पिछले कई दिनों से उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ था। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के कारण दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई क्षेत्रों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक का दौर देखने को मिला। इस बदले हुए मौसम ने भीषण गर्मी से लोगों को राहत दी, लेकिन अब यह राहत अधिक समय तक रहने वाली नहीं है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव सोमवार देर रात तक धीरे-धीरे समाप्त होने लगेगा। इसके बाद उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम फिर से शुष्क होने की संभावना है। बारिश की गतिविधियों में कमी आने के साथ ही तापमान में दोबारा वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
पिछले सप्ताह हुई वर्षा के कारण कई शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे चला गया था। किसानों और आम लोगों को भी इससे काफी राहत मिली। हालांकि कुछ इलाकों में तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आईं।
मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने के बाद मैदानी इलाकों में गर्म हवाओं का असर बढ़ सकता है। दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना है। दिन के समय तेज धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जून के पहले सप्ताह में उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य से गर्म रह सकता है। ऐसे में लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।
फिलहाल सोमवार रात तक कहीं-कहीं हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है, लेकिन इसके बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर लगभग समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही उत्तर भारत में बारिश का यह छोटा लेकिन राहतभरा दौर भी खत्म हो जाएगा और गर्मी एक बार फिर अपने तेवर दिखाने लगेगी।