देश में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत केंद्र सरकार ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल और उपराज्यपालों की नियुक्तियों में बदलाव किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 6 मार्च 2026 को आदेश जारी करते हुए सात राज्यों के राज्यपालों में परिवर्तन किया, साथ ही दिल्ली और लद्दाख के उपराज्यपालों को भी बदला गया। इस फैसले को केंद्र स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पुनर्संरचना के रूप में देखा जा रहा है।
इस फेरबदल के तहत कई नए चेहरों को संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि कुछ राज्यपालों का अन्य राज्यों में तबादला किया गया है। बिहार में सेवानिवृत्त सेना अधिकारी सैयद अता हसनैन को नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके हैं और सुरक्षा तथा रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
पश्चिम बंगाल में भी राज्यपाल पद पर बदलाव किया गया है और वहां आर. एन. रवि को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं महाराष्ट्र के लिए जिष्णु देव वर्मा को राज्यपाल बनाया गया है, जो पहले तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे थे। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी अहम बदलाव देखने को मिला है। पूर्व भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
वहीं दिल्ली के मौजूदा उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। इस तरह राजधानी और लद्दाख दोनों प्रशासनिक इकाइयों में नेतृत्व परिवर्तन किया गया है।
इसके अलावा तमिलनाडु, नागालैंड और कुछ अन्य राज्यों में भी अतिरिक्त प्रभार और स्थानांतरण के जरिए नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक दक्षता और शासन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार राज्यपालों और उपराज्यपालों में इस तरह के फेरबदल समय-समय पर किए जाते हैं ताकि विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक संतुलन और संवैधानिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। नए नियुक्त अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सुशासन, समन्वय और विकास की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर, यह बदलाव देश के कई हिस्सों में प्रशासनिक नेतृत्व को नया रूप देने वाला कदम माना जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में राज्यों की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है।