Iran और Israel के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के साथ समझौता होना “पूरी तरह संभव” है, लेकिन अगर बातचीत विफल होती है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है और वैश्विक स्तर पर भी चिंता गहराने लगी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से बैक-चैनल वार्ता चल रही है। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है और जल्द ही किसी समझौते की संभावना बन सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि ईरान तय शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिका “पहले से अधिक तीव्र” सैन्य हमले कर सकता है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक इस प्रस्ताव पर अंतिम प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरानी नेताओं का कहना है कि अमेरिका दबाव बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका ने यहां अपनी सैन्य गतिविधियों को कुछ समय के लिए रोकने का संकेत दिया है ताकि वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके। ट्रंप ने कहा कि यदि समझौता हो जाता है तो क्षेत्र में शांति स्थापित हो सकती है और तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।
दूसरी ओर, इजराइल लगातार ईरान समर्थित संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। हाल ही में लेबनान में हुए हमलों में हिजबुल्लाह के एक वरिष्ठ कमांडर के मारे जाने की खबर भी सामने आई है। इससे पूरे क्षेत्र में संघर्ष और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल होती है तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है। लेकिन बातचीत असफल रहने की स्थिति में सैन्य टकराव और तेज हो सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।