सूखे धनिये के बीज और ताजी करी पत्तों के मानकों सहित भारत के नेतृत्व वाले सात कोडेक्स दस्तावेज अपनाए गए; आयोग ने काजू की गिरी के लिए कोडेक्स मानक विकसित करने के भारत के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 6 से 10 जुलाई, 2026 तक आयोजित कोडेक्स एलिमेंटेरियस आयोग (सीएसी-49) के 49वें सत्र में भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। आयोग ने भारत की अध्यक्षता और सह-अध्यक्षता में विकसित किए गए सात कोडेक्स मानकों और दिशा-निर्देशों को अपनाया, जिससे विज्ञान-आधारित अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों के विकास में भारत का योगदान और बढ़ा है। एक अन्य बड़ी उपलब्धि के रूप में, आयोग ने काजू की गिरी (कैश्यू कर्नेल्स) के लिए कोडेक्स मानक विकसित करने के भारत के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रजित पुन्हानी के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने एफएसएसएआई और स्पाइसेज बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर आयोग के विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया।
आयोग ने सूखे धनिये के बीज और ताजी करी पत्तियों के लिए कोडेक्स मानकों को अपनाया, जिन्हें भारत की अध्यक्षता में विकसित किया गया। सूखे धनिये के बीज के लिए मानक दुनिया के सबसे ज़्यादा व्यापार किए जाने वाले मसालों में से एक के व्यापार को आसान बनाएगा, जबकि ताजी करी पत्तियों के लिए मानक क्षेत्रीय रूप से महत्वपूर्ण पाक-कला की जड़ी-बूटी के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मानदंड प्रदान करता है।
सीएसी-49 ने भारत की सह-अध्यक्षता में विकसित किए गए पांच कोडेक्स दस्तावेजों को भी अपनाया। इनमें वनीला और बड़ी इलायची के लिए कोडेक्स मानक शामिल हैं, जो इन वैश्विक स्तर पर व्यापार की जाने वाली वस्तुओं के लिए गुणवत्ता के लिए एक समान अंतर्राष्ट्रीय नियम तय करते हैं; खाद्य उत्पादन और प्रसंस्करण में पानी के सुरक्षित उपयोग और पुनः उपयोग के लिए दिशा-निर्देशों के अनुलग्नक, जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पानी के टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देते हैं; चिकन मांस में कैम्पिलोबैक्टर और साल्मोनेला को कंट्रोल करने के लिए दिशा-निर्देश, जो पोल्ट्री से जुड़ी खाद्य-जनित बीमारियों को कम करने के उपायों को मजबूत करते हैं; और प्री-पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की लेबलिंग के लिए सामान्य मानक के तहत संयुक्त प्रस्तुति और मल्टीपैक फॉर्मेट से संबंधित प्रावधान, जो खाद्य लेबलिंग की आवश्यकताओं में अधिक स्पष्टता और एकरूपता प्रदान करते हैं।
सीएसी-49 में भारत की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि आयोग ने 'प्रोसेस्ड फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स' पर कोडेक्स कमिटी (सीसीपीएफवी) के तहत काजू की गिरी के लिए कोडेक्स मानक विकसित करने के भारत के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी। दुनिया भर में सबसे ज़्यादा व्यापार होने वाले ट्री नट्स में से एक के लिए, एक जैसे अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की ज़रूरत को समझते हुए, कोडेक्स के सदस्यों ने इस प्रस्ताव का जबरदस्त समर्थन किया। उम्मीद है कि इस नए मानक से फेयर ट्रेड को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार में आने वाली तकनीकी बाधाएं कम होंगी और वैश्विक स्तर पर काजू व्यापार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर उसके लिए बाजार तक पहुंच को मज़बूत करेगा।
इसके अलावा, भारत को नए खाद्य स्रोतों और उत्पादन प्रणालियों (एनएफपीएस) के लिए बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक वर्किंग ग्रुप का सह-अध्यक्ष चुना गया है। यह ग्रुप मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा करेगा, कोडेक्स जोखिम विश्लेषण सिद्धांतों में कमियों की पहचान करेगा और भविष्य में कोडेक्स गाइडेंस की आश्यकता पर विचार करेगा।
सीएसी-49 में भारत की उपलब्धियां वैज्ञानिक उत्कृष्टता, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आम सहमति बनाने के माध्यम से वैश्विक खाद्य मानक प्रणाली को मज़बूत करने के देश के संकल्प को और दृढ़ करती हैं। उम्मीद है कि इन परिणामों से भारतीय किसानों, खाद्य उद्योग, निर्यातकों और उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा। साथ ही सुरक्षित खाद्य-पदार्थों और अधिक भरोसेमंद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी योगदान मिलेगा।
भारत, कोडेक्स एलिमेंटेरियस आयोग, एफएओ, डब्ल्यूएचओ और सदस्य देशों के साथ मिलकर विज्ञान-आधारित, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर एकसमान खाद्य मानक विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है; ये मानक खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण और निष्पक्ष व्यापार को सुनिश्चित करते हैं।
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