झारखंड की राजधानी रांची से दिल्ली आ रही एक एयर एम्बुलेंस मंगलवार को बीच रास्ते दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भीषण हादसे में गंभीर मरीज सहित कुल सात लोगों की मौत हो गई। हादसे ने एक बार फिर एयर एम्बुलेंस सेवाओं की सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एयर एम्बुलेंस रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। विमान में एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली लाया जा रहा था। मरीज के साथ परिजन, डॉक्टरों की मेडिकल टीम और क्रू सदस्य सवार थे। उड़ान के कुछ समय बाद ही विमान से संपर्क टूट गया। बाद में स्थानीय प्रशासन को दुर्घटना की सूचना मिली।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमान नीचे आते समय असंतुलित दिखाई दे रहा था। कुछ ही पलों में वह जमीन से टकरा गया और उसमें आग लग गई। बचाव दल और दमकल की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका। प्रशासन ने सभी सातों यात्रियों की मौत की पुष्टि की है।
मृतकों में मरीज, उसके परिजन, पायलट, को-पायलट और दो मेडिकल स्टाफ सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। संबंधित अधिकारियों ने सवारों की सूची जारी कर दी है और परिजनों को सूचित किया जा रहा है। हादसे के कारणों की जांच के लिए विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक आशंका खराब मौसम या तकनीकी खराबी की जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी।
झारखंड और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना पर शोक व्यक्त किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी विस्तृत जांच का भरोसा दिलाया है। हादसे के बाद एयर एम्बुलेंस संचालन कंपनियों के सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
यह घटना उन परिवारों के लिए गहरा आघात है, जो अपने प्रियजनों को जीवन बचाने की उम्मीद में दिल्ली भेज रहे थे। एयर एम्बुलेंस सेवाएं आपातकालीन चिकित्सा परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन इस दुर्घटना ने सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित कर दिया है।