पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की आशंकाओं के बीच वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे माहौल में भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रूस ने भारत को लगभग 95 लाख बैरल कच्चा तेल भेजने की तैयारी दिखाई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार मध्य पूर्व में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का सीधा असर तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है। चूंकि दुनिया के बड़े तेल भंडार इसी क्षेत्र में स्थित हैं, इसलिए जरा-सा तनाव भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
सूत्रों के मुताबिक रूस ने भारत को अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति करने का प्रस्ताव दिया है और करीब 95 लाख बैरल तेल भेजने की तैयारी जताई है। यह आपूर्ति समुद्री मार्ग के जरिए भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाई जा सकती है। रूस पहले से ही भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है और पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार तेजी से बढ़ा है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा का असर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। हालांकि भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते जैसे कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकारी और निजी रिफाइनरियों के पास मौजूद स्टॉक मिलाकर देश के पास लगभग 45 से 50 दिनों तक की जरूरत पूरी करने के लिए तेल उपलब्ध माना जाता है। इसके अलावा भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी आपात स्थिति में कुछ दिनों तक अतिरिक्त राहत दे सकते हैं।
रूस से संभावित अतिरिक्त आपूर्ति भारत के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे बाजार में अनिश्चितता के बीच आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है और रियायती दरों पर मिलने वाला रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए लाभदायक साबित हुआ है।
ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है तो तेल कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध स्रोतों से सुनिश्चित करना होगा। रूस के अलावा सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देशों से भी भारत कच्चा तेल आयात करता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक अस्थिरता के बीच रूस की ओर से अतिरिक्त तेल आपूर्ति का संकेत भारत के लिए राहत की खबर है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव के असर को भी कुछ हद तक संतुलित किया जा सकेगा।