ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। सरकारी मीडिया के अनुसार अंतिम विदाई समारोह कई दिनों तक चलेगा, जिसमें देशभर के लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। अंतिम दर्शन के दौरान लोगों ने खामेनेई के समर्थन में नारे लगाए और अमेरिका व इज़राइल के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया।
तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में आयोजित शोक सभा में हजारों लोग सुबह से ही पहुंचने लगे। शोक में डूबे लोगों ने काले झंडे और ईरानी राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुलूस निकाला। धार्मिक नेताओं ने खामेनेई को देश की संप्रभुता और इस्लामी गणराज्य का प्रतीक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। सरकार ने इस अवसर को राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन बताया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान के खिलाफ किसी नई सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखेगा। ट्रंप ने कहा कि अंतिम संस्कार के दौरान ईरान को "कुछ समय" दिया जा रहा है और अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अमेरिकी हितों या सहयोगियों पर हमला हुआ तो जवाब देने में कोई संकोच नहीं किया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिश का हिस्सा हो सकता है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज हुई है। कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कूटनीतिक वार्ताओं पर फिर से विचार किया जा सकता है। हालांकि ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस बीच, पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने अपने दूतावासों और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। वैश्विक बाजार भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि क्षेत्र में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई का असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि खामेनेई के निधन के बाद ईरान के नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीति तय करने की होगी। वहीं अमेरिका की ओर से फिलहाल संयम का संकेत मिलने से क्षेत्रीय तनाव में अस्थायी राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।