प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वैश्विक हालात और राष्ट्रीय चुनौतियों पर बोलते हुए ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसके परिणाम सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर गंभीर हो सकते हैं। उनके अनुसार, दुनिया पहले ही कई संकटों से जूझ रही है और ऐसे में किसी भी बड़े युद्ध का असर अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक स्थिरता पर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि आने वाला समय भारत के लिए एक बड़ी परीक्षा की तरह होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस चुनौतीपूर्ण दौर में देश को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह भारतीय क्रिकेट टीम दबाव में भी एकजुट होकर प्रदर्शन करती है, उसी तरह देश के हर नागरिक, संस्था और नेतृत्व को सामूहिक भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।
Iran से जुड़े तनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि यदि हालात बिगड़ते हैं, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों पर भी पड़ सकता है। भारत, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, ऐसे किसी भी संकट से आर्थिक दबाव महसूस कर सकता है। इसलिए सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यक रणनीतिक कदमों पर विचार कर रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत को आत्मनिर्भरता, आर्थिक मजबूती और रणनीतिक संतुलन पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों से अपील की कि वे बदलते हालात के अनुसार खुद को तैयार रखें।
अपने संदेश में उन्होंने विपक्ष और विभिन्न राजनीतिक दलों से भी सहयोग की अपील की। उनका कहना था कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए और इस समय राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में निर्णय लेने की जरूरत है।
समापन में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि देश एकजुट होकर काम करता है, तो वह किसी भी वैश्विक संकट का मजबूती से सामना कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह समय संयम, रणनीति और सामूहिक प्रयास का है, और भारत इस परीक्षा में सफल होकर उभरेगा।