NEET 2026 परीक्षा को लेकर देश में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने आरोप लगाया है कि इस बार की परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न पहले से उपलब्ध एक ‘गेस पेपर’ से मेल खाते हैं। उनका दावा है कि लगभग 120 प्रश्न ऐसे थे जो कोचिंग संस्थानों द्वारा तैयार किए गए अनुमानित प्रश्न पत्र से मिलते-जुलते पाए गए, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
राहुल गांधी के अनुसार, यह मामला केवल संयोग नहीं हो सकता, बल्कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमजोर करती है।
वहीं दूसरी ओर, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था और जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक के प्रारंभिक निष्कर्षों में किसी बड़े पैमाने पर पेपर लीक का ठोस प्रमाण नहीं मिला है। अधिकारियों के अनुसार, प्रश्नों की समानता का मतलब सीधे तौर पर लीक नहीं माना जा सकता, क्योंकि कई बार कोचिंग संस्थान पिछले वर्षों के पैटर्न के आधार पर संभावित प्रश्न तैयार करते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ कोचिंग सेंटर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने परीक्षा पैटर्न का गहराई से विश्लेषण करके ‘प्रेडिक्शन पेपर्स’ तैयार किए थे। इसी वजह से कुछ प्रश्नों में समानता देखी जा सकती है। हालांकि, जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रश्न पत्र वितरण प्रणाली की गहन समीक्षा कर रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में किसी भी स्तर पर लीक या अनुचित पहुंच साबित होती है, तो यह पूरे परीक्षा ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। लेकिन फिलहाल जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता साबित होती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर भारत की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी पर बहस को तेज कर दिया है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर अब सभी की नजरें जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।