अगर आप बार-बार एटीएम से नकदी निकालने के आदी हैं, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। 2 अप्रैल 2026 से बैंकों ने एटीएम लेनदेन से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिए हैं, जिनका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। नए नियमों के तहत तय सीमा से अधिक बार कैश निकालने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
दरअसल, बैंक हर महीने अपने ग्राहकों को एटीएम से मुफ्त लेनदेन की एक सीमित संख्या देते हैं। इसमें अपने बैंक और अन्य बैंकों के एटीएम से किए गए ट्रांजैक्शन शामिल होते हैं। अब इस फ्री लिमिट को पार करने पर पहले से ज्यादा चार्ज वसूला जाएगा। महानगरों में यह सीमा आमतौर पर 3 से 5 मुफ्त ट्रांजैक्शन तक होती है, जबकि छोटे शहरों में यह संख्या थोड़ी अधिक हो सकती है।
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, फ्री लिमिट खत्म होने के बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर 20 से 25 रुपये तक का शुल्क लगाया जा सकता है। यह शुल्क केवल कैश निकासी पर ही नहीं, बल्कि बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट जैसी सेवाओं पर भी लागू हो सकता है, अगर वे निर्धारित सीमा से ज्यादा बार की जाती हैं।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना और एटीएम नेटवर्क पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। साथ ही, यह कदम ग्राहकों को जिम्मेदारी से बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगा।
ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे अपने बैंक द्वारा तय की गई फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट और शुल्क संरचना को ध्यान से समझें। जरूरत पड़ने पर मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई जैसे डिजिटल विकल्पों का इस्तेमाल करना ज्यादा किफायती साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, बार-बार एटीएम से कैश निकालना अब महंगा पड़ सकता है। ऐसे में अपनी आदतों में बदलाव लाकर और स्मार्ट तरीके से लेनदेन करके आप अतिरिक्त खर्च से बच सकते हैं।