नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ बैंकिंग सेवाओं में भी अहम बदलाव लागू हो गए हैं। 1 अप्रैल से एटीएम के जरिए पैसे निकालना अब पहले के मुकाबले महंगा पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के तहत कई बैंकों ने अपनी एटीएम शुल्क संरचना में संशोधन किया है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।
निजी क्षेत्र के HDFC Bank और सार्वजनिक क्षेत्र के Punjab National Bank सहित कई बैंकों ने मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा पार करने के बाद लगने वाले शुल्क में बदलाव किया है। अब निर्धारित सीमा के बाद हर अतिरिक्त लेनदेन पर पहले से अधिक शुल्क देना होगा। महानगरों में ग्राहकों को आमतौर पर 3 से 5 मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा मिलती है, जबकि गैर-महानगर क्षेत्रों में यह सीमा थोड़ी अधिक हो सकती है।
नए नियमों के अनुसार, फ्री लिमिट खत्म होने के बाद हर अतिरिक्त निकासी पर करीब 21 रुपये या उससे अधिक शुल्क लिया जा सकता है। इसके अलावा बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट जैसी नॉन-फाइनेंशियल सेवाओं पर भी शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। बैंकों का कहना है कि बढ़ती परिचालन लागत और एटीएम नेटवर्क के रखरखाव के चलते यह फैसला लिया गया है।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो बार-बार एटीएम से छोटे-छोटे अमाउंट निकालते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि ग्राहक अपने ट्रांजैक्शन को प्लान करके करें और डिजिटल पेमेंट विकल्पों जैसे यूपीआई या नेट बैंकिंग का अधिक इस्तेमाल करें, जिससे अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।
हालांकि, बैंकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को निर्धारित संख्या तक मुफ्त लेनदेन की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। इसलिए जरूरत है कि ग्राहक अपने बैंक की नीति को समझें और उसी के अनुसार एटीएम का उपयोग करें।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से लागू ये बदलाव बैंकिंग सेवाओं को अधिक संगठित बनाने की दिशा में एक कदम हैं, लेकिन इसके साथ ही ग्राहकों को अपनी वित्तीय आदतों में भी बदलाव लाना होगा।