भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देते हुए हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा सामने आई है, जिसके तहत दोनों देश मिलकर दुनिया का ऐसा हेलीकॉप्टर विकसित और निर्मित करेंगे जो हिमालय की सबसे ऊंची चोटी तक उड़ान भरने की क्षमता रखेगा। यह ऐलान नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात के दौरान हुआ, जब दोनों नेताओं ने उन्नत रक्षा और एयरोस्पेस सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में कई समझौतों पर सहमति जताई।
भारत दौरे पर आए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए उच्च प्रौद्योगिकी, रक्षा निर्माण और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। बातचीत के दौरान दोनों देशों ने संयुक्त रूप से हेलीकॉप्टर निर्माण परियोजना को भविष्य के औद्योगिक सहयोग का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल विश्वास और तकनीकी क्षमता का उदाहरण है और इसके माध्यम से भारत में ही ऐसे हेलीकॉप्टर बनाए जाएंगे जो अत्यधिक ऊंचाई पर संचालन में सक्षम होंगे।
इस परियोजना के तहत कर्नाटक के वेमगल में स्थापित असेंबली लाइन से उत्पादन शुरू करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया है, जिसे दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से उद्घाटित किया। यह पहल न केवल रक्षा सहयोग को मजबूत करेगी बल्कि भारत को वैश्विक एयरोस्पेस निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उच्च तकनीक निर्माण और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी, क्योंकि इन हेलीकॉप्टरों को वैश्विक बाजार में भी भेजने की योजना है।
प्रधानमंत्री ने इस साझेदारी को व्यापक रणनीतिक संबंधों का विस्तार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग अब समुद्र की गहराइयों से लेकर पर्वतों की ऊंचाइयों तक फैला हुआ है। इसी विश्वास के आधार पर भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया है, जिससे रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और नवाचार क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का यह दौरा कई अन्य समझौतों के लिए भी अहम रहा, जिनमें उन्नत सामग्री, डिजिटल विज्ञान, स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा छात्र एवं स्टार्टअप सहयोग जैसी पहलें शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और वैश्विक संस्थागत सुधारों पर भी साझा दृष्टिकोण व्यक्त किया।
विश्लेषकों के अनुसार यह परियोजना केवल एक तकनीकी पहल नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच बढ़ते सहयोग का प्रतीक है। इससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, उच्च कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। संयुक्त हेलीकॉप्टर निर्माण कार्यक्रम को भविष्य में उभरते एयरोस्पेस सहयोग का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत कर सकता है।