देश में रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए मार्च की शुरुआत महंगी खबर लेकर आई है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू और व्यावसायिक दोनों प्रकार के एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है। नई दरें 7 मार्च 2026 से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और रेस्तरां संचालकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ताजा संशोधन के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं व्यावसायिक उपयोग में आने वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम 115 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। इस बदलाव के बाद देश के विभिन्न शहरों में गैस की कीमतें नई दरों के अनुसार लागू हो गई हैं। राजधानी और महानगरों में भी उपभोक्ताओं को अब गैस के लिए पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण एलपीजी की कीमतों में संशोधन करना पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस के दामों में बदलाव का सीधा असर भारत में एलपीजी कीमतों पर पड़ता है। इसी कारण समय-समय पर तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा कर उन्हें संशोधित करती हैं।
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए रसोई खर्च में वृद्धि एक चिंता का विषय बन सकती है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर होटल, ढाबा, रेस्तरां और छोटे खाद्य व्यवसायों पर पड़ने की संभावना है। इससे खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में भी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ोतरी हो सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का प्रभाव केवल रसोई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई देता है। परिवहन और सेवा क्षेत्र से जुड़े कई कारोबार एलपीजी या अन्य ईंधनों पर निर्भर रहते हैं, इसलिए कीमतों में वृद्धि का असर उनकी लागत पर भी पड़ता है।
सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी और सहायता कार्यक्रम भी चलाए जाते रहे हैं। हालांकि कीमतों में वृद्धि के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उपभोक्ताओं को किस तरह की राहत या समर्थन मिल पाता है।
कुल मिलाकर एलपीजी सिलेंडर की नई दरों के लागू होने के साथ ही देशभर में उपभोक्ताओं को अब रसोई गैस के लिए अधिक भुगतान करना होगा। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और ऊर्जा कीमतों के रुझान के आधार पर आगे भी कीमतों में बदलाव की संभावना बनी रह सकती है।