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एजुकेशन

समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए, और विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के मार्गों को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श जारी रहा

January 25, 2026 01:06 PM

शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने नई दिल्ली के द ललित होटल में 21-23 जनवरी 2026 तक आयोजित समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CwSN) के लिए समावेशी शिक्षा को मजबूत करने पर चर्चा जारी रखी। यह शिखर सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति(NEP) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD), 2016 के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में समान, सुलभ और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देना है।

शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन का फोकस “समावेशी शिक्षा के मार्ग” (Inclusive Education Pathways) पर रहा, जिसमें राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पहलों, डिजिटल उपकरणों, शिक्षक क्षमता निर्माण ढाँचों तथा अंतर-क्षेत्रीय सहयोग पर प्रकाश डाला गया ताकि समावेशी शिक्षा के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके। कार्यवाही में श्री संजय कुमार, सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL); सुश्री ए. श्रीजा, आर्थिक सलाहकार, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL); तथा शिक्षा मंत्रालय, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय संस्थानों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और साझेदार संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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दिन की शुरुआत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) में उप सचिव सुश्री इरा सिंघल ने संदर्भात्मक प्रस्तुति से की, जिसमें उन्होंने दिव्यांगता जांच के लिए संशोधित उपकरण PRASHAST 2.0 के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि PRASHAST 2.0 बच्चों की प्रारंभिक पहचान, व्यवस्थित स्क्रीनिंग और समय पर सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे विद्यालय स्तर पर साक्ष्य-आधारित योजना और लक्षित हस्तक्षेप संभव हो सकेंगे। श्री राम सिंह, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने विद्यालयों में CwSN के नामांकन से संबंधित प्रमुख आंकड़े प्रस्तुत किए और समावेशी शिक्षा नीतियों व तरीकों को मजबूत करने में डेटा-आधारित निर्णयों के महत्व पर जोर दिया। संयुक्त निदेशक श्री प्रभात मिश्रा, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), DoSEL ने PRASHAST 2.0 का लाइव प्रदर्शन किया, जिसमें इसके डिजिटल फीचर्स, UDISE+ के साथ एकीकरण तथा CwSN की कुशल स्क्रीनिंग, डेटा संग्रह, ट्रैकिंग और निगरानी की कार्यक्षमताएं प्रदर्शित की गईं।

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आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने राज्य-स्तरीय पहलों के अंतर्गत संदर्भ-विशिष्ट और विस्तार योग्य समावेशी शिक्षा मॉडल प्रस्तुत किए। डॉ. संध्या राय, निदेशक, एसीईआरटी तथा श्री सुकांत गोस्वामी, समावेशी शिक्षा समन्वयक, पश्चिम बंगाल ने PRASHAST के माध्यम से प्रारंभिक पहचान और सुदृढ़ संसाधन कक्ष प्रणालियों के जरिए बाल-केंद्रित हस्तक्षेपों पर आधारित प्रथाएं साझा कीं। श्री श्रीनिवास राव, राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, आंध्र प्रदेश ने 125 ऑटिज़्म सहायता केंद्रों की स्थापना को दिखाया, जिसे उन्होंने ऑटिज़्म से ग्रस्त बच्चों को समावेशी शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया।

विशेष शिक्षा सुधारों पर सत्र को भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) के सदस्य सचिव श्री आशीष ठाकरे ने संबोधित किया। उन्होंने विशेष शिक्षा में पेशेवर मानकों, प्रशिक्षण और नियामक ढांचों को मजबूत करने हेतु भारतीय पुनर्वास परिषद की जारी पहलों पर प्रकाश डालते हुए सभी शिक्षार्थियों के लिए समावेशी और सुलभ शिक्षा के प्रति भारतीय पुनर्वास परिषद की प्रतिबद्धता दोहराई।

पूरे दिन शिक्षकों की शिक्षा और शिक्षण पद्धति एक प्रमुख केंद्रबिंदु रहा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) में शिक्षक शिक्षा विभाग के  प्रमुख प्रोफेसर(डॉ.) शरद सिन्हा ने शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में समावेशी शिक्षण पद्धति को मुख्यधारा में लाने हेतु 8-मॉड्यूल का एक संरचित ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें सभी शिक्षार्थियों के लिए प्रवेश से लेकर उपलब्धि तक के बदलाव पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान(एनआईओएस) के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा ने सुलभ ई-कंटेंट, लचीले प्रवेश एवं परीक्षा प्रणालियों तथा ओपन स्कूलिंग के लिए समावेशी शिक्षा नीति (2022) के माध्यम से स्कूली शिक्षा के सार्वभौमीकरण की दिशा में एनआईओएस की पहलों पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(एनसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने शिक्षक शिक्षा के आधारभूत पाठ्यचर्या ढांचे में समावेशी शिक्षा के एकीकरण तथा समावेशी प्रथाओं के समर्थन में राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन की भूमिका पर जोर दिया।

सुश्री ऋचा चौहान और सुश्री कलश कौशल, स्पेशल ओलंपिक्स भारत ने बौद्धिक और विकासात्मक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए खेलों को बढ़ावा देने वाली पहलों पर प्रकाश डाला और देशव्यापी कार्यक्रमों के माध्यम से समावेश को आगे बढ़ाने में भारत के राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में संगठन की भूमिका पर जोर दिया। इंडियन ब्लाइंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन के मानद महासचिव श्री डेविड एबल्सम ने दृष्टिबाधित बच्चों के लिए खेलों पर बात की और खेलों को आत्मविश्वास, स्वतंत्रता, गतिशीलता और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए समान अवसर बनाने के साधन के रूप में महत्व पर प्रकाश डाला। 

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) में विशेष आवश्यककता समूह शिक्षा विभाग(डीईजीएसएन) की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिल्पा मनोग्ना ने मौजूदा संसाधन केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा नए संसाधन केंद्रों और संसाधन कक्षों की स्थापना के माध्यम से विविध आवश्यकताओं वाले शिक्षार्थियों को बेहतर समर्थन देने पर जोर दिया। सुश्री अमिता टंडन, शिक्षा विशेषज्ञ, यूनिसेफ ने दिव्यांगता-समावेशी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समावेशी संप्रेषण दृष्टिकोण, स्टिगमा को कम करने और वास्तविक समावेशन को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) के केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्‍थान (सीआईईटी) की प्रो. भारती कौशिक ने समावेशी अधिगम समुदाय के निर्माण में PM e-Vidya ISL चैनल 31 की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा “किताब एक, पढ़े अनेक” पहल को प्रस्तुत किया, जिसे सार्वभौमिक अधिगम अभिकल्प (UDL) के आधार पर विकसित किया गया है, जिससे एक ही पाठ्यपुस्तक से अनेक सुलभ शिक्षण मार्ग संभव होते हैं।

दिन का समापन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक ओपन हाउस चर्चा के साथ हुआ, जिससे अनुभव साझा करने और मिलकर समस्याओं को हल करने में मदद मिली। समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन की चर्चाओं ने नीतियों और अभ्यास को सुदृढ़ करने, सहायक प्रौद्योगिकियों और डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा देने, संस्थागत तैयारी बनाने तथा विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए शिक्षा, खेल और रोजगार को जोड़ने वाले भविष्य के मार्गों की पहचान करने के उद्देश्यों को और मजबूत किया।

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