पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एमएम नरवणे की प्रस्तावित किताब को लेकर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है। इस पूरे विवाद के बीच पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया है कि जनरल नरवणे की किताब अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है और न ही इसका कोई अंश सार्वजनिक किया गया है। प्रकाशन कंपनी के इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में नए सवाल खड़े हो गए हैं, खासकर तब, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इसी किताब का हवाला देते हुए कुछ अंश दिखाए थे।
पेंगुइन कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जनरल नरवणे की किताब फिलहाल प्रकाशन प्रक्रिया में है और यह किसी भी माध्यम से आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है। कंपनी ने साफ किया कि न तो किताब का पूरा मसौदा और न ही उसका कोई चयनित हिस्सा सार्वजनिक डोमेन में डाला गया है। ऐसे में संसद में दिखाए गए कथित अंशों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि वे आखिर आए कहां से।
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब राहुल गांधी ने संसद में सरकार की नीतियों और सैन्य मामलों से जुड़े एक मुद्दे पर चर्चा के दौरान जनरल नरवणे की किताब का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि किताब में कुछ ऐसे तथ्य दर्ज हैं, जो मौजूदा सरकार के रुख पर सवाल खड़े करते हैं। इसके बाद सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और इसे सेना व पूर्व सैन्य प्रमुख की प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए गंभीर मामला बताया।
सरकार समर्थक सांसदों का कहना है कि यदि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, तो उसके अंशों का संसद में इस्तेमाल करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे गलत संदेश भी जाता है। वहीं, कांग्रेस का तर्क है कि जो सामग्री सामने आई है, वह सार्वजनिक चर्चा के दायरे में आती है और उस पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रकाशन प्रक्रिया, गोपनीयता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी अप्रकाशित किताब की सामग्री का सार्वजनिक मंच पर उपयोग करना कानूनी और नैतिक दोनों ही दृष्टियों से संवेदनशील विषय हो सकता है। यदि प्रकाशक का दावा सही है, तो यह जांच का विषय बन सकता है कि सामग्री लीक कैसे हुई।
फिलहाल पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के बयान के बाद विवाद और गहराता दिख रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे कोई आधिकारिक जांच होती है या नहीं, और क्या जनरल नरवणे या संबंधित पक्ष इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देते हैं। इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बना रहेगा।