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एनएसएफडीसी की रियायती ऋण-आधारित योजनाओं के माध्यम से अनुसूचित जाति के पात्र लोगों की उद्यमिता, स्वरोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सफलता मिली

July 14, 2026 05:11 AM

इस अध्ययन में ग्यारह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान एनएसएफडीसी ऋण-आधारित योजनाओं के तहत 5,480 लाभार्थियों को शामिल किया गया

कुल मिलाकर, 81 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने एनएसएफडीसी योजनाओं के तहत अपने सामाजिक और आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान को सराहा

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तत्वावधान में कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम - राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) ने अपनी रियायती ऋण योजनाओं के माध्यम से अनुसूचित जाति के पात्र लोगों के लिए उद्यमिता, स्वरोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। इन योजनाओं से देशभर में लक्षित लाभार्थियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एक बाहरी एजेंसी - मेसर्स डेवलपमेंट ओरिएंटेड ऑपरेशंस रिसर्च एंड सर्वे (डीओओआरएस) ने नमूना आधार एक प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन किया जिससे आय वृद्धि, संपत्ति सृजन, रोजगार सृजन और सामाजिक स्थिति में सुधार के संदर्भ में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

इस अध्ययन में ग्यारह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशोंअर्थात् आंध्र प्रदेशबिहारगुजरातहिमाचल प्रदेशजम्मू और कश्मीरकर्नाटकओडिशापुडुचेरीपंजाबतमिलनाडु और त्रिपुरा में वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान एनएसएफडीसी ऋण आधारित योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त 5,480 लाभार्थियों के नमूने को शामिल किया गया।

इन निष्कर्षों से अनुसूचित जाति समुदायों के बीच स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने में एनएसएफडीसी की ऋण योजनाओं की प्रभावशीलता का पता चलता है।

अध्ययन के अनुसार, 93.34 प्रतिशत लाभार्थियों ने वित्तीय सहायता का उपयोग इच्छित उद्देश्य के लिए कियाजो एनएसएफडीसी के ऋण तंत्र और निगरानी प्रणालियों की प्रभावशीलता को दर्शाता है, 93.54 प्रतिशत लाभार्थी एनएसएफडीसी सहायता के माध्यम से सृजित संपत्तियों को अपने पास बनाए हुए हैंजो विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदान किए गए ऋणों की स्थिरता और उत्पादक उपयोग को दर्शाता है और 8.98 प्रतिशत लाभार्थियों ने तीन लाख की वार्षिक पारिवारिक आय सीमा को पार कर लिया है।

अध्ययन से यह भी पता चलता है कि 1.50 लाख रुपये और 3.00 लाख रुपये के बीच वार्षिक पारिवारिक आय वाले लाभार्थियों का अनुपात सहायता प्राप्त करने से पहले 32.61 प्रतिशत से बढ़कर सहायता प्राप्त करने के बाद 46.28 प्रतिशत हो गया। इसी प्रकार, 1.50 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले लाभार्थियों का अनुपात 67.39 प्रतिशत से घटकर 44.74 प्रतिशत हो गयाजबकि 81.30 प्रतिशत लाभार्थियों ने एनएसएफडीसी की ऋण योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त करने के बाद अपनी सामाजिक स्थिति में सुधार की सूचना दी है।

लाभार्थियों के बीच स्वरोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, क्योंकि ऋण लेने से पहले स्वरोजगार प्राप्त करने वाले लाभार्थियों का अनुपात 46.62 प्रतिशत थाजो सहायता प्राप्त करने के बाद बढ़कर 73.95 प्रतिशत हो गया। सबसे उल्लेखनीय सुधार गैर-कृषि स्वरोजगार गतिविधियों में देखा गया, जहां हिस्सेदारी 35.64 प्रतिशत से बढ़कर 59.42 प्रतिशत हो गई।

मूल्यांकन अध्ययन से महिलाओं के सशक्तिकरण पर एनएसएफडीसी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव पर और प्रकाश डाला गया है। वित्तीय सहायता प्राप्त करने से पहले गृहिणी के रूप में पहचानी गई 705 महिलाओं में से 674 महिलाएं (95.60 प्रतिशत) बाद में स्वरोजगार में शामिल हो गईं। यह परिवर्तन महिला लाभार्थियों के बीच वित्तीय स्वतंत्रता और आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने में एनएसएफडीसी की भूमिका को दर्शाता है।

अध्ययन से लाभार्थियों की सामाजिक स्थिति और आत्मविश्वास के स्तर में सुधार का भी पता चलता है। 58 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने अपनी सामाजिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार की सूचना दीजबकि 23 प्रतिशत ने मध्यम सुधार की सूचना दी। कुल मिलाकर, 81 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने स्वीकार किया कि एनएसएफडीसी योजनाओं के तहत प्राप्त सहायता ने उनके सामाजिक और आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान दिया है।

स्वतंत्र मूल्यांकन अध्ययन के निष्कर्ष गरीबी कम करने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और लक्षित वित्तीय सहायता और आजीविका समर्थन के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण को बढ़ाने के लिए एनएसएफडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। एनएसएफडीसी अपनी पहुंच को मजबूत करना, सेवा वितरण तंत्र में सुधार करना और देश भर में पात्र लाभार्थियों के लिए किफायती ऋण की उपलब्धता का विस्तार करना जारी रखेगा।

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