केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले और श्री बी.एल. वर्मा इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे
एनसीएसके सभी हितधारकों के लिए "एनसीएसके मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर" जारी करेगा
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) राष्ट्रीय राजधानी स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर सभागार में 23 अगस्त को अपना 32वां स्थापना दिवस मनाएगा।
आगामी कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए एनसीएसके के उपाध्यक्ष श्री हरदीप सिंह गिल ने बताया कि इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास आठवले और श्री बीएल वर्मा उपस्थित रहेंगे।
एनसीएसके के सदस्य श्री करम सिंह कर्मा, एनसीएसके के सचिव श्री राहुल कश्यप तथा कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
श्री गिल ने कहा कि इस एक दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 900 सफाई कर्मचारी, केंद्र, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के प्रतिनिधि, शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी), सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन, नागरिक समाज संगठन और सफाई कर्मचारियों के कल्याण, गरिमा व सुरक्षा के लिए काम करने वाले अन्य हितधारक भाग लेंगे।

एनसीएसके के उपाध्यक्ष ने कहा कि इस कार्यक्रम में सफाई कर्मचारियों की गरिमा और कल्याण, खतरनाक हाथ से मैला ढोने/सफाई कार्य के उन्मूलन, मशीनीकृत स्वच्छता को बढ़ावा देने, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी पहलों के कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

श्री गिल ने आगे बताया कि आयोग सभी हितधारकों के लिए ‘एनसीएसके मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर’ जारी करेगा। इसके माध्यम से आयोग मिस्ड कॉल करने वाले लोगों से संपर्क कर उनकी शिकायतों, समस्याओं और अभ्यावेदनों को दर्ज करेगा तथा उनके समाधान के लिए उन्हें समयबद्ध तरीके से संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अधिदेश सफाई कर्मचारियों की स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में असमानताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को विशिष्ट कार्य योजनाओं की अनुशंसा करना, सफाई कर्मचारियों तथा विशेष रूप से मैला ढोने वाने कर्मियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास से संबंधित कार्यक्रमों और योजनाओं के कार्यान्वयन का अध्ययन और मूल्यांकन करना तथा विशिष्ट शिकायतों की जांच करना है। आयोग को सफाई कर्मचारियों के किसी समूह से संबंधित कार्यक्रमों या योजनाओं के क्रियान्वयन न होने, सफाई कर्मचारियों की कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से लिए गए निर्णयों, दिशानिर्देशों या निर्देशों, उनके सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के उपायों तथा सफाई कर्मचारियों पर लागू किसी कानून के प्रावधानों से संबंधित मामलों का स्वतः संज्ञान लेने और ऐसे मामलों को संबंधित अधिकारियों अथवा केंद्र या राज्य सरकारों के समक्ष उठाने का भी अधिकार है।
इसके अतिरिक्त, आयोग को सरकार, नगरपालिकाओं और पंचायतों सहित विभिन्न प्रकार के नियोक्ताओं के तहत काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और वेतन से संबंधित कार्य परिस्थितियों का अध्ययन और निगरानी करने तथा इस संबंध में अनुशंसा करने, सफाई कर्मचारियों द्वारा सामना करने वाली किसी भी कठिनाई या दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए केंद्र या राज्य सरकारों को किसी भी मामले पर रिपोर्ट देने का अधिदेश प्राप्त है।
हालांकि "हाथ से मैला ढोने वालों के रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013" के लागू होने के बाद आयोग के अधिदेश और कार्यक्षेत्र का भी विस्तार हुआ है। उक्त अधिनियम की धारा 31(1) के अनुसार आयोग को अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी करने, इसके प्रावधानों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच करने तथा अपने निष्कर्षों को आगे की कार्रवाई के लिए अनुसंशाओं सहित संबंधित अधिकारियों को भेजने का अधिकार है। आयोग इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह भी देता है तथा अधिनियम के कार्यान्वयन में चूक से संबंधित मामलों का स्वतः संज्ञान ले सकता है।
आयोग सफाई कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और सीवर मृत्यु पीड़ितों के कानूनी वारिसों को मुआवजे के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा करता है। अपने निष्कर्षों के आधार पर आयोग सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास और उन्हें हाथ से मैला ढोने के अभिशाप से मुक्त करने के लिए समय-समय पर तथा अपनी वार्षिक रिपोर्टों में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को अपनी अनुशंसाएं देता है।
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