यूक्रेन युद्ध के बीच एक रूसी समाचार एजेंसी के दावे ने वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि United Kingdom और France, Ukraine को परमाणु सुरक्षा से जुड़ी किसी व्यवस्था या संभावित तैनाती के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दोनों यूरोपीय देशों की ओर से आधिकारिक स्तर पर ऐसी किसी योजना की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट सामने आते ही मॉस्को ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया। रूसी पक्ष का कहना है कि यदि यूक्रेन को किसी भी रूप में परमाणु सुरक्षा ढांचे में शामिल किया गया, तो इसे सीधी उकसावे की कार्रवाई माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयानबाजी भी रणनीतिक दबाव की राजनीति का हिस्सा हो सकती है।
क्या है पूरा संदर्भ?
यूक्रेन 1994 के बुडापेस्ट मेमोरेंडम के तहत अपने परमाणु हथियार त्याग चुका है। बदले में उसे सुरक्षा आश्वासन दिए गए थे। 2022 से जारी संघर्ष के बाद कीव लगातार पश्चिमी देशों से उन्नत हथियार और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी की मांग कर रहा है। ऐसे में परमाणु सुरक्षा कवच या विस्तारित प्रतिरोध (extended deterrence) पर चर्चा की अटकलें समय-समय पर उठती रही हैं।
ब्रिटेन और फ्रांस, दोनों ही नाटो ढांचे के भीतर परमाणु क्षमता रखने वाले यूरोपीय देश हैं। यदि वे यूक्रेन के लिए किसी प्रकार की सुरक्षा गारंटी को औपचारिक रूप देते हैं, तो यह यूरोप की सामरिक संरचना में बड़ा बदलाव माना जाएगा। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि सीधे परमाणु हथियार हस्तांतरण की संभावना अत्यंत कम है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संधियों और अप्रसार व्यवस्थाओं से टकरा सकता है।
नाटो और यूरोप की भूमिका
यूरोपीय सुरक्षा ढांचे में नाटो की केंद्रीय भूमिका है, और किसी भी बड़े निर्णय के लिए व्यापक सहमति जरूरी होगी। अब तक पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को पारंपरिक हथियार, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है, लेकिन परमाणु आयाम पर सार्वजनिक रूप से सावधानी बरती है।
रूस की चेतावनी और कूटनीतिक संकेत
मॉस्को ने संकेत दिया है कि ऐसे किसी कदम से तनाव और बढ़ेगा। रूस पहले भी चेतावनी देता रहा है कि पश्चिमी सैन्य सहायता को वह अपने खिलाफ सीधी भागीदारी के रूप में देखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, परमाणु विमर्श का उभरना ही इस बात का संकेत है कि संघर्ष का कूटनीतिक समाधान अभी दूर है।
वैश्विक असर
यदि परमाणु सुरक्षा से जुड़ी बहस तेज होती है, तो इसका असर वैश्विक अप्रसार व्यवस्था और यूरोपीय संतुलन पर पड़ सकता है। ऊर्जा बाजार, रक्षा बजट और कूटनीतिक समीकरण भी प्रभावित होंगे। संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख शक्तियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
रूसी एजेंसी के दावों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का अभाव है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यूक्रेन संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन का प्रश्न बन चुका है। आने वाले दिनों में पश्चिमी देशों की औपचारिक प्रतिक्रिया और कूटनीतिक गतिविधियां इस मुद्दे की दिशा तय करेंगी।