देश के कई हिस्सों में रसोई गैस यानी एलपीजी की कमी की समस्या अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हो पाई है। 21 मार्च तक स्थिति यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के कारण व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति पर असर पड़ा है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे खाद्य व्यवसायों को सीमित मात्रा में ही सिलेंडर मिल पा रहे हैं, जिससे उनका संचालन प्रभावित हो रहा है।
तेल विपणन कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे आंकड़ों के अनुसार, मांग में अचानक आई बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के चलते यह स्थिति बनी हुई है। खासकर शहरी क्षेत्रों में कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से कारोबारियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। कई जगहों पर उन्हें खुले बाजार से ऊंची कीमत पर गैस खरीदनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी की खपत में मौसमी बदलाव और लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण यह संकट गहराया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी घरेलू आपूर्ति पर पड़ रहा है। हालांकि, सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत है, क्योंकि सरकार ने उनकी जरूरतों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। लेकिन इसका सीधा असर व्यावसायिक क्षेत्र पर पड़ रहा है, जहां रोजमर्रा के संचालन में गैस की अहम भूमिका होती है। छोटे व्यवसायियों का कहना है कि सीमित आपूर्ति के कारण उन्हें काम के घंटे घटाने पड़ रहे हैं या वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है।
आपूर्ति को संतुलित करने के लिए कंपनियां अतिरिक्त स्टॉक जुटाने और वितरण प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी। फिलहाल प्रशासन ने उपभोक्ताओं से धैर्य बनाए रखने और अनावश्यक भंडारण से बचने की अपील की है।
कुल मिलाकर, एलपीजी की मौजूदा कमी ने खासकर व्यावसायिक उपभोक्ताओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर खाद्य उद्योग और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।