अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की नई शांति योजना को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया है। इसके बाद तेहरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई, जिससे मध्य पूर्व में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान और कतर जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में युद्धविराम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को कम करने जैसी शर्तें शामिल थीं। ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सभी पक्षों को सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी।
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान पिछले कई दशकों से दुनिया को भ्रमित करता आया है और अब अमेरिका उसके दबाव में नहीं आने वाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन की प्राथमिकता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं पर सख्त नियंत्रण है। ट्रंप ने संकेत दिए कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिक्रिया को “अनुचित और आक्रामक” बताया। तेहरान का कहना है कि अमेरिका केवल अपनी शर्तें थोपना चाहता है और वास्तविक शांति प्रक्रिया में रुचि नहीं रखता। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने सैन्य दबाव बढ़ाया तो उसका जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा। साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में विदेशी सैन्य उपस्थिति पर गंभीर चिंता जताई।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव वैश्विक तेल बाजार को भी प्रभावित कर सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकता है। ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक बाजार में तेल कीमतों में उछाल भी देखा गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजरायल और लेबनान की स्थिति भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कठोर सीमाएं स्वीकार करे, जबकि तेहरान इसे अपनी संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा मानता है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत का रास्ता अपनाएंगे या फिर यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल जाएगा। फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।