उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उनके मानदेय में वृद्धि का निर्णय लेकर लाखों महिलाओं को आर्थिक सहारा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। विधान परिषद में की गई घोषणा के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने स्पष्ट किया कि यह फैसला लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस फैसले से प्रदेश की लगभग 3.10 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। वर्तमान में उन्हें क्रमशः लगभग 8,000 रुपये और 4,000 रुपये मानदेय मिल रहा था, जिसमें अब बढ़ोतरी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास से जुड़ी सेवाओं को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा।
इस घोषणा को सामाजिक कल्याण से जुड़े व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि फ्रंटलाइन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में यह भी बताया गया कि आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का निर्णय लंबे समय से लंबित मांगों को संबोधित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
इसके अतिरिक्त, विभाग में रिक्त हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी जारी है, जिससे रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। इससे न केवल सेवा तंत्र मजबूत होगा बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पोषण एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को बल मिलेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने के साथ-साथ बाल विकास और मातृ स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को गति देगा। आंगनबाड़ी नेटवर्क भारत की सामाजिक कल्याण प्रणाली की आधारशिला माना जाता है और ऐसे में मानदेय बढ़ोतरी को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार का यह कदम महिला कार्यबल के सशक्तिकरण और सेवा ढांचे के विस्तार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके प्रभाव से ग्रामीण विकास और पोषण मिशनों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है।