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सोशल वेलफेयर

सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए सुलभता: डीईपीडब्लूडी और एपीडी ने हर नागरिक को सुलभता ऑडिटर बनाने के लिए हाथ मिलाया

March 26, 2026 03:27 PM

प्रौद्योगिकी और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए भारत में सुलभता के परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक ज़रुरी कदम उठाते हुए, भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) ने आज राष्ट्रीय राजधानी में एक नए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके विकलांग व्यक्तियों के संगठन (एपीडी) के साथ अपना सहयोग बढ़ाया है।

समझौता ज्ञापन पर 25 मार्च 2026 को डीईपीडब्लूडी के निदेशक श्री प्रदीप ए. और एपीडी की प्रमुख डॉ. भूमिका मोध ने डीईपीडब्लूडी की अतिरिक्त सचिव सुश्री मनमीत कौर नंदा, श्री आर.सी. मीना, यूएस और डीईपीडब्लूडी के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। इस नवीनीकृत साझेदारी का मकसद नागरिक सहभागिता और वास्तविक समय के डिजिटल उपकरणों की शक्ति का उपयोग करके देश भर में पहुंच का आकलन और सुधार करने के तरीके को दोबारा परिभाषित करना है।

अपने पूर्व सहयोग को आगे बढ़ाते हुए, यह समझौता ज्ञापन सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और लोकप्रिय स्थलों की पहुंच संबंधी ऑडिट करने के लिए एक अधिक संरचित और विस्तार योग्य ढांचा पेश करता है। इस पहल के केंद्र में एपीडी का "यस टू एक्सेस" ऐप है, जो क्राउडसोर्स्ड संबंधी आकलन को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक प्रौद्योगिकी-आधारित मंच है। इसके ज़रिए, डीईपीडब्लूडी का लक्ष्य प्रशिक्षित स्वयंसेवकों और समुदाय के सदस्यों द्वारा उत्पन्न पहुंच संबंधी डेटा का एक गतिशील, वास्तविक समय का भंडार बनाना है, जिससे मूल्यांकन की प्रक्रिया का लोकतंत्रीकरण हो सके और वास्तविक जीवन के अनुभव नीति और योजना को प्रभावित कर सकें।

इस पहल का मकसद स्वयंसेवकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क तैयार करना और उन्हें सशक्त बनाना है, जो आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले सार्वजनिक स्थानों का व्यवस्थित ऑडिट करेंगे। एक मानकीकृत डिजिटल इंटरफ़ेस का उपयोग करके, यह कार्यक्रम सुलभ मापदंडों पर एकसमान डेटा संग्रहण करेगा, जिससे निष्कर्षों की विश्वसनीयता और तुलनात्मकता दोनों बेहतर होंगी। इस ढांचे में अंतर्निहित एकीकृत निगरानी तंत्र लगातार निरीक्षण को और बढ़ावा देगा, जिससे समय पर हस्तक्षेप और साक्ष्य-आधारित फैसले लेने में मदद मिलेगी।

यह सहयोग सहभागी शासन की दिशा में एक बदलाव का प्रतीक है, जहां नागरिक केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि समावेशी वातावरण को आकार देने में सक्रिय भागीदार हैं। तकनीकी नवाचार को जमीनी स्तर की भागीदारी के साथ जोड़कर, इस पहल का मकसद सुलभ पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह से मजबूत करना है, जिससे द्वियांगजनों को होने वाली बुनियादी ढांचागत और व्यवहारिक दोनों किस्म की मुश्किलों का हल हो सके।

अहम बात यह है कि समझौता ज्ञापन एक गैर-वित्तीय समझौता है, जो एक साझा दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, न कि किसी लेन-देन संबंधी साझेदारी को। यह सुलभ भारत अभियान के तहत प्रगति को रफ्तार देने के लिए नागरिक समाज संगठनों के साथ सार्थक सहयोग को बढ़ावा देने पर सरकार के निरंतर जोर को दर्शाता है। एपीडी के साथ इस नए जुड़ाव से बाधा-मुक्त स्थान बनाए जाने और सुलभता को भारत के विकास का अभिन्न अंग बनाने की उम्मीद है।

इस दूरदर्शी पहल के ज़रिए से, डीईपीडब्ल्यूडी एक समावेशी समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, जहां दिव्यांगजन गरिमा, स्वतंत्रता और समान अवसर के साथ सार्वजनिक स्थानों पर आ-जा सकते हैं, साथ ही ये नागरिकों को इस परिवर्तनकारी यात्रा में भागीदार बनने के लिए भी आमंत्रित करता है।

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