चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के उद्देश्य से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता संख्या में कमी दर्ज की गई है। चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में ऐसे नाम हटाए गए हैं जो या तो दोहराव वाले थे, स्थानांतरित हो चुके थे या फिर मृत्यु के बाद भी सूची में बने हुए थे।
ECI का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करने का यह अभियान नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका मकसद चुनावों की विश्वसनीयता को मजबूत करना है। SIR के दौरान घर-घर सत्यापन, डिजिटल डेटा मिलान और स्थानीय स्तर पर जांच की गई, जिसके बाद कई अयोग्य या निष्क्रिय मतदाताओं के नाम हटाए गए। इससे कुल मतदाता संख्या में कमी आई है, हालांकि आयोग ने इसे “स्वाभाविक और आवश्यक सुधार” बताया है।
आंकड़ों के मुताबिक, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कमी देखी गई है, उनमें शहरी क्षेत्रों में अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इसकी वजह प्रवास, नौकरी के लिए स्थान परिवर्तन और नामों का दोहराव बताया जा रहा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी कुछ हद तक नामों की सफाई की गई है, लेकिन वहां यह कमी अपेक्षाकृत कम रही।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के साथ ही नए मतदाताओं को जोड़ने का काम भी लगातार जारी है। खासतौर पर युवा मतदाताओं को पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ सके। आयोग का दावा है कि हटाए गए नामों की तुलना में नए नामों का जुड़ना भी संतुलित रूप से हो रहा है।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं और आशंका जताई है कि कहीं यह प्रक्रिया कुछ वर्गों को प्रभावित न कर रही हो। इसके जवाब में ECI ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप की गई है, और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।
कुल मिलाकर, SIR के बाद मतदाता सूची में आई यह कमी चुनावी प्रणाली को अधिक सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि आगामी चुनावों में इसका क्या प्रभाव पड़ता है और क्या यह बदलाव मतदाताओं के विश्वास को और मजबूत कर पाता है।