मार्च के अंतिम सप्ताह में मौसम ने अप्रत्याशित करवट लेकर उत्तर भारत के लोगों को राहत दी है। आमतौर पर इस समय तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और हीटवेव का खतरा मंडराने लगता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण वातावरण में नमी बढ़ी है, जिससे कई राज्यों में मॉनसून जैसे हालात बन गए हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 25 मार्च के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है, जिसका असर उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से पर देखा जा रहा है। इसके चलते तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से अस्थायी राहत मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ इस मौसम में सामान्य से अधिक बारिश का कारण बन रहे हैं। यही वजह है कि मार्च में भी प्री-मानसून जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक की संभावना भी जताई गई है।
दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों तक मौसम सुहावना बना रह सकता है। दिन के तापमान में गिरावट और रात में हल्की ठंडक महसूस की जा सकती है। वहीं, पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की भी संभावना है।
इस बदले मौसम का असर कृषि पर भी पड़ सकता है। जहां एक ओर गेहूं जैसी फसलों को हल्की बारिश से फायदा हो सकता है, वहीं अधिक बारिश या ओलावृष्टि किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
फिलहाल राहत की बात यह है कि हीटवेव का खतरा टल गया है और लोगों को चिलचिलाती गर्मी से कुछ समय के लिए छुटकारा मिल गया है। हालांकि, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यह बदलाव अस्थायी है और अप्रैल के शुरुआती दिनों में तापमान फिर से बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को बदलते मौसम के अनुसार सावधानी बरतने की जरूरत है।