संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखा गतिरोध देखने को मिला जब विपक्षी सदस्यों के एक समूह ने सदन की कार्यवाही के बीच नारेबाज़ी करते हुए विरोध दर्ज कराया। हंगामा इतना बढ़ गया कि कुछ सांसदों ने स्पीकर की चेयर की दिशा में कागज़ उछाल दिए, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।
घटना प्रश्नकाल के दौरान हुई, जब विपक्ष सरकार से एक संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था। विपक्षी दलों का आरोप था कि उनकी बात सुनने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। इसी को लेकर सदस्य अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए और नारे लगाने लगे। शोर-शराबे के बीच कुछ सांसदों ने विरोध स्वरूप दस्तावेज़ फाड़कर हवा में लहराए और चेयर की ओर उछाल दिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार सदस्यों से शांति बनाए रखने और अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। अध्यक्ष ने इसे सदन की गरिमा के खिलाफ आचरण बताते हुए कड़ी नाराज़गी जताई। संसदीय कार्य मंत्री ने भी इस व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
स्थिति काबू से बाहर जाती देख अध्यक्ष ने नियमों के तहत कार्रवाई की घोषणा की और संबंधित आठ सांसदों के नाम लेकर उन्हें पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। इसके बाद मार्शलों को बुलाया गया और निलंबित सदस्यों को सदन से बाहर जाने को कहा गया। इस कार्रवाई के विरोध में विपक्षी दलों ने वॉकआउट भी किया और इसे अलोकतांत्रिक करार दिया।
निलंबन के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोबारा शुरू होने पर सरकार ने विधायी कार्य आगे बढ़ाने की कोशिश की, जबकि विपक्षी दलों ने बाहर मीडिया से बातचीत कर अपनी नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि वे जनहित के मुद्दे उठा रहे थे और उन्हें दबाया जा रहा है।
संसदीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह के टकराव से संसद की कार्यकुशलता प्रभावित होती है और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा बाधित होती है। लगातार हो रहे व्यवधानों के बीच यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदन की गरिमा और संवाद की परंपरा कैसे कायम रखी जाए।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि लोकतंत्र में असहमति जरूरी है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति संसदीय नियमों और मर्यादाओं के दायरे में ही प्रभावी मानी जाती है।