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संपादकीय

मानसून की मार और चेतावनी की चूक: भारी बारिश के बीच सतर्कता की परीक्षा

July 21, 2026 08:16 PM

भुपिंद्र शर्मा, चंडीगढ़ 

देश के बड़े हिस्से में इन दिनों मानसून पूरे शबाब पर है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, और यह सिलसिला अगले कुछ दिनों तक थमने वाला नहीं दिखता। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बना निम्न दाब क्षेत्र गहरा रहा है, वहीं पहाड़ों की ओर एक ताज़ा पश्चिमी विक्षोभ भी बढ़ रहा है। इन दोनों मौसमी प्रणालियों का साझा असर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील पर्वतीय राज्यों पर सबसे तीखा पड़ने वाला है, जहां मौसम विभाग ने भूस्खलन और अचानक बाढ़ की स्पष्ट चेतावनी दी है। आंकड़े इस चेतावनी की गंभीरता खुद बयां करते हैं। बीते चौबीस घंटों में उत्तर प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, बिहार, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों में बारह से बीस सेंटीमीटर तक की अत्यंत भारी बारिश दर्ज की जा चुकी है।

जम्मू-कश्मीर, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी सात से ग्यारह सेंटीमीटर के बीच भारी वर्षा हुई है। यह आंकड़े महज मौसम की सामान्य सूचना नहीं, बल्कि एक चेतावनी हैं कि जमीन पहले से ही जलमग्न है और आगे की बारिश उसे और तनाव में डाल सकती है। हिमाचल प्रदेश में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार राज्य में मानसूनी गतिविधि चौबीस जुलाई तक सक्रिय रहने की संभावना है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में पीला अलर्ट जारी किया गया है, जबकि चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर के लिए लाल अलर्ट घोषित हो चुका है। इक्कीस जुलाई को कुल्लू को भी लाल अलर्ट की सूची में जोड़ दिया गया, जो दर्शाता है कि खतरा स्थिर नहीं बल्कि लगातार बढ़ता जा रहा है।

भूस्खलन, मडस्लाइड और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका के चलते प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों से दूर रहने और यात्रा से पहले आधिकारिक सलाह जरूर देखने की अपील की है। इसी सतर्कता का असर तीर्थयात्राओं पर भी साफ दिख रहा है। प्रतिकूल मौसम को देखते हुए अमरनाथ यात्रा को उन्नीस जुलाई से पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। कश्मीर संभागीय आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह एहतियाती है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। जम्मू में वैष्णो देवी यात्रा को भी इसी वजह से अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। यह फैसले भले ही श्रद्धालुओं के लिए असुविधाजनक हों, लेकिन बीते वर्षों में पहाड़ी क्षेत्रों में हुई त्रासदियों को देखते हुए इन्हें सही दिशा में उठाया गया कदम ही कहा जाएगा। मैदानी राज्यों की तस्वीर भी बहुत अलग नहीं है।

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में कहीं-कहीं भारी से अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है, तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी तेज बारिश की संभावना जताई गई है। लगातार हो रही वर्षा से राज्य की कई नदियों का जलस्तर पहले ही बढ़ चुका है। बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, गोवा, महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में सत्ताईस जुलाई तक बीच-बीच में तेज बौछारों का अनुमान है, हालांकि दिल्ली को फिलहाल भारी बारिश से राहत मिली हुई है और यहां मुख्यतः हल्की से मध्यम बारिश ही दर्ज होने की उम्मीद है, जिससे उमस भरी गर्मी से कुछ राहत मिलेगी।  पूर्वोत्तर भारत भी इस बार अछूता नहीं है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के तटीय व आंतरिक हिस्सों में छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश जारी रहने का अनुमान है, साथ ही चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी और गरज के साथ बिजली गिरने की चेतावनी भी दी गई है। यह स्थिति एक बार फिर याद दिलाती है कि भारत जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध देश में मानसून केवल राहत का मौसम नहीं, बल्कि प्रबंधन की एक बड़ी परीक्षा भी है।

एक ओर यही बारिश जलाशयों को भरती है, खेतों को सींचती है और वर्षभर की जल-आपूर्ति सुनिश्चित करती है; दूसरी ओर वही बारिश जब पहाड़ी ढलानों पर संतृप्त मिट्टी से टकराती है, तो मिनटों में भूस्खलन जैसी आपदा में बदल सकती है। राज्य आपदा प्रबंधन दल पहले से तैनात किए जा रहे हैं, पहाड़ी राजमार्गों पर भूस्खलन की आशंका वाले हिस्सों की निगरानी बढ़ाई गई है, और स्थानीय प्रशासन यात्रियों व पर्यटकों को यात्रा से पहले सतर्क रहने की सलाह लगातार दे रहा है। असल चुनौती चेतावनी जारी करने में नहीं, बल्कि उसे समय रहते आम नागरिक तक पहुंचाने और उस पर अमल कराने में है।

किसी भी मानसून-तैयार राष्ट्र की असली कसौटी यही है कि वह आती हुई बाढ़ को कितनी जल्दी भांप लेता है, और खतरे की जद में आए लोगों को कितनी तेजी से सुरक्षित स्थान तक पहुंचा पाता है। आईएमडी की चेतावनियां तकनीकी रूप से सटीक होती जा रही हैं; अब जवाबदेही राज्य प्रशासनों, स्थानीय निकायों और आम जनता की है कि वे इन चेतावनियों को गंभीरता से लें, अफवाहों के बजाय आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें, और अनावश्यक जोखिम से बचें। बारिश थमने तक सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

 

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