बजट सत्र के दसवें दिन संसद का माहौल और ज्यादा गरमा गया है। विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने के प्रस्ताव को लेकर औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर अब तक 103 सांसदों के हस्ताक्षर जुटा लिए गए हैं, जिसे जल्द ही लोकसभा सचिवालय में सौंपा जा सकता है। इस कदम से सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहे हैं और सरकार के पक्ष में फैसले लिए जा रहे हैं। विपक्षी सांसदों का कहना है कि उनकी आवाज को बार-बार दबाया जा रहा है, सवालों और स्थगन प्रस्तावों को खारिज किया जा रहा है और सदन में चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिए जा रहे। इसी असंतोष के चलते अब स्पीकर के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाने की रणनीति बनाई जा रही है।
संविधान के प्रावधानों के अनुसार, लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने से पहले कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। विपक्ष का दावा है कि वह इस न्यूनतम संख्या से कहीं आगे निकल चुका है और 103 सांसदों का समर्थन जुटा लिया गया है। हालांकि, प्रस्ताव को पारित कराने के लिए लोकसभा में बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे हासिल करना विपक्ष के लिए आसान नहीं माना जा रहा है।
सत्तापक्ष ने विपक्ष के इस कदम को राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। सरकार का कहना है कि स्पीकर सदन की मर्यादा और नियमों के तहत ही कार्यवाही संचालित कर रहे हैं। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है और अब संवैधानिक पद की गरिमा को निशाना बनाया जा रहा है।
बजट सत्र के दौरान पहले ही कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल चुकी है। महंगाई, बेरोजगारी, एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और बजट प्रावधानों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। वहीं, सरकार का फोकस बजट पारित कराने और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव भले ही व्यावहारिक रूप से सफल न हो, लेकिन यह विपक्ष की एक रणनीतिक चाल है। इसके जरिए वह सरकार पर दबाव बनाना और जनता के सामने अपनी नाराजगी को स्पष्ट रूप से रखना चाहता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस प्रस्ताव पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और क्या इससे बजट सत्र की कार्यवाही और ज्यादा प्रभावित होती है।