Saturday, May 30, 2026
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हेल्थ

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण–6 जारी किया

May 30, 2026 10:15 AM

यह सर्वेक्षण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और वित्तीय सुरक्षा में देश की तीव्र प्रगति को दर्शाता है

स्वास्थ्य इकाईयों में होने वाले प्रसव की संख्या 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है

एएनसी कवरेज 92.6 प्रतिशत से बढ़कर 95.9 प्रतिशत हो गया है

12-23 महीने आयु वर्ग के बच्चों को लगने वाले टीके का प्रतिशत लगातार 96 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है

95.6 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से हुआ है क्योंकि यह उनकी पहली पसंद थी

रोटावायरस टीकाकरण कवरेज दोगुने से अधिक हो गया है

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने से भारत पूर्ण टीकाकरण कवरेज में महत्वपूर्ण सुधार की ओर अग्रसर है, 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है

बाल पोषण संकेतक में सुधार देखा गया है, बौनापन में 17 प्रतिशत और गंभीर कुपोषण में 32 प्रतिशत की कमी आई है

आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई और बढ़ाई गई स्वास्थ्य सुरक्षा पहलों ने स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा को मजबूत किया है
 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज यहां राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण – 6 जारी किया। इस सर्वेक्षण का संचालन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2023-24 के दौरान मुंबई स्थित अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस) के सहयोग से नोडल एजेंसी के रूप में किया गया था। 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को कवर करने वाला यह सर्वेक्षण जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण संकेतकों पर महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करता है और जिला स्तर तक साक्ष्य-आधारित योजना और कार्यक्रम कार्यान्वयन में सहयोग करता है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण–6 के मुख्य निष्कर्ष

भारत ने स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक विकास संकेतकों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इससे निरंतर नीतिगत हस्तक्षेपों और प्रमुख कार्यक्रमों के लक्षित कार्यान्वयन के प्रभाव का पता चलता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (2023-24) तक के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

सुरक्षित मातृत्वसंस्थागत प्रसवमातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल में सुधार

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 देश भर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण सुधारों को उजागर करता है। 95.9 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) प्राप्त हुई। इसके साथ ही पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल का लाभ उठाने वाली माताओं की संख्या 70.0 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गई। कम से कम चार एएनसी सेवाएं प्राप्त करने वाली माताओं की संख्या भी 58.5 प्रतिशत से बढ़कर 65.2 प्रतिशत हो गई। यह मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर निरंतरता है।

संस्थागत प्रसव मामलों में 88.6 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, इससे भारत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के करीब पहुंच गया है। कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए गए प्रसवों में 89.4 प्रतिशत से 91.3 प्रतिशत का सुधार हुआ है, जबकि प्रसव के दो दिनों के भीतर डॉक्टर/नर्स/लेडी हेल्थ विजिटर (एलएचवी)/सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम)/मिडवाइफ/अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नवजात शिशुओं की प्रसवोत्तर देखभाल में 79.1 प्रतिशत से 85.3 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

मातृ पोषण संकेतकों में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। गर्भावस्था के दौरान 100 दिनों या उससे अधिक समय तक आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट का सेवन करने वाली माताओं की संख्या 44.1 प्रतिशत से बढ़कर 54.9 प्रतिशत हो गई, जबकि 180 दिनों या उससे अधिक समय तक सप्लीमेंट का सेवन करने वाली माताओं की संख्या 26.0 प्रतिशत से बढ़कर 37.8 प्रतिशत हो गई।

ये उपलब्धियां जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके), प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए/ई-पीएमएसएमए), सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन), सुविधा आधारित नवजात शिशु देखभाल, गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई 2.0) जैसी पहलों के लक्षित कार्यान्वयन से प्रेरित होकर, मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और देश भर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती हैं। इन कार्यक्रमों ने प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल कवरेज को बढ़ाया है, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित की है और सुरक्षित मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य तौर-तरीकों को बढ़ावा दिया है।

परिवार नियोजन में सुधार

भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.0 पर स्थिर है। गर्भनिरोधक उपयोग दर (सीपीआर) 66.7 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गई है। इसमें मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है, फलस्वरूप आवश्यकता के समय लोगों को परिवार नियोजन सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्राप्त हो रही है।

ये सुधार मिशन परिवार विकास सहित राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रमों के निरंतर प्रभाव को रेखांकित करते हैं।

बाल टीकाकरण की सफलता

भारत सार्वभौमिक टीकाकरण कवरेज की दिशा में लगातार मजबूत प्रगति कर रहा है। टीकाकरण कार्ड के आधार पर 12-23 महीने की आयु के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया है।

95.6 प्रतिशत बच्चों को अधिकांश टीके सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से लगाए गए। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति समुदाय के विश्वास की पुष्टि होती है।

12 से 23 महीने की आयु के बच्चों को मिलने वाले सभी टीकों का प्रतिशत लगातार 96 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है। प्रमुख टीकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। रोटावायरस टीकाकरण कवरेज में 36.4 प्रतिशत से 85.4 प्रतिशत तक उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। खसरा युक्त टीके की दूसरी खुराक की कवरेज भी 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 71.8 प्रतिशत हो गयी है।

सर्वेक्षण में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया। बच्चों में तीव्र श्वसन संक्रमण (एआरआई) के लक्षणों की व्यापकता 2.8 प्रतिशत से घटकर 1.9 प्रतिशत और गंभीर दस्त की व्यापकता भी घटकर 0.5 प्रतिशत हो गई है।

ये उपलब्धियां समर्पित अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत करने, उन्नत कोल्ड चेन अवसंरचना, यू-विन जैसे डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत सक्रिय सामुदायिक भागीदारी को दर्शाती हैं।

भारत में बाल पोषण की प्रगति: सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक सकारात्मक प्रगति

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण–6 बाल पोषण परिणामों में उत्साहजनक प्रगति का संकेत देता है।

सर्वेक्षण अवधि के दौरान छह महीने से कम उम्र के 95.6 प्रतिशत बच्चे स्तनपान कर रहे थे। इसके अलावा, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान करने वाले तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों का प्रतिशत लगभग 10 प्रतिशत अंक बढ़कर 41.8 प्रतिशत से 50.1 प्रतिशत हो गया।

पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में बौनापन (उम्र के हिसाब से कम कद) 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हो गया है। यह दीर्घकालिक पोषण सम्बंधी परिणामों में सुधार को दर्शाता है। बौनेपन की समस्या में यह उल्लेखनीय सुधार भारत में दीर्घकालिक पोषण संक्रमण और बाल स्वास्थ्य परिणामों में सुधार का मजबूत प्रमाण प्रदान करता है।

अत्यधिक कमज़ोरी (ऊंचाई के हिसाब से बहुत दुबलापन) में 7.7 प्रतिशत से 5.2 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अल्प वजन की व्यापकता में भी 32.1 प्रतिशत से 31.8 प्रतिशत तक मामूली कमी दर्ज की गई। शिशु और छोटे बच्चों के पोषण सम्बंधी तरीकों में भी सुधार देखा गया। 6-8 माह आयु के स्तनपान के साथ ठोस या अर्ध-ठोस आहार दिए जाने वाले बच्चों की संख्या 45.9 प्रतिशत से बढ़कर 59.5 प्रतिशत हो गई है।

ये उपलब्धियां विभिन्न मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों का परिणाम हैं। इनमें पोषण अभियान, सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 जैसी प्रमुख पहलें शामिल हैं। इन्हें आईसीडीएस के तहत मजबूत सेवा वितरण का समर्थन मिलता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत पूरक पहल के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी), मां का पूर्ण स्नेह (एमएए), शिशु एवं शिशु पोषण, आयरन और फोलिक एसिड अनुपूरण और विकास निगरानी ने भी बेहतर परिणामों में योगदान दिया है।

स्वास्थ्य संरक्षण विस्तार

स्वास्थ्य बीमा/वित्तपोषण योजना का दायरा परिवारों के स्तर पर 41.0 प्रतिशत से बढ़कर 60.2 प्रतिशत हो गया है। यह स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों की सफलता को दर्शाता है। आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) जैसी प्रमुख योजनाओं ने विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विस्तार सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और देश भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों से महिलाओं की डिजिटल पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण में निरंतर प्रगति दर्ज की गई है। इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी होकर 33.3 प्रतिशत से 64.3 प्रतिशत हो गई है। बैंक या बचत खातों का स्वयं उपयोग करने वाले वाली महिलाओं की संख्या 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 89.0 प्रतिशत हो गई है, और मोबाइल फोन का स्वयं उपयोग करने वाले वाली महिलाओं की संख्या 53.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.6 प्रतिशत हो गई है।

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के अंतर्गत मासिक धर्म स्वच्छता योजना (एमएचएस) और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत किफायती सैनिटरी उत्पादों जैसी पहलों से, 15-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के लिए स्वच्छ तरीकों का उपयोग 77.6 प्रतिशत से बढ़कर 79.2 प्रतिशत हो गया है। इन पहलों से देश में सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता तौर-तरीकों के बारे में जागरूकता, सुलभता और उपयोग में वृद्धि हुई है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों में कार्यक्रम कार्यान्वयन और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करता है। ये निष्कर्ष, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में निरंतर प्रगति को दर्शाते हैं।

साथ ही, बढ़ती गैर-संक्रामक बीमारियों, जीवनशैली से जुड़े जोखिमों और वयस्कों में कुपोषण और बढ़ते अधिक वजन/मोटापे के दोहरे बोझ जैसी उभरती चुनौतियां निवारक स्वास्थ्य देखभाल, व्यवहार परिवर्तन और संतुलित पोषण रणनीतियों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

कुल मिलाकर, ये निष्कर्ष सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की निरंतर प्रगति की पुष्टि करते हैं। समन्वय, अंतिम छोर तक वितरण और समावेशी विकास पर निरंतर बल देने की इन उपलब्धियों के साथ हमारा देश आबादी के स्वास्थ्य और कल्याण में और सुधार करने के लिए अच्छी स्थिति में है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 को यहां से एक्सेस किया जा सकता है: https://master-mohfw-dohfw.digifootprint.gov.in/documents/publications?page=1

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