पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार खाड़ी देशों से अब तक करीब 10 हजार भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है, जबकि ईरान से भी लगभग 3 हजार नागरिकों की वापसी सुनिश्चित की गई है।
क्षेत्र में जारी संघर्ष और हवाई हमलों की आशंका के बीच भारतीय दूतावासों ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर राहत और निकासी की प्रक्रिया तेज की। विशेष उड़ानों और चार्टर्ड विमानों के जरिए नागरिकों को चरणबद्ध तरीके से भारत पहुंचाया गया। कई मामलों में समुद्री मार्ग और पड़ोसी देशों के रास्ते भी उपयोग में लाए गए, ताकि फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में रह रहे भारतीयों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया। हेल्पलाइन नंबर, आपातकालीन ईमेल और सामुदायिक संगठनों के माध्यम से जानकारी एकत्र कर प्राथमिकता के आधार पर निकासी की गई। खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को पहले चरण में बाहर निकाला गया।
ईरान से लौटे भारतीयों ने वहां के हालात को लेकर चिंता जताई है। कई इलाकों में इंटरनेट और संचार सेवाएं प्रभावित होने की वजह से संपर्क साधना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद भारतीय मिशन ने स्थानीय अधिकारियों के सहयोग से सुरक्षित कॉरिडोर तैयार कर निकासी सुनिश्चित की।
भारत पहुंचने पर यात्रियों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य जांच और दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी की गईं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो नागरिक अभी भी संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में हैं, उनके लिए अगला चरण जल्द शुरू किया जाएगा। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था भी की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह अभियान चुनौतीपूर्ण था, लेकिन समन्वित प्रयासों से इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। फिलहाल सरकार ने सभी भारतीयों से अनावश्यक यात्रा से बचने और दूतावास के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।