सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया
श्री बी. एल. वर्मा ने राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में वरिष्ठ नागरिकों के अमूल्य योगदान और त्याग की सराहना की
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आज यहां राष्ट्रीय राजधानी में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (डीएआईसी) में गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) के तहत एक वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम के दौरान, दिल्ली-एनसीआर में वरिष्ठ नागरिक घरों में रहने वाले 114 वरिष्ठ नागरिकों को ₹10 लाख से अधिक की लागत वाली 662 सहायता और सहायक उपकरण वितरित किए गए।
सहायता और सहायक उपकरण केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा द्वारा वितरित किए गए।







इस मौके पर संयुक्त सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग श्री सजीश कुमार एन. और आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एएलआईएमसीओ) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक श्री प्रवीण कुमार भी मौजूद थे।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. वीरेंद्र कुमार ने याद दिलाया कि कल (1 अक्टूबर, 2026) पूरे देश में 'अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस' मनाया गया और इस मौके पर गुजरात के भावनगर में 904 वरिष्ठ नागरिकों को सहायता और सहायक उपकरण बांटे गए। उन्होंने ऐसी पहल को आगे बढ़ाने और वरिष्ठ नागरिकों की मदद करने में युवाओं, एनजीओ और नागरिक समाज संगठनों के योगदान की सराहना की।

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने पाया कि वरिष्ठ नागरिकों को अक्सर बढ़ती उम्र के साथ सुनने, चलने-फिरने और दृष्टि से संबंधित कठिनाइयों का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने शासन में 25 वर्ष पूरे होने पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए सेवा संकल्प अभियान के अनुरूप, देश भर में वरिष्ठ नागरिकों के घरों में रहने वाले लाभार्थियों को सहायक उपकरणों के वितरण का विस्तार करने का निर्णय लिया है।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सही सहायक उपकरण मिलने से बुज़ुर्ग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां करने में ज्यादा आत्मनिर्भर बन सकते हैं और बेहतर सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी सकते हैं।
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने खेती, साहित्य और सेना जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में बुजुर्गों के अहम योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बुजुर्गों को अकेलेपन और सामाजिक अलगाव जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बुजुर्ग सम्मान और इज्जत के साथ अपना जीवन जी सकें, इसके लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।

उन्होंने युवाओं, कॉर्पोरेट जगत, एनजीओ और बुजुर्गों की भलाई के लिए काम करने वाले संगठनों से अपील की कि वे आगे आएं और एक समावेशी समाज बनाने में योगदान दें। यह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के विजन के अनुरूप है।
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आगे बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 10.38 करोड़ बुजुर्ग हैं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। कल्याणकारी सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मंत्रालय पीएम-दिव्य आशा केंद्रों की संख्या 109 से बढ़ाकर 300 करने की योजना बना रहा है, ताकि बुजुर्गों को सहायक उपकरण और संबंधित सेवाएं ज्यादा आसानी से और बिना ज्यादा इंतजार किए मिल सकें।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा ने वरिष्ठ नागरिकों का स्वागत किया और 'राष्ट्रीय वयोश्री योजना' के महत्व पर प्रकाश डाला। इस योजना को सहायता और सहायक उपकरणों की आवश्यकता वाले वरिष्ठ नागरिकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से माननीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा 1 अप्रैल, 2017 को शुरू किया गया था।

श्री बी. एल. वर्मा ने राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में वरिष्ठ नागरिकों के अमूल्य योगदान और त्याग की सराहना की। उन्होंने विभाग द्वारा शुरू की गई उन पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य पीढ़ियों के बीच आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देना और पीढ़ीगत अंतर को कम करना है, साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर सामाजिक समावेश और भागीदारी सुनिश्चित करना है।

श्री वर्मा ने उम्मीद जताई कि देश भर के वरिष्ठ नागरिक 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने में अपने अनुभव, ज्ञान और समझ का योगदान देते रहेंगे।





एएलआईएमसीओ के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक श्री प्रवीण कुमार ने डॉ. वीरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में 'राष्ट्रीय वयोश्री योजना' को लागू करने में एएलआईएमसीओ के कामकाज और कार्यक्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आने वाले वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सेवा देने के लिए एएलआईएमसीओ द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम का समापन माननीय मंत्रियों और आमंत्रित वरिष्ठ नागरिकों द्वारा महात्मा गांधी, श्री लाल बहादुर शास्त्री और डॉ. बी.आर. अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ।





यह कार्यक्रम वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, स्वतंत्रता और कल्याण सुनिश्चित करने के साथ-साथ सहायता और सहायक उपकरणों तक पहुंच को मजबूत करने और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम बनाने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह कार्यक्रम वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, स्वतंत्रता, समावेशन और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रीय वयोश्री योजना जैसी पहलों के माध्यम से, सरकार सहायक उपकरणों तक पहुंच को मजबूत कर रही है और वरिष्ठ नागरिकों, विशेष रूप से जरूरतमंद लोगों को अधिक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और पूर्ण जीवन जीने में सक्षम बना रही है।
यह उल्लेख करना उचित है कि राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है जिसका उद्देश्य जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता और सहायक उपकरण प्रदान करना है, जिससे उनकी गतिशीलता, स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता का समर्थन किया जा सके। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक सामाजिक समावेशन की सुविधा प्रदान करना और वरिष्ठ नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी में अधिक स्वतंत्र रूप से भाग लेने में सक्षम बनाना है।
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