढुलाई क्षमता में 3.12 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) की वृद्धि होगी, जिससे वार्षिक शुद्ध आय में 11.77 करोड़ रुपए की वृद्धि होने की उम्मीद है।
वर्तमान में, लाइन की क्षमता उपयोग 60% है, लेकिन इस विस्तार के साथ, 2027-28 तक इसके 131% तक पहुंचने का अनुमान है, जो परियोजना की तात्कालिकता और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। आस-पास के खंडों पर कई चौगुनीकरण परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं या चल रही हैं, ऐसे में इस खंड के दोहरीकरण से यह सुनिश्चित होगा कि पूरा चेन्नई-कोयंबटूर-पोतनूर बेल्ट एक उच्च क्षमता वाले, चार-लाइन कॉरिडोर में परिवर्तित हो सके। इससे कोयंबटूर जैसे औद्योगिक केंद्रों को सीधा लाभ होगा, पोतनूर में टर्मिनल संचालन में सुधार होगा और उत्तरी गंतव्यों के लिए नई ट्रेन सेवाओं को समर्थन मिलेगा।
इन मंज़ूरियों से यह साफ होता है कि भारतीय रेलवे विश्व स्तरीय रेल अवसंरचना को बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। राज्य सरकारों के समय पर सहयोग से ये परियोजनाएं यात्राओं को तेज करेंगी, माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाएंगी, सुरक्षा में सुधार करेंगी और सतत् आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी।