केंद्र सरकार ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर नया निर्देश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार अब सरकारी और अर्ध-सरकारी सार्वजनिक समारोहों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों का सामूहिक प्रस्तुतीकरण अनिवार्य किया गया है। इस फैसले को राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया जा रहा है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख आयोजनों, सरकारी उत्सवों और आधिकारिक समारोहों में गीत का पूर्ण स्वरूप गाया जाएगा। अब तक अधिकांश कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत मूल रचना के सभी छह भागों को शामिल करना होगा। संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय देशभक्ति की भावना को और सशक्त करने तथा नई पीढ़ी को ऐतिहासिक धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रेरणा का स्रोत रहा है और इसके सभी छंदों में राष्ट्र के प्रति सम्मान और समर्पण की अभिव्यक्ति मिलती है।
हालांकि, इस निर्णय को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ संगठनों ने इसे राष्ट्रीय एकता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है, तो कुछ ने इसे वैकल्पिक रखने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में व्यापक संवाद और जागरूकता जरूरी है ताकि किसी प्रकार का विवाद न उत्पन्न हो।
शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय को कार्यक्रमों में अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्यों को भी अपने स्तर पर आवश्यक तैयारियां करने को कहा गया है। स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को गीत के सभी छंदों से परिचित कराने के लिए विशेष अभ्यास सत्र आयोजित किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से सार्वजनिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण स्वरूप अधिक प्रमुखता से सुनाई देगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विभिन्न राज्यों और संस्थानों में इस आदेश का क्रियान्वयन किस प्रकार किया जाता है।