इस अधिनियम के तहत बाल कल्याण समितियों को देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (जेजे अधिनियम, 2015) के संचालन के लिए नोडल मंत्रालय है। यह अधिनियम बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण सुनिश्चित करने वाला प्राथमिक कानून है। इसे राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश कार्यान्वित करते हैं। यह अधिनियम राज्य एवं जिला स्तर पर वैधानिक संरचनाएं बनाता है, जिनमें राज्य बाल संरक्षण समिति, बाल कल्याण समितियां, किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) और जिला बाल संरक्षण इकाइयां शामिल हैं। इसमें बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) की स्थापना का भी प्रावधान है।
किशोर न्याय अधिनियम 2015 (धारा 27-30) के तहत, बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) को देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के संबंध में उनके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। उन्हें बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) के कामकाज की निगरानी करने का भी दायित्व सौंपा गया है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर इस अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय/राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों का प्रावधान किया गया है (धारा 109)। इसके अलावा, किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 106 के अनुसार, अधिनियम के कार्यान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों की है।
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 54 के तहत निरीक्षण समितियों को बाल-आश्रय केंद्रों का दौरा करने का अधिकार दिया गया है। जिला मजिस्ट्रेट जिले में देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के लिए नोडल प्राधिकारी हैं और निरीक्षण समितियों की प्रस्तुत रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कार्रवाई करने के लिए भी वही प्राधिकारी हैं। मंत्रालय नियमित रूप से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के साथ संपर्क में रहता है। मिशन वात्सल्य योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न परामर्श जारी किए गए हैं।
वात्सल्य मिशन के तहत, जिला बाल संरक्षण इकाई जिला मजिस्ट्रेट के समग्र पर्यवेक्षण में कार्य करती है ताकि सेवा वितरण संस्थानों अर्थात् बाल देखभाल संस्थानों और प्रदान की जाने वाली देखभाल की समीक्षा, निगरानी और निरीक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 41 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को उन बाल देखभाल संस्थानों का पंजीकरण रद्द करने या रोकने का अधिकार देती है जो अधिनियम की धारा 53 में निर्दिष्ट पुनर्वास और पुन: एकीकरण सेवाएं प्रदान करने में विफल रहते हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने समय-समय पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिशन वात्सल्य के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न दिशा-निर्देश और सलाह जारी की हैं। मंत्रालय योजना के कार्यान्वयन के संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित रूप से संपर्क में भी रहता है। मिशन वात्सल्य योजना के शुभारंभ के बाद से ही, योजना को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने और कार्यान्वित करने के लिए मंत्रालय क्षेत्रीय सम्मेलन और जागरूकता/प्रसार कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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