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आईसीएमआर-एनआईएन की अगुवाई वाले 'लेट्स फिक्स आवर फूड' समूह ने बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत प्राथमिकताएं जारी कीं

July 23, 2026 07:35 AM

नीतिगत दस्तावेज में बच्चों और किशोरों के बीच बेहतर खान-पान का वातावरण बनाने और खान-पान के व्यवहार में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित सुझाव दिए गए

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने नई दिल्ली में आयोजित ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ प्रसार और परामर्श कार्यशाला के दौरान नीतिगत दस्तावेज जारी किया

प्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 5:44PM by PIB Delhi
 

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन) के नेतृत्व वाले 'लेट्स फिक्स आवर फूड' (एलएफओएफ) समूह ने आज 'भारत में बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता वाले नीतिगत कदम' शीर्षक से एक नीतिगत दस्तावेज जारी किया। यह दस्तावेज देशभर में बच्चों और किशोरों के बीच बेहतर खाद्य वातावरण बनाने तथा उनके खान-पान की आदतों में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित सिफारिशों को रेखांकित करता है।

यह नीतिगत दस्तावेज नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एलएफओएफ प्रसार एवं परामर्श कार्यशाला के दौरान नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास द्वारा जारी किया गया, जिसमें आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) के. श्रीनाथ रेड्डी तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, एफएसएसएआई, यूनिसेफ इंडिया, 'रिज़ॉल्व टू सेव लाइव्स', समूह के भागीदार संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, शोधकर्ता, विकास साझेदार और युवा प्रतिनिधि उपस्थित थे।

'लेट्स फिक्स आवर फूड' समूह, आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व में एक बहु-संस्थानीय राष्ट्रीय मंच है, जिसमें 'रिज़ॉल्व टू सेव लाइव्स' इंडिया, यूनिसेफ इंडिया, ‘ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर’ (जीएचएआई), पीएचएफआई, विश्व स्वस्थ्य संगठन, एफएसएसएआई, आईइजी,  डब्ल्यूएफआई, लेडी इरविन कॉलेज, आईएफपीआरआई, डीकिन यूनिवर्सिटी और अन्य राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय भागीदार शामिल हैं। अनुसंधान, नीति विश्लेषण, समर्थन और हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से, यह समूह खाद्य वातावरण में बदलाव लाकर, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों को रोकने के भारत के प्रयासों में सहायता प्रदान करता है।

यह प्रकाशन लगभग तीन वर्षों के बहुविषयक अनुसंधान, हितधारकों के परामर्श और नीतिगत चर्चाओं को एक साथ लाता है। यह प्रमुख क्षेत्रों में नीतिगत सिफारिशें प्रस्तुत करता है, जिनमें स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण, पोषण साक्षरता, पैकेट के आगे पोषण संबंधी लेबलिंग, बच्चों को अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन का नियमन, वसा, नमक और चीनी (एचएफएसएस) की उच्च मात्रा वाले खाद्य पदार्थों पर टैक्स, स्वस्थ आहार संबंधी वसा, नमक कम करना, कम सोडियम वाले नमक के विकल्प, सामाजिक और व्यवहार में बदलाव के लिए बातचीत, युवाओं की भागीदारी और स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक उपाय शामिल हैं।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा, "बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ खाद्य वातावरण बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित और  कई क्षेत्रों को शामिल करने वाली नीतिगत कार्रवाई आवश्यक है। 'लेट्स फिक्स आवर फूड' समूह  जैसी सहयोगात्मक पहल भारत में बढ़ते वजन, मोटापे और खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।"

इस अवसर पर आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा, "आईसीएमआर-एनआईएन उच्च गुणवत्ता वाले साक्ष्य उत्पन्न करने और ऐसी साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जो अनुसंधान को जन स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में बदल सकें। ये नीतिगत सिफारिशें भारत की भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर खान-पान का माहौल बनाने की दिशा में काम कर रहे शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, विकास भागीदारों और युवाओं के सामूहिक प्रयासों को दर्शाती हैं।"

'पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया' (पीएचएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) के.श्रीनाथ रेड्डी ने हानिकारक आहार के व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कारकों से निपटने के लिए व्यापक नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया तथा बच्चों और किशोरों को मोटापा बढ़ाने वाले (ओबेसोजेनिक) खाद्य वातावरण से बचाने के लिए निरंतर प्रयासों का आह्वान किया।

कार्यशाला के दौरान कंसोर्टियम के तहत विकसित कई अन्य ज्ञान-संबंधी उत्पादों  का भी विमोचन किया गया, जिनमें एलएफओएफ वेबसाइट, स्कूलों के लिए पोषण वातावरण आकलन टूलकिट (एनइएटी-एस) और उसकी रिपोर्ट, फूड लेबल को समझने के लिए एक ई-लर्निंग मॉड्यूल, और बच्चों व किशोरों के बीच पोषण साक्षरता को मजबूत करने के लिए वसा, चीनी और नमक पर आईसीएमआर-एनआईएन के शैक्षणिक संसाधनों का एक संग्रह शामिल है।

यूनिसेफ इंडिया की पोषण प्रमुख मैरी-क्लाउड डेसिलेट्स ने कहा, "कुपोषण का मतलब अब सिर्फ़ पोषण की कमी नहीं है। अस्वास्थ्यकर आहार के कारण बढ़ रहा मोटापा बच्चों और किशोरों के स्वस्थ विकास के लिए चुनौती बना हुआ है। इन नीतिगत संक्षेप और स्कूलों के लिए पोषण वातावरण आकलन टूलकिट (एनइएटी-एस) का विमोचन स्कूलों में अधिक स्वस्थ खाद्य वातावरण बनाने की नीतियां तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हर बच्चे का यह अधिकार है कि उसे ऐसा खान-पान का माहौल मिले जो उसे फलने-फूलने, सीखने और अपनी पूर्ण क्षमता हासिल करने में मदद करे।"

'रिज़ॉल्व टू सेव लाइव्स' (आरटीएसएल)के कार्यकारी निदेशक डॉ. सैयद इमरान फारूक ने हृदय रोगों और अन्य स्वास्थ्य खतरों के बोझ को कम करने के लिए ऐसी खाद्य नीतियों के साथ-साथ अत्यधिक नमक, वसा और चीनी के सेवन में कटौती की आवश्यकता पर बल दिया, जो अधिक स्वस्थ खाद्य वातावरण का समर्थन करती हैं। उन्होंने आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व की भी सराहना की और पूरे भारत में स्वस्थ खाद्य वातावरण बनाने के साझा दृष्टिकोण के प्रति आरटीएसएल की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस परामर्श कार्यशाला में कई राज्यों में स्कूलों के खाद्य वातावरण, अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन, पोषण शिक्षा, खान-पान के व्यवहार, वित्तीय नीतिगत विकल्पों और पोषण वातावरण के आकलन पर कंसोर्टियम भागीदारों द्वारा तैयार किए गए नए साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। कार्यशाला का समापन बच्चों और किशोरों के लिए अधिक स्वस्थ खाद्य वातावरण तैयार करने के लिए इन साक्ष्यों को व्यावहारिक नीतिगत सिफारिशों में बदलने पर आयोजित विषयगत चर्चाओं के साथ हुआ।

पृष्ठभूमि

'लेट्स फिक्स आवर फूड' समूह की स्थापना भारत में, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए, अधिक स्वस्थ खाद्य वातावरण बनाने के लिए साक्ष्य जुटाने और नीतिगत कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। आज जारी की गई नीतिगत प्राथमिकताएं कई क्षेत्रों से जुड़े बहुविषयक अनुसंधान और परामर्शों पर आधारित हैं। इनका मकसद तालमेल बिठाकर और साक्ष्य-आधारित कार्रवाई के ज़रिए खान-पान से जुड़ी गैर-संक्रामक बीमारियों को रोकने की कोशिशों में मदद करना है।

नीतिगत संक्षेप इस लिंक पर उपलब्ध हैं: https://letsfixourfood.org/LFOF-policy-brief.php.

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