उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सिंगापुर यात्रा राज्य के लिए निवेश के लिहाज से अहम मानी जा रही है। 26 फरवरी 2026 को जारी जानकारी के अनुसार इस दौरे के दौरान करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार का दावा है कि ये प्रस्ताव इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर, हरित ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं।
राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, सिंगापुर में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों और निवेशक सम्मेलनों में कई वैश्विक कंपनियों और फंड मैनेजमेंट संस्थाओं ने उत्तर प्रदेश में रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को राज्य की नई औद्योगिक नीति, बेहतर कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर की जानकारी दी। साथ ही ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार और सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम को भी प्रमुखता से रखा गया।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित निवेश से रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित हो सकते हैं। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, फिनटेक, वेयरहाउसिंग और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स की संभावना जताई गई है। निवेशकों ने उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी और उभरते बाजार को दीर्घकालिक अवसर के रूप में देखा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को पारदर्शी और स्थिर नीति ढांचा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्षों में राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने निवेश माहौल को मजबूत किया है।
हालांकि, आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना असली चुनौती होगा। कई बार एमओयू स्तर पर घोषित निवेश परियोजनाएं क्रियान्वयन में समय लेती हैं। इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रस्तावों में से कितने प्रोजेक्ट वास्तविक निवेश में बदलते हैं।
फिलहाल, सिंगापुर यात्रा को राज्य सरकार एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। यदि प्रस्तावित निवेश साकार होता है, तो यह उत्तर प्रदेश की औद्योगिक विकास रणनीति को नई दिशा दे सकता है और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है।