संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था International Atomic Energy Agency (IAEA) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि हाल के महीनों में निरीक्षण और निगरानी गतिविधियों में आई बाधाओं के कारण ईरान की परमाणु गतिविधियों पर नजर रखना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है। इससे परमाणु प्रसार के जोखिम बढ़ने की आशंका पैदा हुई है।
IAEA की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी फिलहाल ईरान के कुछ प्रमुख परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने में सक्षम नहीं है। इसके चलते यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है कि संवर्धित यूरेनियम का वर्तमान भंडार कितना है, वह कहां रखा गया है और क्या ईरान ने यूरेनियम संवर्धन से संबंधित गतिविधियों को सीमित किया है या नहीं।
एजेंसी ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि उसके निरीक्षकों को पर्याप्त पहुंच नहीं मिल रही है। IAEA के अधिकारियों का मानना है कि निगरानी की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह सुनिश्चित करना कठिन हो गया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईरान के पास पहले से उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का महत्वपूर्ण भंडार मौजूद था। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे पदार्थों की नियमित निगरानी नहीं हो पाती है, तो वैश्विक स्तर पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि IAEA ने यह नहीं कहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है, लेकिन उसने पारदर्शिता और निरीक्षण व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
IAEA के महानिदेशक Rafael Grossi ने पहले भी कहा था कि एजेंसी को परमाणु सामग्री की स्थिति और स्थान के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलना आवश्यक है। उनके अनुसार, प्रभावी निगरानी के बिना किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है और इससे अंतरराष्ट्रीय विश्वास प्रभावित हो सकता है।
इस बीच, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। वहीं अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। ऐसे में IAEA की ताजा चेतावनी ने एक बार फिर इस मुद्दे को वैश्विक कूटनीति के केंद्र में ला दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए संवाद, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक होगा। आने वाले दिनों में IAEA और सदस्य देशों के बीच होने वाली चर्चाएं इस मुद्दे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।