तमिलनाडु की सियासत में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में प्रमुख विपक्षी धड़े के रूप में उभरे गठबंधन ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग अंतिम रूप दे दिया है। समझौते के तहत कांग्रेस 28 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी सीटें सहयोगी दलों में बांटी जाएंगी। यह गठबंधन 21 पार्टियों का व्यापक मोर्चा है, जिसकी अगुवाई द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) कर रही है।
गठबंधन सूत्रों के मुताबिक, सीट शेयरिंग पर कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी। कांग्रेस ने अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों पर जोर दिया, वहीं सहयोगी दलों को भी क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर हिस्सेदारी दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति विपक्षी वोटों के बिखराव को रोकने और संयुक्त ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राज्य नेतृत्व ने कहा कि गठबंधन सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अधिकारों और केंद्र-राज्य संबंधों जैसे मुद्दों को प्रमुखता देगा। वहीं DMK ने इसे “समान विचारधारा वाले दलों का मंच” बताया, जो राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकजुट हुआ है।
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां क्षेत्रीय दलों की मजबूत पकड़ के चलते राष्ट्रीय पार्टियां अक्सर सहयोग के रास्ते चुनाव लड़ती हैं। इस बार 21 दलों का मोर्चा बनने से मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है। विपक्षी गठबंधन राज्य की आर्थिक नीतियों, सामाजिक कल्याण योजनाओं और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों को चुनावी एजेंडा बना सकता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सीट बंटवारे का यह फॉर्मूला जमीनी स्तर पर तालमेल और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर निर्भर करेगा। यदि सहयोगी दल अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से प्रचार अभियान चलाते हैं, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है।
फिलहाल, गठबंधन के औपचारिक ऐलान के बाद कार्यकर्ता स्तर पर बैठकें और रणनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में संयुक्त रैलियों और साझा घोषणापत्र की घोषणा की उम्मीद है, जो चुनावी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।